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उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन – कक्षा 11 जीव विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 जीव विज्ञान, अध्याय 16। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
जंतु नाइट्रोजनी अपशिष्ट अमोनिया, यूरिया या यूरिक अम्ल के रूप में निकालते हैं। मनुष्य में वृक्क निस्यंदन, पुनरवशोषण और स्रवण से मूत्र बनाते हैं, जो हॉर्मोनों से नियंत्रित है।
उत्सर्जन प्रकार और वृक्क
- अमोनिया-उत्सर्जी (अस्थिल मछलियाँ), यूरिया-उत्सर्जी (स्तनधारी, उभयचर), यूरिक अम्ल-उत्सर्जी (पक्षी, सरीसृप, कीट)।
- वृक्काणु: केशिकागुच्छ + बोमन संपुट (मैल्पीघी काय), PCT, हेनले लूप, DCT, संग्रह नलिका।
- केशिकागुच्छीय निस्यंदन दर (GFR) ≈ 125 mL/min (≈ 180 L/दिन); लगभग 99% पुनरवशोषित।
नियमन और विकार
- प्रतिधारा क्रियाविधि (हेनले लूप और वासा रेक्टा) मूत्र सांद्रित करती है।
- ADH (वैसोप्रेसिन) जल पुनरवशोषण बढ़ाता है; रेनिन–ऐंजियोटेंसिन–ऐल्डोस्टेरोन तंत्र रक्तदाब और Na⁺ पुनरवशोषण बढ़ाता है; ANF रक्तदाब घटाता है।
- विकार: यूरीमिया (रुधिर अपोहन से उपचार), वृक्क पथरी, गुच्छ-वृक्कशोथ; वृक्क विफलता में प्रत्यारोपण।
मुख्य शब्द
- वृक्काणु
- वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई
- परानिस्यंदन
- दाब में केशिकागुच्छ में रक्त का निस्यंदन
- जक्स्टा गुच्छ उपकरण
- वह विशिष्ट क्षेत्र जहाँ DCT अभिवाही धमनिका को छूती है; GFR घटने पर रेनिन छोड़ता है
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
उत्सर्जन में यकृत और फेफड़ों की क्या भूमिका है?2 अंक
यकृत अमोनिया को यूरिया में बदलता है (यूरिया चक्र) और पित्त वर्णक तथा कुछ दवाएँ पित्त से उत्सर्जित करता है। फेफड़े CO₂ (लगभग 200 mL/min) और कुछ जलवाष्प निकालते हैं।
रेनिन–ऐंजियोटेंसिन क्रियाविधि रक्तदाब और GFR को कैसे नियंत्रित करती है?3 अंक
GFR या रक्तदाब घटने पर JG कोशिकाएँ रेनिन छोड़ती हैं, जो ऐंजियोटेंसिनोजन को ऐंजियोटेंसिन I और फिर ऐंजियोटेंसिन II में बदलता है। ऐंजियोटेंसिन II रक्त वाहिकाएँ संकुचित करता (रक्तदाब और GFR बढ़ाता) और अधिवृक्क वल्कुट को ऐल्डोस्टेरोन छोड़ने हेतु प्रेरित करता है, जो DCT में Na⁺ और जल पुनरवशोषण बढ़ाकर रक्त आयतन और दाब बढ़ाता है।
मूत्र निर्माण (निस्यंदन, पुनरवशोषण, स्रवण) और मूत्र सांद्रित करने वाली प्रतिधारा क्रियाविधि समझाइए।5 अंक
केशिकागुच्छीय निस्यंदन: रक्तदाब प्लाज़्मा (प्रोटीन और कोशिकाओं के बिना) को केशिकागुच्छ केशिकाओं से बोमन संपुट में धकेलता है, प्रतिदिन लगभग 180 L। पुनरवशोषण: लगभग 99% निस्यंद पुनरवशोषित — PCT में ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, Na⁺ और बहुत जल; अवरोही भुजा में जल; आरोही भुजा में NaCl; DCT और संग्रह नलिका में ADH के अधीन और जल। स्रवण: आयनिक और अम्ल–क्षार संतुलन हेतु H⁺, K⁺ और अमोनिया निस्यंद में स्रावित। प्रतिधारा: हेनले लूप की दोनों भुजाओं में निस्यंद विपरीत दिशाओं में और वासा रेक्टा में रक्त विपरीत दिशाओं में बहता है। आरोही भुजा से बाहर पंप NaCl और संग्रह नलिका का यूरिया मेडुला में बढ़ती परासरी प्रवणता (लगभग 300 से 1200 mOsm/L) बनाते हैं। निस्यंद संग्रह नलिका में इस प्रवणता से गुज़रते हुए परासरण से जल खोता है, अतः मूत्र निस्यंद से लगभग चार गुना तक सांद्र होता है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- GFR ≈ 125 mL/min।
- PCT अधिकांश निस्यंद पुनरवशोषित करती है।
- ADH जल संरक्षित करता है।
परीक्षा सुझाव
- ADH की कमी से उदकमेह (बड़ी मात्रा में तनु मूत्र)।
- वृक्काणु बनाकर लिखें कहाँ क्या पुनरवशोषित होता है: PCT (ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, 70–80% जल व Na⁺), अवरोही भुजा (जल), आरोही भुजा (NaCl), DCT और संग्रह नलिका (ADH के अधीन जल)।
अभ्यास MCQ
वृक्क की क्रियात्मक इकाई है
- न्यूरॉन
- अंकुर
- कूपिका
- वृक्काणु
उत्तर देखें
उत्तर: (d) वृक्काणु. वृक्काणु।
मनुष्य हैं
- अमोनिया-उत्सर्जी
- यूरिया-उत्सर्जी
- यूरिक अम्ल-उत्सर्जी
- ग्वानिन-उत्सर्जी
उत्तर देखें
उत्तर: (b) यूरिया-उत्सर्जी. यूरिया।
पक्षी मुख्यतः उत्सर्जित करते हैं
- अमोनिया
- यूरिया
- क्रिएटिन
- यूरिक अम्ल
उत्तर देखें
उत्तर: (d) यूरिक अम्ल. यूरिक अम्ल-उत्सर्जी।
वृक्क में जल पुनरवशोषण बढ़ाने वाला हॉर्मोन है
- इंसुलिन
- ग्लूकागॉन
- ADH
- थायरॉक्सिन
उत्तर देखें
उत्तर: (c) ADH. वैसोप्रेसिन।
ग्लूकोज़ मुख्यतः पुनरवशोषित होता है
- केशिकागुच्छ में
- संग्रह नलिका में
- हेनले लूप में
- PCT में
उत्तर देखें
उत्तर: (d) PCT में. समीपस्थ कुंडलित नलिका।
स्वस्थ वयस्क में सामान्य GFR लगभग है
- 12.5 mL/min
- 1250 mL/min
- 125 mL/min
- 1.25 L/min
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 125 mL/min. ~180 L/दिन।
प्रतिधारा क्रियाविधि में शामिल हैं
- PCT और DCT
- हेनले लूप और वासा रेक्टा
- केवल केशिकागुच्छ
- मूत्रवाहिनी और मूत्राशय
उत्तर देखें
उत्तर: (b) हेनले लूप और वासा रेक्टा. मूत्र सांद्रित करती है।
हेनले लूप की अवरोही भुजा
- जल के प्रति अपारगम्य
- जल के प्रति पारगम्य पर लवणों के प्रति लगभग अपारगम्य
- दोनों के प्रति पारगम्य
- दोनों के प्रति अपारगम्य
उत्तर देखें
उत्तर: (b) जल के प्रति पारगम्य पर लवणों के प्रति लगभग अपारगम्य. नीचे जाते निस्यंद सांद्र होता है।
सभी अध्याय: कक्षा 11 जीव विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।