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संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ – कक्षा 11 मनोविज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ

NCERT कक्षा 11 मनोविज्ञान, अध्याय 5। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।

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अध्याय का सार

हम संसार को संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण से जानते हैं। संवेदी ग्राही उद्दीपकों का पता लगाकर उन्हें तंत्रिका संकेतों में बदलते हैं; अवधान आगे के प्रक्रमण हेतु कुछ उद्दीपकों का चयन करता है; और प्रत्यक्षण संवेदी सूचना को संगठित और व्याख्यायित कर उसे अर्थ देता है। प्रत्यक्षण अधिगम, अभिप्रेरणा, प्रत्याशाओं और संस्कृति से प्रभावित होता है, और कभी-कभी भ्रमों की तरह ग़लत हो सकता है।

संवेदना और अवधान

  • संवेदी अंगों में आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा, तथा गतिसंवेदी और प्रघाण संवेदी शामिल हैं; प्रत्येक संवेदना की निरपेक्ष सीमा (पहचाना जा सकने वाला न्यूनतम उद्दीपक) और भेद सीमा (पहचाना जा सकने वाला सबसे छोटा परिवर्तन) होती है।
  • आँख के दृष्टिपटल में शलाकाएँ (मंद प्रकाश, श्वेत-श्याम) और शंकु (तीव्र प्रकाश, रंग) होते हैं; कान कर्णावर्त में ध्वनि तरंगों को तंत्रिका आवेगों में बदलता है।
  • अवधान चयनात्मक (कुछ उद्दीपकों का चयन), संधृत (समय के साथ एकाग्रता, सतर्कता) और विभक्त (एक से अधिक कार्य करना) होता है; कारकों में उद्दीपक का आकार, तीव्रता, गति और नवीनता तथा व्यक्ति के अभिप्रेरक और रुचियाँ शामिल हैं।

प्रत्यक्षण

  • प्रात्यक्षिक संगठन के गेस्टाल्ट सिद्धांतों में आकृति और पृष्ठभूमि, निकटता, समानता, निरंतरता, पूर्णता और लघुता शामिल हैं।
  • प्रात्यक्षिक स्थैर्य दृष्टिपटल प्रतिबिंब बदलने पर भी आकार, आकृति और चमक को स्थिर रखते हैं; गहराई प्रत्यक्षण एकनेत्री संकेतों (सापेक्ष आकार, रेखीय परिप्रेक्ष्य, अतिव्यापन, गठन प्रवणता) और द्विनेत्री संकेतों (दृष्टिपटलीय असमानता, अभिसरण) का प्रयोग करता है।
  • भ्रम ग़लत प्रत्यक्षण हैं, जैसे मूलर-लायर भ्रम; फ़ाई परिघटना तेज़ी से चमकती बत्तियों से आभासी गति है। प्रत्यक्षण अधिगम और संस्कृति से आकार पाता है।

मुख्य शब्द

संवेदना
संवेदी अंगों द्वारा उद्दीपकों का पता लगाना
प्रत्यक्षण
संवेदी सूचना को संगठित और व्याख्यायित करना
निरपेक्ष सीमा
पहचानी जा सकने वाली उद्दीपक की न्यूनतम तीव्रता
चयनात्मक अवधान
कुछ उद्दीपकों पर ध्यान केंद्रित कर अन्य की अनदेखी करना
भ्रम
किसी वास्तविक उद्दीपक का ग़लत प्रत्यक्षण

उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न

संवेदना और प्रत्यक्षण में अंतर बताइए।2 अंक

संवेदना संवेदी अंगों से उद्दीपकों का पता लगाने और उन्हें तंत्रिका संकेतों में बदलने की प्रक्रिया है। प्रत्यक्षण इन संवेदनाओं को पूर्व अनुभव और प्रत्याशाओं का प्रयोग कर संगठित और व्याख्यायित करने और उन्हें अर्थ देने की प्रक्रिया है।

प्रात्यक्षिक संगठन के तीन गेस्टाल्ट सिद्धांत समझाइए।3 अंक

निकटता: पास-पास की वस्तुएँ एक समूह के रूप में दिखती हैं। समानता: आकार या रंग में समान वस्तुएँ एक साथ समूहित होती हैं। पूर्णता: हम रिक्तियाँ भरकर अपूर्ण आकृतियों को पूर्ण देखते हैं। अन्य में निरंतरता और आकृति-पृष्ठभूमि शामिल हैं।

अवधान के प्रकारों और इसे प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।5 अंक

अवधान हमारी संवेदनाओं तक पहुँचने वाले अनेक उद्दीपकों में से आगे के प्रक्रमण हेतु कुछ उद्दीपकों के चयन की प्रक्रिया है। इसके अनेक प्रकार हैं। चयनात्मक अवधान में सीमित उद्दीपकों पर ध्यान केंद्रित कर अन्य की अनदेखी की जाती है, जैसे शोर भरे कमरे में एक व्यक्ति को सुनना ('कॉकटेल पार्टी' प्रभाव)। संधृत अवधान या सतर्कता लंबी अवधि तक किसी कार्य पर एकाग्रता बनाए रखने की क्षमता है, जैसे रडार संचालकों या हवाई यातायात नियंत्रकों हेतु; यह थकान और एकरसता से घट सकता है। विभक्त अवधान एक समय में एक से अधिक कार्य करने को कहते हैं, जो कार्यों के भली-भाँति अभ्यस्त और स्वचालित होने पर आसान होता है। अवधान विस्तार एक समय में ध्यान दी जा सकने वाली वस्तुओं की संख्या है। अनेक कारक अवधान को प्रभावित करते हैं। बाह्य कारक उद्दीपक से संबंधित हैं: उसका आकार, तीव्रता, गति, नवीनता, विरोध, पुनरावृत्ति और जटिलता; उदाहरण के लिए, बड़ा चमकता विज्ञापन ध्यान आकर्षित करता है। आंतरिक कारक व्यक्ति से संबंधित हैं: अभिप्रेरक और आवश्यकताएँ, जैसे भूखे व्यक्ति का भोजन पर ध्यान जाना; रुचियाँ, अभिवृत्तियाँ और प्रत्याशाएँ; और संज्ञानात्मक शैलियाँ। अवधान समस्याओं में अवधान-न्यूनता अतिक्रियाशीलता विकार (ADHD) शामिल है, जिसमें बच्चों को अवधान बनाए रखने और आवेगों को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। अवधान की समझ शिक्षा, विज्ञापन, सुरक्षा और कार्यस्थल डिज़ाइन में मदद करती है।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • संवेदी अंग और सीमाएँ।
  • अवधान के प्रकार और निर्धारक।
  • गेस्टाल्ट सिद्धांत; स्थैर्य; गहराई संकेत।
  • भ्रम और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव।

परीक्षा सुझाव

  • याद रखें: मंद प्रकाश हेतु शलाकाएँ और रंग हेतु शंकु।
  • प्रत्येक गेस्टाल्ट सिद्धांत को एक उदाहरण सहित सीखें।

अभ्यास MCQ

  1. संवेदी अंगों द्वारा उद्दीपकों का पता लगाना कहलाता है

    1. संवेदना
    2. प्रत्यक्षण
    3. अवधान
    4. स्मृति
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) संवेदना. यह प्रत्यक्षण से पहले होता है।

  2. रंग दृष्टि हेतु उत्तरदायी दृष्टिपटल की कोशिकाएँ हैं

    1. शलाकाएँ
    2. शंकु
    3. कान के न्यूरॉन
    4. स्वाद कलिकाएँ
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) शंकु. ये तीव्र प्रकाश में कार्य करती हैं।

  3. किसी वास्तविक उद्दीपक का ग़लत प्रत्यक्षण कहलाता है

    1. विभ्रम
    2. भ्रमासक्ति
    3. संवेदना
    4. भ्रम
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) भ्रम. मूलर-लायर इसका उदाहरण है।

  4. कुछ उद्दीपकों पर ध्यान केंद्रित कर अन्य की अनदेखी करना है

    1. विभक्त अवधान
    2. संधृत अवधान
    3. चयनात्मक अवधान
    4. प्रत्यक्षण
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) चयनात्मक अवधान. यह सूचना छानता है।

  5. पहचानी जा सकने वाली उद्दीपक की न्यूनतम तीव्रता है

    1. भेद सीमा
    2. निरपेक्ष सीमा
    3. अनुकूलन
    4. स्थैर्य
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) निरपेक्ष सीमा. यह लोगों में भिन्न होती है।

  6. पास की वस्तुओं को एक साथ समूहित करने का गेस्टाल्ट सिद्धांत है

    1. समानता
    2. पूर्णता
    3. निकटता
    4. निरंतरता
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) निकटता. पास की चीज़ें एक साथ लगती हैं।

  7. तिरछे कोण से देखी गई प्लेट फिर भी गोल दिखती है, इसका कारण है

    1. गहराई प्रत्यक्षण
    2. संवेदी अनुकूलन
    3. भ्रम
    4. आकृति स्थैर्य
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) आकृति स्थैर्य. मस्तिष्क दृष्टिपटल प्रतिबिंब को सुधारता है।

  8. गहराई प्रत्यक्षण का संकेत दृष्टिपटलीय असमानता इसलिए कार्य करता है क्योंकि

    1. एक आँख बंद होती है
    2. प्रतिबिंब उल्टा होता है
    3. वस्तुएँ धुँधली हो जाती हैं
    4. प्रत्येक आँख को थोड़ा भिन्न प्रतिबिंब मिलता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) प्रत्येक आँख को थोड़ा भिन्न प्रतिबिंब मिलता है. यह द्विनेत्री संकेत है।

सभी अध्याय: कक्षा 11 मनोविज्ञान

यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।