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न्यायपालिका – कक्षा 11 राजनीति विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ

NCERT कक्षा 11 राजनीति विज्ञान, अध्याय 6। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।

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अध्याय का सार

न्यायपालिका क़ानून के शासन की रक्षा करती, विवाद सुलझाती और अधिकारों की रक्षा करती है। भारत में एकीकृत, स्वतंत्र न्यायपालिका है जिसमें शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, राज्यों में उच्च न्यायालय और नीचे अधीनस्थ न्यायालय हैं। इसकी स्वतंत्रता नियुक्ति की विधि, कार्यकाल की सुरक्षा, निश्चित वेतन और विधायिका में न्यायाधीशों के आचरण की आलोचना से संरक्षण द्वारा सुरक्षित है। न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका ने न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक बनाया है।

स्वतंत्रता और संरचना

  • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होते हैं; व्यवहार में सिफ़ारिशें वरिष्ठ न्यायाधीशों के कॉलेजियम से आती हैं।
  • न्यायाधीश को केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, जिससे हटाना बहुत कठिन है।
  • न्यायाधीशों के वेतन संचित निधि पर भारित हैं और वित्तीय आपातकाल के अतिरिक्त उनके कार्यकाल में उनके अहित में घटाए नहीं जा सकते।
  • सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होते हैं; एकीकृत संरचना का अर्थ है कि उच्च न्यायालयों के निर्णय निचले न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार

  • मूल क्षेत्राधिकार: संघ और राज्यों के बीच या राज्यों के बीच विवाद।
  • रिट क्षेत्राधिकार: अनुच्छेद 32 के अंतर्गत मौलिक अधिकार लागू कराना।
  • अपीलीय क्षेत्राधिकार: दीवानी, फ़ौजदारी और संवैधानिक मामलों में अपील; किसी भी न्यायालय से अपील हेतु विशेष अनुमति।
  • परामर्श क्षेत्राधिकार: अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति क़ानून या तथ्य के प्रश्नों पर इसकी राय माँग सकता है।

न्यायिक पुनरावलोकन और सक्रियता

  • न्यायिक पुनरावलोकन यह जाँचने की शक्ति है कि क़ानून और कार्यकारी कार्य संविधान के अनुरूप हैं या नहीं, और न हों तो उन्हें अमान्य घोषित करना।
  • केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि संसद संविधान की मूल संरचना नहीं बदल सकती।
  • 1970 के दशक के अंत से बढ़ी जनहित याचिका (PIL) किसी भी व्यक्ति को उन लोगों की ओर से न्यायालय जाने देती है जिनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो, जिससे न्याय तक पहुँच बढ़ी।

मुख्य शब्द

न्यायिक पुनरावलोकन
क़ानूनों और कार्यकारी कार्यों की संवैधानिकता जाँचने की न्यायालयों की शक्ति
कॉलेजियम
न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफ़ारिश करने वाला वरिष्ठ न्यायाधीशों का समूह
मूल क्षेत्राधिकार
वे मामले जिन्हें न्यायालय अपील पर नहीं, सीधे सुनता है
जनहित याचिका
जनहित की रक्षा हेतु न्यायालय में दायर याचिका
मूल संरचना
संविधान की आवश्यक विशेषताएँ जिन्हें संसद नहीं बदल सकती

उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न

भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की जाती है?2 अंक

न्यायिक स्वतंत्रता नियुक्ति की विधि से सुनिश्चित होती है, जिसमें कार्यपालिका की भूमिका सीमित है और वरिष्ठ न्यायाधीश नाम सुझाते हैं; कार्यकाल की सुरक्षा से, क्योंकि न्यायाधीशों को केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता पर संसद में विशेष बहुमत की कठिन प्रक्रिया से हटाया जा सकता है; संचित निधि पर भारित निश्चित वेतन से जो उनके अहित में घटाए नहीं जा सकते; और विधायिका में न्यायाधीशों के आचरण की आलोचना से संरक्षण से।

जनहित याचिका क्या है?3 अंक

जनहित याचिका प्रदूषण, बंधुआ मज़दूरी या क़ैदियों के अधिकारों जैसे जनहित की रक्षा हेतु न्यायालय में दायर मामला है। 1970 के दशक के अंत से न्यायालयों ने किसी भी व्यक्ति या संगठन को उन लोगों की ओर से आने दिया है जो स्वयं नहीं आ सकते, और पत्रों को भी याचिका माना गया है। इसने न्याय तक पहुँच बढ़ाई है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन का महत्व समझाइए।5 अंक

भारत के सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार व्यापक है। मूल क्षेत्राधिकार में यह संघ और एक या अधिक राज्यों, या राज्यों के बीच विवादों का सीधे निर्णय करता है। रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32) में कोई भी व्यक्ति जिसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो, इसके पास जा सकता है, और यह बंदी प्रत्यक्षीकरण और परमादेश जैसी रिट जारी कर सकता है। अपीलीय क्षेत्राधिकार में यह दीवानी, फ़ौजदारी और संवैधानिक मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील सुनता है, और किसी भी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील हेतु विशेष अनुमति दे सकता है। परामर्श क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143) में राष्ट्रपति क़ानून या सार्वजनिक महत्व के प्रश्नों पर इसकी राय माँग सकता है। यह अभिलेख न्यायालय भी है जिसके निर्णय सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी हैं। न्यायिक पुनरावलोकन सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की यह जाँचने की शक्ति है कि विधायिकाओं द्वारा पारित क़ानून और कार्यपालिका के कार्य संविधान के अनुरूप हैं या नहीं, और न हों तो उन्हें शून्य घोषित करना। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, संघ और राज्यों के बीच संघीय संतुलन बनाए रखता है, और विधायिका व कार्यपालिका को संवैधानिक सीमाओं में रखता है। केशवानंद भारती मामले (1973) में न्यायालय ने माना कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है पर उसकी मूल संरचना नहीं बदल सकती, जिससे न्यायिक पुनरावलोकन और सशक्त हुआ।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • एकीकृत, स्वतंत्र न्यायपालिका।
  • केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता पर विशेष बहुमत से हटाना।
  • क्षेत्राधिकार: मूल, रिट, अपीलीय, परामर्श (अनुच्छेद 143)।
  • न्यायिक पुनरावलोकन, मूल संरचना (1973), जनहित याचिका।

परीक्षा सुझाव

  • सर्वोच्च न्यायालय के चार प्रकार के क्षेत्राधिकार, हर एक के एक उदाहरण सहित, सीखें।
  • मूल संरचना सिद्धांत हेतु केशवानंद भारती (1973) याद रखें।

अभ्यास MCQ

  1. भारत का सर्वोच्च न्यायालय है

    1. उच्च न्यायालय
    2. लोक अदालत
    3. ज़िला न्यायालय
    4. सर्वोच्च न्यायालय
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) सर्वोच्च न्यायालय. यह एकीकृत न्यायपालिका के शीर्ष पर है।

  2. क़ानूनों की संवैधानिकता जाँचने की न्यायालयों की शक्ति है

    1. न्यायिक सक्रियता
    2. महाभियोग
    3. न्यायिक पुनरावलोकन
    4. अध्यादेश
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) न्यायिक पुनरावलोकन. यह संविधान की रक्षा करती है।

  3. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है

    1. राष्ट्रपति
    2. प्रधानमंत्री
    3. संसद
    4. मुख्य निर्वाचन आयुक्त
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) राष्ट्रपति. कॉलेजियम की सिफ़ारिशों पर।

  4. राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श ले सकता है

    1. 32
    2. 143
    3. 356
    4. 368
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) 143. यह परामर्श क्षेत्राधिकार है।

  5. संघ और राज्य के बीच विवाद सर्वोच्च न्यायालय किस क्षेत्राधिकार में सुनता है

    1. अपीलीय क्षेत्राधिकार
    2. रिट क्षेत्राधिकार
    3. परामर्श क्षेत्राधिकार
    4. मूल क्षेत्राधिकार
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) मूल क्षेत्राधिकार. इन्हें सीधे सुना जाता है।

  6. मूल संरचना सिद्धांत किस मामले में प्रतिपादित हुआ

    1. गोलकनाथ मामला
    2. केशवानंद भारती मामला
    3. मिनर्वा मिल्स मामला
    4. एस.आर. बोम्मई मामला
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) केशवानंद भारती मामला. इसका निर्णय 1973 में हुआ।

  7. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाना बहुत कठिन क्यों है

    1. न्यायाधीश आजीवन नियुक्त होते हैं
    2. न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी चुनते हैं
    3. राष्ट्रपति से परामर्श नहीं हो सकता
    4. हटाने हेतु सिद्ध कदाचार या अक्षमता पर दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) हटाने हेतु सिद्ध कदाचार या अक्षमता पर दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए. इससे न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा होती है।

  8. जनहित याचिका ने मुख्यतः किस प्रकार मदद की है

    1. न्यायाधीशों की संख्या घटाकर
    2. मौलिक अधिकार सीमित कर
    3. न्यायिक पुनरावलोकन हटाकर
    4. ग़रीबों और वंचितों की ओर से लोगों को न्यायालय जाने देकर
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) ग़रीबों और वंचितों की ओर से लोगों को न्यायालय जाने देकर. इसने न्याय तक पहुँच बढ़ाई।

सभी अध्याय: कक्षा 11 राजनीति विज्ञान

यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।