होम › मुफ़्त नोट्स › कक्षा 12 जीव विज्ञान › मानव जनन
मानव जनन – कक्षा 12 जीव विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान, अध्याय 2। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
मनुष्य लैंगिक जनन करते हैं। वृषण शुक्राणु और अंडाशय अंडाणु बनाते हैं; अंडवाहिनी में निषेचन के बाद अंतर्रोपण, गर्भावस्था और प्रसव होता है।
युग्मकजनन
- शुक्रजनन शुक्रजनक नलिकाओं में यौवनारंभ से; एक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका से 4 शुक्राणु।
- अंडजनन जन्म से पहले शुरू; एक प्राथमिक अंडकोशिका से 1 अंडाणु और ध्रुवीय काय।
- आर्तव चक्र (~28 दिन): आर्तव, पुटकीय, अंडोत्सर्ग (LH उभार ~14वाँ दिन), पीतपिंड प्रावस्थाएँ।
निषेचन से प्रसव
- निषेचन अंडवाहिनी के तुंबिका भाग में; युग्मनज → तूतक → कोरकपुटी।
- कोरकपुटी गर्भाशय अंतःस्तर में अंतर्रोपित; अपरा बनकर hCG, hPL, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन स्रावित करती है।
- मानव गर्भावस्था लगभग 9 माह; ऑक्सीटोसिन प्रसव शुरू करता है; खीस (कोलोस्ट्रम) शुरुआती प्रतिरक्षी देता है।
मुख्य शब्द
- अंडोत्सर्ग
- ग्राफ़ी पुटक से द्वितीयक अंडकोशिका का मुक्त होना
- अंतर्रोपण
- कोरकपुटी का गर्भाशय भित्ति से जुड़ना
- पीतपिंड
- अंडोत्सर्ग के बाद बनी संरचना जो प्रोजेस्टेरोन स्रावित करती है
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
सर्टोली कोशिकाओं की भूमिका क्या है?2 अंक
शुक्रजनक नलिकाओं की सर्टोली कोशिकाएँ शुक्रजनन में विकसित होती जनन कोशिकाओं को पोषण देती हैं।
हॉर्मोनी नियंत्रण सहित आर्तव चक्र की प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।3 अंक
आर्तव प्रावस्था (दिन 1–5): प्रोजेस्टेरोन घटने पर अंतःस्तर टूटता है। पुटकीय प्रावस्था (दिन 5–13): FSH और LH पुटक बढ़ाते हैं; एस्ट्रोजन अंतःस्तर पुनः बनाता है। अंडोत्सर्ग (लगभग 14वाँ दिन): LH उभार से अंडाणु मुक्त। पीतपिंड प्रावस्था (दिन 15–28): पीतपिंड प्रोजेस्टेरोन स्रावित कर अंतःस्तर बनाए रखता है; निषेचन न हो तो वह नष्ट होता है और फिर आर्तव शुरू होता है।
शुक्रजनन और अंडजनन का वर्णन कीजिए और इनमें चार अंतर लिखिए।5 अंक
शुक्रजनन: शुक्रजनक नलिकाओं में शुक्राणुजन (2n) समसूत्री विभाजन से प्राथमिक शुक्राणुकोशिका बनते हैं, अर्धसूत्री I से द्वितीयक शुक्राणुकोशिका और अर्धसूत्री II से शुक्राणुप्रसू (n), जो शुक्राणु बनते हैं (शुक्राणुजनन)। अंडजनन: अंडजन जन्म से पहले बनते हैं; प्राथमिक अंडकोशिकाएँ यौवनारंभ तक पूर्वावस्था I में रुकी रहती हैं; हर चक्र में एक अर्धसूत्री I पूरा कर द्वितीयक अंडकोशिका और ध्रुवीय काय बनाती है; अर्धसूत्री II शुक्राणु प्रवेश के बाद पूरा होकर अंडाणु और एक और ध्रुवीय काय देता है। अंतर: (1) स्थान – वृषण बनाम अंडाशय; (2) एक शुक्राणुकोशिका से 4 शुक्राणु, एक अंडकोशिका से 1 अंडाणु; (3) शुक्रजनन यौवनारंभ से सतत, अंडजनन जन्म से पहले शुरू और चक्रीय; (4) शुक्राणु छोटे व गतिशील, अंडाणु बड़े व अचल।
त्वरित पुनरावृत्ति
- LH उभार से अंडोत्सर्ग।
- निषेचन स्थल: तुंबिका।
- प्रोजेस्टेरोन अंतःस्तर बनाए रखता है।
परीक्षा सुझाव
- शुक्रजनन: 1 → 4 शुक्राणु; अंडजनन: 1 → 1 अंडाणु।
- आर्तव चक्र में हॉर्मोनों की भूमिका याद रखें: FSH पुटक बढ़ाता है, एस्ट्रोजन अंतःस्तर मोटा करता है, LH उभार अंडोत्सर्ग करता है, प्रोजेस्टेरोन इसे बनाए रखता है।
अभ्यास MCQ
शुक्राणु बनते हैं
- अधिवृषण में
- प्रोस्टेट में
- शुक्रवाहक में
- शुक्रजनक नलिकाओं में
उत्तर देखें
उत्तर: (d) शुक्रजनक नलिकाओं में. शुक्रजनक नलिकाएँ।
मनुष्य में निषेचन सामान्यतः होता है
- गर्भाशय में
- अंडाशय में
- गर्भाशय ग्रीवा में
- अंडवाहिनी (तुंबिका) में
उत्तर देखें
उत्तर: (d) अंडवाहिनी (तुंबिका) में. तुंबिका।
अंडोत्सर्ग किसके उभार से होता है
- FSH
- LH
- ऑक्सीटोसिन
- प्रोलैक्टिन
उत्तर देखें
उत्तर: (b) LH. LH उभार।
पीतपिंड मुख्यतः स्रावित करता है
- प्रोजेस्टेरोन
- एस्ट्रोजन
- hCG
- टेस्टोस्टेरोन
उत्तर देखें
उत्तर: (a) प्रोजेस्टेरोन. अंतःस्तर बनाए रखता है।
गर्भावस्था परीक्षण किट में पता लगाया जाने वाला हॉर्मोन है
- FSH
- ऑक्सीटोसिन
- LH
- hCG
उत्तर देखें
उत्तर: (d) hCG. अपरा बनाती है।
एक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका से कितने शुक्राणु बनते हैं
- 1
- 2
- 4
- 8
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 4. दो अर्धसूत्री विभाजन।
गर्भाशय में अंतर्रोपित होने वाली भ्रूण अवस्था है
- युग्मनज
- कोरकपुटी
- तूतक
- कंदुकभ्रूण
उत्तर देखें
उत्तर: (b) कोरकपुटी. कोरकपुटी।
एक प्राथमिक अंडकोशिका से दोनों अर्धसूत्री विभाजनों के बाद मुक्त अंडों की संख्या है
- 4
- 2
- 3
- 1
उत्तर देखें
उत्तर: (d) 1. शेष ध्रुवीय काय बनते हैं।
सभी अध्याय: कक्षा 12 जीव विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।