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चिंतन – कक्षा 11 मनोविज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 मनोविज्ञान, अध्याय 8। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
चिंतन एक उच्चतर मानसिक प्रक्रिया है जिसमें पर्यावरण और स्मृति से प्राप्त सूचना में परिवर्तन और विश्लेषण शामिल है। यह संप्रत्ययों और प्रतिमाओं जैसे मानसिक निरूपणों का प्रयोग करता है, और इसमें समस्या समाधान, तर्कना, निर्णयन और सर्जनात्मक चिंतन शामिल हैं। भाषा और विचार निकटता से संबंधित हैं, और सर्जनात्मक और आलोचनात्मक कौशल विकसित कर चिंतन सुधारा जा सकता है।
प्रकृति, समस्या समाधान और तर्कना
- विचार के निर्माण खंड मानसिक प्रतिमाएँ और संप्रत्यय हैं; संप्रत्यय साझा विशेषताओं वाली वस्तुओं या घटनाओं को समूहित करते हैं, जो प्रायः आदिप्ररूप के इर्द-गिर्द संगठित होते हैं।
- समस्या समाधान लक्ष्य-निर्देशित चिंतन है; युक्तियों में कलन विधि (समाधान सुनिश्चित करने वाली चरणबद्ध प्रक्रियाएँ) और स्वतः शोध (साधन-साध्य विश्लेषण जैसे अंगूठा नियम) शामिल हैं। बाधाओं में मानसिक विन्यास और प्रकार्यात्मक स्थिरता, और अभिप्रेरणा का अभाव शामिल हैं।
- तर्कना निगमनात्मक (सामान्य से विशिष्ट) या आगमनात्मक (विशिष्ट से सामान्य) हो सकती है; निर्णयन में विकल्पों में चयन शामिल है और यह पक्षपातपूर्ण हो सकता है।
सर्जनात्मक चिंतन और भाषा
- सर्जनात्मक चिंतन नवीन और उपयोगी होता है; इसमें अपसारी चिंतन (अनेक संभव उत्तर, प्रवाह, लचीलेपन, मौलिकता और विस्तारण के साथ) शामिल है, अभिसारी चिंतन (एक सही उत्तर) के विपरीत।
- सर्जनात्मक चिंतन के चरण (वालास): तैयारी, उद्भवन, प्रदीपन और सत्यापन; बाधाओं में आदतें, असफलता का भय और अनुरूपता शामिल हैं, और युक्तियों में विचारावेश शामिल है।
- भाषा और विचार पर दृष्टिकोण: बेंजामिन वोर्फ़ की भाषिक सापेक्षता परिकल्पना कहती है कि भाषा विचार को आकार देती है; जीन पियाजे का मत था कि विचार पहले आता है; लेव वायगोत्स्की का मत था कि वे अलग-अलग विकसित होते हैं और लगभग दो वर्ष की आयु में मिल जाते हैं।
मुख्य शब्द
- संप्रत्यय
- साझा विशेषताओं वाली चीज़ों को समूहित करने वाली मानसिक श्रेणी
- कलन विधि
- समाधान सुनिश्चित करने वाली चरणबद्ध प्रक्रिया
- स्वतः शोध
- अंगूठा नियम जो प्रायः, पर सदा नहीं, समाधान तक ले जाता है
- प्रकार्यात्मक स्थिरता
- किसी परिचित वस्तु का नया उपयोग न देख पाना
- अपसारी चिंतन
- अनेक विविध उत्तर उत्पन्न करने वाला चिंतन
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रकार्यात्मक स्थिरता क्या है?2 अंक
प्रकार्यात्मक स्थिरता समस्या समाधान की वह बाधा है जिसमें व्यक्ति किसी वस्तु के बारे में केवल उसके सामान्य प्रकार्य के रूप में सोच पाता है और अन्य संभव उपयोग नहीं देख पाता, जैसे किताब को दरवाज़ा रोकने हेतु प्रयोग न करना।
अभिसारी और अपसारी चिंतन में अंतर बताइए।3 अंक
अभिसारी चिंतन एक सही उत्तर की ओर बढ़ता है, जैसे अंकगणित की समस्या या बहुविकल्पीय प्रश्न हल करना। अपसारी चिंतन अनेक विविध और मौलिक उत्तर उत्पन्न करता है, जैसे ईंट के उपयोग सूचीबद्ध करना, और यह प्रवाह, लचीलेपन, मौलिकता और विस्तारण से चिह्नित होता है।
सर्जनात्मक चिंतन की प्रक्रिया और इसे विकसित करने के तरीक़ों का वर्णन कीजिए।5 अंक
सर्जनात्मक चिंतन नवीन और उपयोगी विचार या उत्पाद उत्पन्न करता है। ग्राहम वालास ने प्रस्तावित किया कि सर्जनात्मक चिंतन चार चरणों से गुज़रता है। तैयारी में व्यक्ति समस्या समझता है और सूचना एकत्र करता है। उद्भवन में व्यक्ति समस्या पर सचेत रूप से कार्य बंद कर देता है, जबकि विचार अचेतन रूप से प्रक्रमित होते हैं; विराम लेना प्रायः मदद करता है। प्रदीपन में अचानक अंतर्दृष्टि या 'अहा' अनुभव होता है और समाधान प्रकट होता है। सत्यापन में विचार की जाँच, मूल्यांकन और परिष्कार किया जाता है कि वह कार्य करता है या नहीं। सर्जनात्मक चिंतन अपसारी चिंतन पर निर्भर करता है, जिसमें प्रवाह (अनेक विचार उत्पन्न करना), लचीलापन (विभिन्न प्रकार के विचार उत्पन्न करना), मौलिकता (असामान्य विचार उत्पन्न करना) और विस्तारण (विवरण जोड़ना) शामिल हैं, साथ ही विचारों के मूल्यांकन हेतु अभिसारी चिंतन। सर्जनात्मक चिंतन की बाधाओं में आदतन चिंतन और मानसिक विन्यास, असफलता या आलोचना का भय, अनुरूप होने की आवश्यकता, अभिप्रेरणा का अभाव, और प्रश्न करने को हतोत्साहित करने वाले सांस्कृतिक दबाव शामिल हैं। सर्जनात्मक चिंतन समस्याओं के प्रति अधिक जागरूक होकर और प्रश्न पूछकर, विचारावेश का प्रयोग कर जिसमें विचारों को परखे बिना सूचीबद्ध किया जाता है, जाँच सूचियों और गुण सूचीकरण का प्रयोग कर, जिज्ञासा और खुले मन को प्रोत्साहित कर, उद्भवन हेतु समय देकर, अनेक परिप्रेक्ष्य खोजकर, ग़लतियों को अधिगम का भाग मानकर, और वस्तुओं के असामान्य उपयोग खोजने जैसे कार्यों का अभ्यास कर विकसित किया जा सकता है। नए विचारों को पुरस्कृत करने वाला वातावरण भी सर्जनात्मकता का समर्थन करता है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- संप्रत्यय, प्रतिमाएँ, आदिप्ररूप।
- समस्या समाधान युक्तियाँ और बाधाएँ।
- तर्कना और निर्णयन।
- सर्जनात्मक चिंतन; भाषा और विचार।
परीक्षा सुझाव
- वालास के चार चरण याद रखें: तैयारी, उद्भवन, प्रदीपन, सत्यापन।
- उदाहरण सहित अभिसारी और अपसारी चिंतन की तुलना करें।
अभ्यास MCQ
समाधान सुनिश्चित करने वाली चरणबद्ध प्रक्रिया है
- स्वतः शोध
- अंतर्दृष्टि
- कलन विधि
- मानसिक विन्यास
उत्तर देखें
उत्तर: (c) कलन विधि. इसमें अधिक समय लग सकता है।
अनेक संभव उत्तर उत्पन्न करने वाला चिंतन है
- अभिसारी चिंतन
- निगमनात्मक तर्कना
- अपसारी चिंतन
- मूर्त चिंतन
उत्तर देखें
उत्तर: (c) अपसारी चिंतन. यह सर्जनात्मकता से जुड़ा है।
साझा विशेषताओं वाली चीज़ों को समूहित करने वाली मानसिक श्रेणी है
- प्रतीक
- संप्रत्यय
- प्रतिवर्त
- अंतर्नोद
उत्तर देखें
उत्तर: (b) संप्रत्यय. फल एक संप्रत्यय है।
सिक्के को पेचकस के रूप में प्रयोग न सोच पाना दर्शाता है
- अंतर्दृष्टि
- उद्भवन
- प्रकार्यात्मक स्थिरता
- अपसारी चिंतन
उत्तर देखें
उत्तर: (c) प्रकार्यात्मक स्थिरता. वस्तुएँ केवल सामान्य भूमिकाओं में दिखती हैं।
सामान्य सिद्धांतों से विशिष्ट निष्कर्ष तक तर्क करना है
- आगमनात्मक तर्कना
- निगमनात्मक तर्कना
- सादृश्यात्मक तर्कना
- स्वतः शोध चिंतन
उत्तर देखें
उत्तर: (b) निगमनात्मक तर्कना. सभी मनुष्य मरणशील हैं; राम मनुष्य है; अतः राम मरणशील है।
भाषिक सापेक्षता परिकल्पना किसने प्रस्तावित की
- पियाजे
- चॉम्स्की
- वायगोत्स्की
- बेंजामिन वोर्फ़
उत्तर देखें
उत्तर: (d) बेंजामिन वोर्फ़. यह कहती है कि भाषा विचार को आकार देती है।
वालास के मॉडल में वह चरण जब व्यक्ति समस्या पर सचेत रूप से कार्य बंद कर देता है और विचार अचेतन रूप से विकसित होता है
- तैयारी
- सत्यापन
- प्रदीपन
- उद्भवन
उत्तर देखें
उत्तर: (d) उद्भवन. 'अहा' क्षण बाद में आता है।
मानसिक विन्यास समस्या समाधान में बाधा क्यों बन सकता है
- यह लचीलापन बढ़ाता है
- यह लोगों से पहले सफल रही युक्ति दोहरवाता है, बेहतर युक्ति होने पर भी
- यह सभी आदतें हटा देता है
- यह सदा सफलता सुनिश्चित करता है
उत्तर देखें
उत्तर: (b) यह लोगों से पहले सफल रही युक्ति दोहरवाता है, बेहतर युक्ति होने पर भी. पिछली सफलता कठोरता उत्पन्न करती है।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।