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मुद्रा और साख – कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान, अध्याय 20। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
मुद्रा विनिमय का माध्यम है और आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत समाप्त करती है। आधुनिक मुद्रा में करेंसी और बैंक जमा शामिल हैं। बैंक और अन्य ऋणदाता साख देते हैं, और साख की शर्तें तय करती हैं कि ऋण कर्ज़दार की मदद करेगा या उसे फँसाएगा। औपचारिक साख ग़रीबों तक पहुँचनी चाहिए।
विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा
- वस्तु-विनिमय प्रणाली में दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए (आवश्यकताओं का दोहरा संयोग); मुद्रा यह समस्या दूर करती है।
- मुद्रा के आधुनिक रूप हैं करेंसी (भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी कागज़ के नोट और सिक्के) और बैंकों में जमा।
- माँग जमा माँगने पर निकाली जा सकती है और चेक से भुगतान में प्रयुक्त होती है; इसे भुगतान के साधन के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।
बैंकों की ऋण गतिविधियाँ
- बैंक जमा का केवल छोटा भाग नकद रखते हैं (भारत में लगभग 15 प्रतिशत) और अधिकांश जमा से ऋण देते हैं।
- बैंक जमा पर जितना ब्याज देते हैं, ऋण पर उससे अधिक ब्याज लेते हैं; यह अंतर उनकी आय का मुख्य स्रोत है।
- साख की शर्तों में ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान का तरीक़ा शामिल हैं।
औपचारिक और अनौपचारिक साख
- औपचारिक स्रोत: बैंक और सहकारी समितियाँ, जिनकी निगरानी भारतीय रिज़र्व बैंक करता है।
- अनौपचारिक स्रोत: साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और मित्र; इनकी निगरानी कोई संस्था नहीं करती और ब्याज दरें प्रायः बहुत ऊँची होती हैं।
- महँगे अनौपचारिक ऋण कर्ज़-जाल में फँसा सकते हैं; औपचारिक साख सस्ती है पर ग़रीबों के पास प्रायः समर्थक ऋणाधार नहीं होता।
- 15–20 सदस्यों (अधिकतर महिलाएँ) वाले स्वयं सहायता समूह नियमित बचत कर छोटे ऋण लेते हैं; मोहम्मद यूनुस द्वारा शुरू बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक इसका सफल उदाहरण है।
मुख्य शब्द
- आवश्यकताओं का दोहरा संयोग
- ऐसी स्थिति जिसमें दोनों पक्ष वही ख़रीदना चाहें जो दूसरा बेचना चाहता है
- समर्थक ऋणाधार
- कर्ज़दार की ऐसी संपत्ति जिसे वह ऋण चुकाने तक ऋणदाता के पास गारंटी के रूप में रखता है
- माँग जमा
- माँगने पर निकाली जा सकने वाली बैंक जमा
- कर्ज़-जाल
- ऐसी स्थिति जिसमें कर्ज़दार ऋण नहीं चुका पाता और और अधिक उधार लेकर कर्ज़ में गहरे फँसता जाता है
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
कर्ज़-जाल क्या है?2 अंक
कर्ज़-जाल ऐसी स्थिति है जिसमें फ़सल या व्यापार की विफलता के कारण कर्ज़दार ऋण नहीं चुका पाता और उसे चुकाने हेतु अपनी संपत्ति का कुछ भाग बेचना या नया ऋण लेना पड़ता है। कर्ज़दार कर्ज़ में और गहरे फँसता जाता है, और साख उसकी स्थिति पहले से बदतर कर देती है।
साख की शर्तें क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।3 अंक
साख की शर्तें वे शर्तें हैं जिन पर ऋण दिया जाता है: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान का तरीक़ा। उदाहरण के लिए, बैंक से ऋण लेने वाले किसान को प्रति वर्ष 10 प्रतिशत ब्याज देना, ज़मीन के कागज़ समर्थक ऋणाधार के रूप में गिरवी रखना, पहचान और भूमि अभिलेख जमा करना, और फ़सल के बाद किस्तों में चुकाना पड़ सकता है। शर्तें ऋणदाता के अनुसार बदलती हैं और कर्ज़दार व ऋणदाता की प्रकृति पर निर्भर करती हैं।
भारत में औपचारिक साख का विस्तार क्यों होना चाहिए? स्वयं सहायता समूहों की भूमिका समझाइए।5 अंक
साहूकार जैसे अनौपचारिक ऋणदाता बहुत ऊँची ब्याज दर लेते हैं और उनकी निगरानी करने वाली कोई संस्था नहीं है; वे ऋण वसूली में अनुचित साधन अपना सकते हैं। कर्ज़दारों की कमाई का बड़ा भाग ऋण चुकाने में चला जाता है, उनके पास कम बचता है, और कई कर्ज़-जाल में फँस जाते हैं। सस्ती और सामर्थ्य के अनुकूल साख विकास के लिए निर्णायक है, क्योंकि इससे लोग फ़सल उगा सकते हैं, व्यापार चला सकते हैं, लघु उद्योग लगा सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं। बैंक और सहकारी समितियाँ जैसे औपचारिक स्रोत कम ब्याज लेते हैं और भारतीय रिज़र्व बैंक की निगरानी में हैं, इसलिए इन्हें अधिक लोगों, विशेषकर ग्रामीण ग़रीबों तक पहुँचना चाहिए। स्वयं सहायता समूह इसमें मदद करते हैं: एक इलाक़े की प्रायः 15–20 महिलाएँ अपनी बचत इकट्ठा कर सदस्यों को उचित ब्याज पर छोटे ऋण देती हैं। एक-दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह अपने नाम पर बिना समर्थक ऋणाधार के बैंक ऋण का पात्र हो जाता है। स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हैं, उन्हें सामाजिक मुद्दों पर चर्चा का मंच देते हैं और साहूकारों पर निर्भरता घटाते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत समाप्त करती है।
- RBI करेंसी जारी करता है और बैंकों की निगरानी करता है।
- बैंक जमा का लगभग 15 प्रतिशत नकद रखते हैं।
- स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण बैंक ग़रीबों को साख देते हैं।
परीक्षा सुझाव
- साख के प्रश्नों में हमेशा समर्थक ऋणाधार और ब्याज दर की भूमिका समझाएँ।
- औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों की तुलना तालिका में करें: निगरानी, ब्याज दर, ऋणाधार।
अभ्यास MCQ
भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है
- भारतीय रिज़र्व बैंक
- भारतीय स्टेट बैंक
- केवल वित्त मंत्रालय
- सर्वोच्च न्यायालय
उत्तर देखें
उत्तर: (a) भारतीय रिज़र्व बैंक. RBI सरकार की ओर से करेंसी जारी करता है।
ऋण पाने हेतु कर्ज़दार द्वारा गिरवी रखी गई संपत्ति कहलाती है
- समर्थक ऋणाधार
- ब्याज
- जमा
- चेक
उत्तर देखें
उत्तर: (a) समर्थक ऋणाधार. ऋण न चुकाने पर ऋणदाता इसे बेच सकता है।
वस्तु-विनिमय के लिए आवश्यक है
- चेक
- आवश्यकताओं का दोहरा संयोग
- बैंक खाता
- करेंसी
उत्तर देखें
उत्तर: (b) आवश्यकताओं का दोहरा संयोग. दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए।
इनमें से साख का औपचारिक स्रोत कौन-सा है
- सहकारी समिति
- साहूकार
- रिश्तेदार
- व्यापारी
उत्तर देखें
उत्तर: (a) सहकारी समिति. सहकारी समितियों की निगरानी सरकार करती है।
बैंकों की आय का मुख्य स्रोत है
- ऋण और जमा पर ब्याज का अंतर
- चेक पर शुल्क
- मुद्रा छापना
- ज़मीन बेचना
उत्तर देखें
उत्तर: (a) ऋण और जमा पर ब्याज का अंतर. बैंक जमा पर जितना देते हैं, ऋण पर उससे अधिक लेते हैं।
स्वयं सहायता समूह में प्रायः होते हैं
- 2–3 सदस्य
- 15–20 सदस्य
- 100 सदस्य
- 500 सदस्य
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 15–20 सदस्य. सदस्य नियमित बचत कर एक-दूसरे को ऋण देते हैं।
अनौपचारिक साख प्रायः ग़रीब कर्ज़दारों के लिए हानिकारक क्यों है
- इसकी निगरानी RBI करता है
- इसे चुकाना नहीं पड़ता
- ब्याज दर ऊँची है और निगरानी नहीं, जिससे कर्ज़-जाल हो सकता है
- यह हमेशा ब्याज-मुक्त है
उत्तर देखें
उत्तर: (c) ब्याज दर ऊँची है और निगरानी नहीं, जिससे कर्ज़-जाल हो सकता है. ऊँचे भुगतान कर्ज़दार की स्थिति और बिगाड़ सकते हैं।
बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक किसने शुरू किया
- मोहम्मद यूनुस
- अमर्त्य सेन
- रघुराम राजन
- इला भट्ट
उत्तर देखें
उत्तर: (a) मोहम्मद यूनुस. उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।