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वनस्पति जगत – कक्षा 11 जीव विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ

NCERT कक्षा 11 जीव विज्ञान, अध्याय 3। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।

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अध्याय का सार

पादप जगत में शैवाल, ब्रायोफ़ाइट, टेरिडोफ़ाइट, अनावृतबीजी और आवृतबीजी आते हैं, जो शरीर संगठन, संवहन ऊतक और जनन में भिन्न हैं।

समूह

  • शैवाल: हरे (क्लोरोफ़ाइसी), भूरे (फ़ियोफ़ाइसी), लाल (रोडोफ़ाइसी); जेलीडियम, ग्रैसिलेरिया से ऐगार।
  • ब्रायोफ़ाइट ("पादप जगत के उभयचर"): युग्मकोद्भिद प्रभावी, संवहन ऊतक नहीं (रिक्सिया, मार्केंशिया, फ़्यूनेरिया)।
  • टेरिडोफ़ाइट: पहले संवहनी पौधे, बीजाणुद्भिद प्रभावी (फ़र्न, सिलैजिनेला, इक्वीसीटम)।

बीजी पौधे और जीवन चक्र

  • अनावृतबीजी: नग्न बीज (साइकस, पाइनस); आवृतबीजी: फल में बीज, द्विनिषेचन।
  • सिलैजिनेला और साल्विनिया में विषमबीजाणुता बीज स्वभाव की ओर कदम है।
  • जीवन चक्र: अगुणितक (अधिकांश शैवाल), द्विगुणितक (बीजी पौधे), अगुणित-द्विगुणितक (ब्रायोफ़ाइट, टेरिडोफ़ाइट)।

मुख्य शब्द

ब्रायोफ़ाइट
निषेचन हेतु जल पर निर्भर असंवहनी स्थलीय पौधे
विषमबीजाणुता
दो प्रकार के बीजाणु (लघु और गुरु) बनना
पीढ़ी एकांतरण
जीवन चक्र जिसमें अगुणित युग्मकोद्भिद और द्विगुणित बीजाणुद्भिद पीढ़ियाँ बारी-बारी से आती हैं

उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न

ब्रायोफ़ाइट को पादप जगत के उभयचर क्यों कहते हैं?2 अंक

ये स्थल पर रहते हैं पर लैंगिक जनन हेतु जल चाहिए, क्योंकि नर युग्मक (पुंमणु) तैरकर अंड तक जाते हैं।

शैवालों के तीन आर्थिक उपयोग लिखिए।3 अंक

भोजन (पॉरफ़ाइरा, लैमिनेरिया, सरगासम; प्रोटीन पूरक के रूप में क्लोरेला और स्पाइरुलिना), संवर्धन माध्यम और जेली हेतु जेलीडियम व ग्रैसिलेरिया से ऐगार, भूरे व लाल शैवालों से ऐल्जिन और कैरागीन; ये कार्बन स्थिर करते और विश्व की आधी ऑक्सीजन देते हैं।

ब्रायोफ़ाइट, टेरिडोफ़ाइट, अनावृतबीजी और आवृतबीजी की चार-चार लक्षणों पर तुलना कीजिए।5 अंक

ब्रायोफ़ाइट: युग्मकोद्भिद प्रभावी; वास्तविक जड़ें या संवहन ऊतक नहीं; निषेचन हेतु जल; बीज नहीं (फ़्यूनेरिया, मार्केंशिया)। टेरिडोफ़ाइट: बीजाणुद्भिद प्रभावी, वास्तविक जड़, तना, पत्ती और संवहन ऊतक; निषेचन हेतु जल; बीज नहीं; कुछ विषमबीजाणुक (फ़र्न, सिलैजिनेला)। अनावृतबीजी: बीजाणुद्भिद प्रभावी; संवहन ऊतक (अधिकांश में वाहिकाओं रहित ज़ाइलम); पराग नलिका से निषेचन, जल नहीं चाहिए; नग्न बीज, फल नहीं (पाइनस, साइकस)। आवृतबीजी: बीजाणुद्भिद प्रभावी; वाहिकाओं वाला ज़ाइलम और सहचर कोशिकाओं वाला फ़्लोएम; द्विनिषेचन; फल में बंद बीज (आम, गेहूँ)।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • ब्रायोफ़ाइट = पादप जगत के उभयचर।
  • टेरिडोफ़ाइट पहले संवहनी पौधे।
  • अनावृतबीजी के बीज नग्न।

परीक्षा सुझाव

  • ब्रायोफ़ाइट में युग्मकोद्भिद मुख्य पौधा; टेरिडोफ़ाइट में बीजाणुद्भिद।
  • हर पादप समूह हेतु याद रखें: प्रभावी पीढ़ी, संवहन ऊतक, निषेचन में जल की आवश्यकता, और बीज स्वभाव।

अभ्यास MCQ

  1. पादप जगत के उभयचर हैं

    1. शैवाल
    2. अनावृतबीजी
    3. टेरिडोफ़ाइट
    4. ब्रायोफ़ाइट
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) ब्रायोफ़ाइट. निषेचन हेतु जल चाहिए।

  2. ऐगार प्राप्त होता है

    1. भूरे शैवाल से
    2. लाल शैवाल (जेलीडियम) से
    3. हरे शैवाल से
    4. कवक से
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) लाल शैवाल (जेलीडियम) से. लाल शैवाल।

  3. संवहन ऊतक वाले पहले स्थलीय पौधे हैं

    1. ब्रायोफ़ाइट
    2. अनावृतबीजी
    3. टेरिडोफ़ाइट
    4. शैवाल
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) टेरिडोफ़ाइट. ज़ाइलम और फ़्लोएम।

  4. अनावृतबीजी में होते हैं

    1. फल में बीज
    2. बीज नहीं
    3. नग्न बीज
    4. केवल बीजाणु
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) नग्न बीज. अंडाशय भित्ति नहीं।

  5. फ़र्न के जीवन चक्र की प्रभावी प्रावस्था है

    1. युग्मकोद्भिद
    2. प्रोथैलस
    3. प्रोटोनीमा
    4. बीजाणुद्भिद
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) बीजाणुद्भिद. फ़र्न का पौधा स्वयं।

  6. विषमबीजाणुता दिखती है

    1. सिलैजिनेला में
    2. फ़्यूनेरिया में
    3. रिक्सिया में
    4. स्पाइरोगाइरा में
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) सिलैजिनेला में. लघु और गुरु बीजाणु।

  7. बीजी पौधों का जीवन चक्र है

    1. अगुणितक
    2. अगुणित-द्विगुणितक
    3. द्विगुणितक
    4. कोई नहीं
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) द्विगुणितक. बीजाणुद्भिद प्रभावी।

  8. अनावृतबीजी में भ्रूणपोष होता है

    1. त्रिगुणित
    2. अगुणित
    3. द्विगुणित
    4. चतुर्गुणित
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) अगुणित. निषेचन से पहले मादा युग्मकोद्भिद से बनता है।

सभी अध्याय: कक्षा 11 जीव विज्ञान

यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।