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गमन एवं संचलन – कक्षा 11 जीव विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 जीव विज्ञान, अध्याय 17। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
मनुष्य में गति पेशियों और कंकाल से होती है। पेशी संकुचन सर्पी तंतु सिद्धांत का पालन करता है, और संधियाँ विभिन्न प्रकार की गति देती हैं।
पेशी
- प्रकार: कंकाल (रेखित, ऐच्छिक), आंतरांगी (चिकनी, अनैच्छिक), हृद (रेखित, अनैच्छिक)।
- सार्कोमियर (Z-रेखा से Z-रेखा) क्रियात्मक इकाई; ऐक्टिन (पतले) और मायोसिन (मोटे) तंतु।
- सर्पी तंतु सिद्धांत: Ca²⁺ ट्रोपोनिन से जुड़ता है, मायोसिन शीर्ष ऐक्टिन से जुड़ते हैं, ATP अनुप्रस्थ सेतु चक्र चलाता है; I-पट्टी छोटी होती, A-पट्टी वही रहती है।
कंकाल और विकार
- मानव कंकाल में 206 अस्थियाँ (अक्षीय 80, उपांगीय 126)।
- संधियाँ: रेशीय (कपाल सीवन), उपास्थियुक्त (कशेरुकाएँ), साइनोवियल (कंदुक-खल्लिका, कब्ज़ा, धुराग्र, विसर्पी, सैडल)।
- विकार: मायस्थीनिया ग्रेविस, अपतानिका, पेशीय दुष्पोषण, संधिशोथ, अस्थिसुषिरता, गाउट।
मुख्य शब्द
- सार्कोमियर
- दो Z-रेखाओं के बीच पेशीतंतुक की क्रियात्मक इकाई
- साइनोवियल संधि
- द्रव-भरी गुहा वाली स्वतंत्र गतिशील संधि
- प्रेरक इकाई
- एक प्रेरक न्यूरॉन और उसके द्वारा आपूर्ति की जाने वाली सभी पेशी तंतु
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
मानव कोशिकाओं द्वारा दिखाई जाने वाली तीन प्रकार की गतियाँ लिखिए।2 अंक
अमीबीय (कूटपाद से वृहत्भक्षक, श्वेताणु), पक्ष्माभी (श्वासनली और अंडवाहिनी के पक्ष्माभ) और पेशीय (पाद, जबड़े, जीभ)।
गाउट और संधिशोथ में अंतर कीजिए।3 अंक
गाउट यूरिक अम्ल क्रिस्टल जमने से संधियों की सूजन है। संधिशोथ सामान्य रूप से संधियों की सूजन है जिससे दर्द और जकड़न होती है, प्रायः उपास्थि के घिसने या स्वप्रतिरक्षी कारणों से।
सर्पी तंतु सिद्धांत के अनुसार पेशी संकुचन की क्रियाविधि का चरणबद्ध वर्णन कीजिए।5 अंक
प्रेरक न्यूरॉन तंत्रिकापेशी संधि पर ऐसीटिलकोलीन छोड़ता है, जिससे सार्कोलेमा पर सक्रिय विभव फैलता है। इससे सार्कोप्लाज़्मी जालिका Ca²⁺ छोड़ती है। Ca²⁺ ट्रोपोनिन से जुड़कर ट्रोपोमायोसिन को खिसकाता और ऐक्टिन पर मायोसिन-बंधन स्थल खोलता है। ATP जल-अपघटन से ऊर्जित मायोसिन शीर्ष ऐक्टिन से जुड़कर अनुप्रस्थ सेतु बनाते और ऐक्टिन तंतुओं को केंद्र की ओर खींचते हैं (शक्ति आघात), ADP और Pi मुक्त होते हैं। नया ATP जुड़ने पर मायोसिन शीर्ष अलग होता है; ATP जल-अपघटन से पुनः ऊर्जित होकर चक्र दोहराता है। Z-रेखाएँ पास आती हैं, I-पट्टी और H-क्षेत्र छोटे होते हैं, पर A-पट्टी वही रहती है। उद्दीपन रुकने पर Ca²⁺ वापस पंप होता है, बंधन स्थल फिर ढक जाते हैं और पेशी शिथिल होती है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- वयस्क में 206 अस्थियाँ।
- Ca²⁺ संकुचन प्रारंभ करता है।
- कंधा कंदुक-खल्लिका संधि है।
परीक्षा सुझाव
- संकुचन में H-क्षेत्र और I-पट्टी छोटी होती हैं; A-पट्टी की लंबाई नहीं बदलती।
- सार्कोमियर के भाग सीखें: Z-रेखा से Z-रेखा; A-पट्टी (गहरी, मायोसिन), I-पट्टी (हल्की, केवल ऐक्टिन), H-क्षेत्र (केवल मायोसिन), M-रेखा (केंद्र)।
अभ्यास MCQ
वयस्क मनुष्य में अस्थियों की संख्या है
- 106
- 306
- 206
- 216
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 206. 206।
घुटने की संधि है
- कंदुक-खल्लिका संधि
- धुराग्र संधि
- कब्ज़ा संधि
- विसर्पी संधि
उत्तर देखें
उत्तर: (c) कब्ज़ा संधि. कब्ज़ा।
पेशी तंतु की क्रियात्मक इकाई है
- न्यूरॉन
- कंडरा
- सार्कोमियर
- स्नायु
उत्तर देखें
उत्तर: (c) सार्कोमियर. सार्कोमियर।
पेशी संकुचन प्रारंभ करने वाला आयन है
- Na⁺
- K⁺
- Ca²⁺
- Cl⁻
उत्तर देखें
उत्तर: (c) Ca²⁺. ट्रोपोनिन से जुड़ता है।
मनुष्य में पसलियों की संख्या है
- 12
- 24 जोड़े
- 12 जोड़े
- 10 जोड़े
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 12 जोड़े. 7 वास्तविक, 3 कूट, 2 मुक्त जोड़े।
पेशी संकुचन में किस पट्टी की लंबाई वही रहती है
- A-पट्टी
- H-क्षेत्र
- I-पट्टी
- सार्कोमियर
उत्तर देखें
उत्तर: (a) A-पट्टी. मायोसिन की लंबाई स्थिर।
मायस्थीनिया ग्रेविस है
- अस्थि विकार
- आनुवंशिक संधि रोग
- विटामिन कमी
- तंत्रिकापेशी संधि को प्रभावित करने वाला स्वप्रतिरक्षी विकार
उत्तर देखें
उत्तर: (d) तंत्रिकापेशी संधि को प्रभावित करने वाला स्वप्रतिरक्षी विकार. स्वप्रतिरक्षी।
मृत्यु के बाद मृत्यु-कठोरता का कारण है
- अधिक ATP
- कैल्सियम की कमी
- ATP की कमी से मायोसिन शीर्ष ऐक्टिन से अलग नहीं हो पाते
- तंत्रिका आवेग
उत्तर देखें
उत्तर: (c) ATP की कमी से मायोसिन शीर्ष ऐक्टिन से अलग नहीं हो पाते. अनुप्रस्थ सेतु बंधे रहते हैं।
सभी अध्याय: कक्षा 11 जीव विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।