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वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था – कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान, अध्याय 21। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
वैश्वीकरण व्यापार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश, प्रौद्योगिकी और लोगों के आवागमन से देशों के तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया है। 1991 से भारत में व्यापार और निवेश के उदारीकरण तथा WTO के नियमों ने इसे तेज़ किया। वैश्वीकरण से कुछ समूहों को लाभ हुआ है जबकि दूसरों को अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और बाज़ारों का एकीकरण
- बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) एक से अधिक देशों में उत्पादन पर स्वामित्व या नियंत्रण रखती है और बाज़ार के निकट, सस्ते कुशल श्रम और अनुकूल नीतियों वाले स्थान चुनती है।
- MNC कारख़ाने लगाकर, स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन से, स्थानीय कंपनियाँ ख़रीदकर (कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स ख़रीदी) और छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर निवेश करती हैं।
- विदेश व्यापार बाज़ारों को जोड़ता है: ख़रीदारों को अधिक विकल्प मिलते हैं और उत्पादक अपने देश से बाहर के बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक
- प्रौद्योगिकी: परिवहन, दूरसंचार, कंप्यूटर और इंटरनेट में तीव्र सुधार।
- उदारीकरण: 1991 से भारत ने विदेश व्यापार और निवेश पर से अनेक अवरोध हटाए।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) अंतरराष्ट्रीय व्यापार के उदारीकरण का लक्ष्य रखता है, पर विकसित देशों ने प्रायः अनुचित अवरोध बनाए रखे, जैसे अपने किसानों को सब्सिडी।
प्रभाव और न्यायसंगत वैश्वीकरण
- उपभोक्ताओं, विशेषकर संपन्न वर्ग को कम क़ीमत पर अधिक विकल्प और बेहतर गुणवत्ता मिली; टाटा मोटर्स, इन्फ़ोसिस और एशियन पेंट्स जैसी कुछ भारतीय कंपनियाँ स्वयं MNC बनीं।
- विदेशी निवेश आकर्षित करने हेतु विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए गए।
- छोटे उत्पादकों और श्रमिकों को प्रतिस्पर्धा और रोज़गार असुरक्षा का सामना करना पड़ा; श्रम क़ानूनों में लचीलेपन से अस्थायी नौकरियाँ बढ़ीं।
- न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए ऐसी सरकारी नीतियाँ चाहिए जो छोटे उत्पादकों और श्रमिकों सहित सबके हितों की रक्षा करें।
मुख्य शब्द
- बहुराष्ट्रीय कंपनी
- एक से अधिक देशों में उत्पादन पर स्वामित्व या नियंत्रण रखने वाली कंपनी
- उदारीकरण
- व्यापार और निवेश पर सरकार द्वारा लगाए गए अवरोध या प्रतिबंध हटाना
- व्यापार अवरोधक
- विदेश व्यापार पर प्रतिबंध, जैसे आयात पर कर
- विशेष आर्थिक क्षेत्र
- निवेश आकर्षित करने हेतु विश्व-स्तरीय सुविधाओं और कर लाभ वाला औद्योगिक क्षेत्र
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
उदारीकरण क्या है?2 अंक
उदारीकरण का अर्थ है विदेश व्यापार और निवेश पर सरकार द्वारा लगाए गए अवरोध या प्रतिबंध हटाना, ताकि वस्तुओं का आयात-निर्यात आसानी से हो सके और विदेशी कंपनियाँ कारख़ाने और कार्यालय लगा सकें। भारत ने 1991 में उदारीकरण शुरू किया।
विदेश व्यापार ने विभिन्न देशों के बाज़ारों का एकीकरण कैसे किया है?3 अंक
विदेश व्यापार उत्पादकों को घरेलू बाज़ार से आगे पहुँचकर दूसरे देशों में बेचने का अवसर देता है। यह ख़रीदारों को दूसरे देशों में बनी वस्तुओं में से चुनने देता है, जिससे उनके विकल्प बढ़ते हैं। परिणामस्वरूप वस्तुएँ एक बाज़ार से दूसरे में जाती हैं, विभिन्न बाज़ारों में समान वस्तुओं की क़ीमतें बराबर होने लगती हैं, और विभिन्न देशों के उत्पादक एक-दूसरे से निकट प्रतिस्पर्धा करते हैं, इस तरह बाज़ार एकीकृत होते हैं।
भारत पर वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा है? न्यायसंगत वैश्वीकरण क्या है?5 अंक
वैश्वीकरण ने उपभोक्ताओं, विशेषकर शहरी क्षेत्रों के संपन्न वर्ग को कम क़ीमत पर अधिक विकल्प और बेहतर गुणवत्ता की वस्तुएँ दी हैं। MNC ने सेल फ़ोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य उत्पादों जैसे उद्योगों में भारत में निवेश बढ़ाया, जिससे नई नौकरियाँ बनीं, और उन्हें कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं। टाटा मोटर्स, इन्फ़ोसिस, रैनबैक्सी, एशियन पेंट्स और सुंदरम फ़ास्टनर्स जैसी कई शीर्ष भारतीय कंपनियाँ स्वयं MNC बन गईं, और IT सेवा कंपनियाँ बढ़ीं। परंतु बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने और टायर बनाने वाले छोटे उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धा की भारी मार पड़ी, कई इकाइयाँ बंद हुईं और नौकरियाँ गईं। नियोक्ता अब लचीले, अस्थायी रोज़गार को पसंद करते हैं, इसलिए कई श्रमिकों को रोज़गार सुरक्षा नहीं है। न्यायसंगत वैश्वीकरण का अर्थ है सबके लिए अवसर बनाना और यह सुनिश्चित करना कि इसके लाभ बेहतर ढंग से बँटें: सरकार श्रम क़ानूनों से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करे, छोटे उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी होने तक सहायता दे, आवश्यकता पड़ने पर व्यापार और निवेश अवरोधों का प्रयोग करे, और WTO में न्यायसंगत नियमों के लिए मोलभाव करे।
त्वरित पुनरावृत्ति
- MNC देशों के बीच उत्पादन जोड़ती हैं।
- प्रौद्योगिकी + उदारीकरण + WTO = तेज़ वैश्वीकरण।
- भारत ने 1991 से व्यापार और निवेश का उदारीकरण किया।
- न्यायसंगत वैश्वीकरण छोटे उत्पादकों और श्रमिकों की रक्षा करता है।
परीक्षा सुझाव
- MNC निवेश वाले उत्तरों में 'चेन्नई में फ़ोर्ड मोटर्स' और 'कारगिल–परख' उदाहरण दें।
- वैश्वीकरण के प्रभाव पर संतुलित उत्तर लिखें: किसे लाभ हुआ और किसे हानि।
अभ्यास MCQ
एक से अधिक देशों में उत्पादन नियंत्रित करने वाली कंपनी है
- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई
- स्वयं सहायता समूह
- सहकारी समिति
- बहुराष्ट्रीय कंपनी
उत्तर देखें
उत्तर: (d) बहुराष्ट्रीय कंपनी. इसे MNC कहते हैं।
भारत ने विदेश व्यापार और निवेश पर से अवरोध कब से हटाने शुरू किए
- 1947
- 1969
- 1991
- 2005
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 1991. ये 1991 के आर्थिक सुधार थे।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के उदारीकरण का लक्ष्य रखने वाला संगठन है
- WTO
- IMF
- UNDP
- RBI
उत्तर देखें
उत्तर: (a) WTO. विश्व व्यापार संगठन व्यापार नियम बनाता है।
कारगिल फ़ूड्स द्वारा परख फ़ूड्स ख़रीदना MNC के किस तरीक़े का उदाहरण है
- स्थानीय कंपनी ख़रीदना
- नया कारख़ाना लगाना
- छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देना
- कच्चा माल निर्यात करना
उत्तर देखें
उत्तर: (a) स्थानीय कंपनी ख़रीदना. स्थानीय कंपनियाँ ख़रीदकर उत्पादन बढ़ाया जाता है।
आयात पर कर उदाहरण है
- व्यापार अवरोधक का
- उदारीकरण का
- निवेश का
- वैश्वीकरण का
उत्तर देखें
उत्तर: (a) व्यापार अवरोधक का. यह विदेशी वस्तुओं को सीमित करता है।
किस कारक ने वैश्वीकरण को सबसे अधिक प्रेरित किया
- ऊँचे आयात शुल्क
- प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार
- बंद बाज़ार
- वस्तु-विनिमय
उत्तर देखें
उत्तर: (b) प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार. परिवहन और संचार प्रौद्योगिकी ने इसे आसान बनाया।
कौन-सा कथन दिखाता है कि WTO के नियम विकासशील देशों के लिए अनुचित रहे हैं
- WTO किसानों को ऋण देता है
- सभी देशों में मुक्त व्यापार है
- WTO ने MNC पर रोक लगाई
- विकासशील देशों को व्यापार अवरोध हटाने पड़ते हैं जबकि विकसित देश अपने किसानों को सब्सिडी देते रहते हैं
उत्तर देखें
उत्तर: (d) विकासशील देशों को व्यापार अवरोध हटाने पड़ते हैं जबकि विकसित देश अपने किसानों को सब्सिडी देते रहते हैं. इससे विकासशील देशों के किसान नुक़सान में रहते हैं।
इनमें से किसे वैश्वीकरण से सबसे कम लाभ हुआ
- संपन्न शहरी उपभोक्ता
- आयात से प्रतिस्पर्धा झेलने वाले छोटे उत्पादक
- शीर्ष भारतीय कंपनियाँ
- बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
उत्तर देखें
उत्तर: (b) आयात से प्रतिस्पर्धा झेलने वाले छोटे उत्पादक. बैटरी और खिलौना बनाने वाली कई छोटी इकाइयाँ बंद हो गईं।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।