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जीव जगत का वर्गीकरण – कक्षा 11 जीव विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 जीव विज्ञान, अध्याय 2। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
व्हिटेकर की पाँच जगत प्रणाली कोशिका प्रकार, संगठन, पोषण आदि के आधार पर जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु में वर्गीकृत करती है। विषाणु, विषाणुभ और लाइकेन विशेष उदाहरण हैं।
पाँच जगत
- मोनेरा: प्रोकैरियोट (जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया, आद्यजीवाणु); कोशिका भित्ति उपस्थित।
- प्रोटिस्टा: एककोशिक सुकेंद्रकी (डायटम, डायनोफ़्लैजिलेट, यूग्लीना, अवपंक कवक, प्लाज़्मोडियम जैसे प्रोटोज़ोआ)।
- कवक: परपोषी, काइटिन कोशिका भित्ति; फ़ाइकोमाइसिटीज़, ऐस्कोमाइसिटीज़, बेसिडियोमाइसिटीज़, ड्यूटेरोमाइसिटीज़।
अकोशिकीय रूप
- विषाणु: न्यूक्लियोप्रोटीन, अविकल्पी परजीवी; TMV (RNA), जीवाणुभोजी (DNA)।
- विषाणुभ: प्रोटीन आवरण रहित मुक्त RNA (आलू स्पिंडल ट्यूबर रोग); प्रिऑन: संक्रामक प्रोटीन (मैड काउ रोग)।
- लाइकेन: शैवाल (फ़ाइकोबायंट) और कवक (माइकोबायंट) का सहजीवन; स्वच्छ वायु के सूचक।
मुख्य शब्द
- पाँच जगत वर्गीकरण
- व्हिटेकर की प्रणाली (1969): मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप, जंतु
- विषाणुभ
- प्रोटीन आवरण रहित संक्रामक मुक्त RNA
- मृतजीवी
- मृत और सड़ते कार्बनिक पदार्थ पर पोषण करने वाला जीव, जैसे अनेक कवक
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
डायटम को महासागरों के "मुख्य उत्पादक" क्यों कहते हैं?2 अंक
ये सूक्ष्म, प्रकाश संश्लेषी और महासागरों में अत्यधिक संख्या में होते हैं, अतः समुद्री खाद्य शृंखलाओं का बड़ा भाग भोजन (और ऑक्सीजन) बनाते हैं।
पाँच जगत वर्गीकरण हेतु व्हिटेकर द्वारा प्रयुक्त मापदंड लिखिए।3 अंक
कोशिका संरचना (प्रोकैरियोटिक या सुकेंद्रकी), शरीर संगठन (एककोशिक या बहुकोशिक), पोषण विधि (स्वपोषी या परपोषी), जनन और जातिवृत्तीय संबंध।
विषाणु और जीवाणुभोजी की संरचना का वर्णन कीजिए, विषाणुओं से होने वाले तीन रोग लिखिए, और समझाइए कि विषाणु "सजीव–निर्जीव" क्यों कहलाते हैं।5 अंक
विषाणु में न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA, दोनों कभी नहीं) कैप्सोमियरों से बने प्रोटीन आवरण (कैप्सिड) में बंद होता है; पादप विषाणुओं में प्रायः एकरज्जुकी RNA, और जीवाणुभोजी में प्रायः शीर्ष और पूँछ सहित द्विरज्जुकी DNA। रोग: सामान्य ज़ुकाम, AIDS, कंठमाला, पोलियो, चेचक, हर्पीज़, इन्फ़्लुएंज़ा (पौधों में तंबाकू मोज़ेक भी)। परपोषी कोशिका के बाहर विषाणु निष्क्रिय होते हैं और रसायनों की तरह क्रिस्टलित हो सकते हैं (निर्जीव)। परपोषी के अंदर ये उसकी मशीनरी से अपनी प्रतियाँ बनाते और उत्परिवर्तित हो सकते हैं (सजीव), अतः सीमा पर हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- कवक कोशिका भित्ति = काइटिन।
- लाइकेन स्वच्छ वायु के सूचक।
- विषाणु पाँच जगतों में नहीं रखे गए।
परीक्षा सुझाव
- आद्यजीवाणु चरम आवासों में रहते हैं (लवणरागी, ताप-अम्लरागी, मेथैनोजन)।
- कवकों के प्रत्येक वर्ग का एक उदाहरण याद रखें: फ़ाइकोमाइसिटीज़ – राइज़ोपस, ऐल्ब्यूगो; ऐस्कोमाइसिटीज़ – यीस्ट, पेनिसिलियम; बेसिडियोमाइसिटीज़ – ऐगेरिकस, किट्ट व कंड; ड्यूटेरोमाइसिटीज़ – ऑल्टरनेरिया, ट्राइकोडर्मा।
अभ्यास MCQ
पाँच जगत वर्गीकरण प्रस्तावित किया
- व्हिटेकर ने
- लिनियस ने
- डार्विन ने
- हेकेल ने
उत्तर देखें
उत्तर: (a) व्हिटेकर ने. आर.एच. व्हिटेकर, 1969।
जीवाणु किस जगत में हैं
- मोनेरा
- प्रोटिस्टा
- कवक
- पादप
उत्तर देखें
उत्तर: (a) मोनेरा. प्रोकैरियोट।
कवक की कोशिका भित्ति बनी होती है
- सेल्यूलोज़ से
- काइटिन से
- पेप्टिडोग्लाइकन से
- पेक्टिन से
उत्तर देखें
उत्तर: (b) काइटिन से. काइटिन।
लाइकेन किसका सहवास है
- जीवाणु और कवक
- शैवाल और कवक
- शैवाल और जीवाणु
- विषाणु और कवक
उत्तर देखें
उत्तर: (b) शैवाल और कवक. सहोपकारिता।
समुद्र में लाल ज्वार होते हैं
- डायनोफ़्लैजिलेट (जैसे गोनियाउलैक्स) से
- डायटम से
- सायनोबैक्टीरिया से
- यूग्लीनॉइड से
उत्तर देखें
उत्तर: (a) डायनोफ़्लैजिलेट (जैसे गोनियाउलैक्स) से. विषैले प्रस्फुटन।
विषाणुभ विषाणुओं से भिन्न हैं क्योंकि इनमें नहीं होता
- RNA
- न्यूक्लिक अम्ल
- DNA
- प्रोटीन आवरण
उत्तर देखें
उत्तर: (d) प्रोटीन आवरण. मुक्त RNA।
मेथैनोजन संबंधित हैं
- यूबैक्टीरिया से
- कवकों से
- सायनोबैक्टीरिया से
- आद्यजीवाणुओं से
उत्तर देखें
उत्तर: (d) आद्यजीवाणुओं से. मीथेन बनाते हैं।
यूग्लीना को संयोजी कड़ी कहते हैं क्योंकि यह
- प्रकाश में प्रकाश संश्लेषी पर अंधकार में परपोषी है
- एक कवक है
- काइटिन भित्ति रखता है
- केवल मिट्टी में रहता है
उत्तर देखें
उत्तर: (a) प्रकाश में प्रकाश संश्लेषी पर अंधकार में परपोषी है. पादप और जंतु दोनों जैसे लक्षण।
सभी अध्याय: कक्षा 11 जीव विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।