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भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक – कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान, अध्याय 19। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
आर्थिक गतिविधियों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में, तथा संगठित और असंगठित, और सार्वजनिक और निजी क्षेत्रकों में बाँटा जाता है। समय के साथ तृतीयक क्षेत्रक भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक बन गया है, पर अधिकांश श्रमिक अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में हैं, जहाँ प्रच्छन्न बेरोज़गारी है।
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक
- प्राथमिक क्षेत्रक: प्राकृतिक संसाधनों का सीधा उपयोग करने वाली गतिविधियाँ, जैसे कृषि, डेयरी, मछली पकड़ना और वानिकी।
- द्वितीयक क्षेत्रक: विनिर्माण द्वारा प्राकृतिक उत्पादों को दूसरे रूपों में बदलना, जैसे कपास से कपड़ा बनाना।
- तृतीयक (सेवा) क्षेत्रक: अन्य दो क्षेत्रकों की सहायक गतिविधियाँ, जैसे परिवहन, बैंकिंग, व्यापार, संचार और IT सेवाएँ।
- सकल घरेलू उत्पाद एक वर्ष में देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है; केवल अंतिम वस्तुएँ गिनने से दोहरी गणना से बचाव होता है।
भारत के क्षेत्रकों में बदलाव
- तृतीयक क्षेत्रक प्राथमिक क्षेत्रक की जगह भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक बन गया।
- आधे से अधिक श्रमिक अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते हैं, जो GDP का लगभग एक-चौथाई ही उत्पन्न करता है।
- प्रच्छन्न बेरोज़गारी: आवश्यकता से अधिक लोग काम में लगे हैं, इसलिए कुछ को हटाने पर भी उत्पादन नहीं घटता।
- मनरेगा (2005) ग्रामीण परिवारों को एक वर्ष में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी देता है; काम न मिलने पर बेरोज़गारी भत्ता मिलता है।
संगठित और असंगठित, सार्वजनिक और निजी
- संगठित क्षेत्रक: पंजीकृत उद्यम, जहाँ नियमित नौकरी, तय काम के घंटे, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि और रोज़गार सुरक्षा है।
- असंगठित क्षेत्रक: छोटी, बिखरी इकाइयाँ, कम वेतन, रोज़गार सुरक्षा और लाभों का अभाव; श्रमिकों को संरक्षण चाहिए।
- सार्वजनिक क्षेत्रक: अधिकांश परिसंपत्तियाँ सरकार की और सेवाएँ सरकार देती है (रेलवे, डाक); निजी क्षेत्रक: परिसंपत्तियाँ व्यक्तियों या कंपनियों की, लाभ के लिए संचालित।
मुख्य शब्द
- सकल घरेलू उत्पाद
- एक वर्ष में देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य
- प्रच्छन्न बेरोज़गारी
- ऐसी स्थिति जिसमें आवश्यकता से अधिक लोग काम में लगे हों और उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य हो
- मध्यवर्ती वस्तुएँ
- अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में उपयोग हो जाने वाली वस्तुएँ
- संगठित क्षेत्रक
- सरकार के पास पंजीकृत उद्यम, जहाँ रोज़गार की शर्तें नियमित हों
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रच्छन्न बेरोज़गारी क्या है?2 अंक
प्रच्छन्न बेरोज़गारी ऐसी स्थिति है जिसमें किसी काम में वास्तव में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं। सभी काम करते दिखते हैं, पर अतिरिक्त श्रमिकों की उत्पादकता शून्य होती है, इसलिए उनमें से कुछ को हटाने पर भी कुल उत्पादन नहीं घटता। यह कृषि में आम है।
भारत में तृतीयक क्षेत्रक इतना महत्वपूर्ण क्यों होता जा रहा है?3 अंक
अस्पताल, विद्यालय, डाकघर, पुलिस, न्यायालय, बैंक और परिवहन जैसी मूलभूत सेवाएँ सबको चाहिए और अर्थव्यवस्था बढ़ने के साथ उपलब्ध कराई जाती हैं। कृषि और उद्योग के विकास से परिवहन, व्यापार और भंडारण जैसी सेवाओं की माँग बढ़ती है। आय बढ़ने पर लोग बाहर भोजन, पर्यटन, निजी विद्यालय और अस्पताल जैसी अधिक सेवाएँ चाहते हैं, और सूचना व संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित नई सेवाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं।
संगठित और असंगठित क्षेत्रक में अंतर बताइए। असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण कैसे किया जा सकता है?5 अंक
संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम या कार्यस्थल आते हैं जहाँ रोज़गार की शर्तें नियमित होती हैं और लोगों को सुनिश्चित काम मिलता है; ये सरकार के पास पंजीकृत होते हैं और कारख़ाना अधिनियम व न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम जैसे नियमों का पालन करते हैं। श्रमिकों को रोज़गार सुरक्षा, तय काम के घंटे, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि, चिकित्सा लाभ और पेंशन मिलती है। असंगठित क्षेत्रक छोटी और बिखरी इकाइयों से बना है जो अधिकतर सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं; नियम हैं पर उनका पालन नहीं होता, नौकरियाँ कम वेतन वाली और अनियमित हैं, और सवेतन अवकाश या रोज़गार सुरक्षा नहीं है। सरकार न्यूनतम मज़दूरी और काम के घंटों पर क़ानूनों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, लघु उद्योगों और स्वरोज़गार वालों को आसान व सस्ते ऋण, किसानों को सिंचाई, बीज और उचित मूल्य की सहायता, और श्रमिकों को संघों व सहकारी समितियों में संगठित होने में मदद देकर संरक्षण दे सकती है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- प्राथमिक = प्रकृति; द्वितीयक = विनिर्माण; तृतीयक = सेवाएँ।
- तृतीयक सबसे बड़ा उत्पादक; प्राथमिक सबसे बड़ा रोज़गारदाता।
- मनरेगा 2005 = 100 दिन का काम।
- संगठित = लाभों वाली नियमित नौकरी; असंगठित = सुरक्षा नहीं।
परीक्षा सुझाव
- तीनों क्षेत्रकों का संबंध समझाने हेतु 'कपास से कपड़ा' उदाहरण का प्रयोग करें।
- प्रच्छन्न बेरोज़गारी के लिए उस खेत का उदाहरण दें जिस पर तीन की ज़रूरत है पर परिवार के पाँच सदस्य काम करते हैं।
अभ्यास MCQ
मछली पकड़ना किस क्षेत्रक में आता है
- तृतीयक
- द्वितीयक
- प्राथमिक
- केवल संगठित
उत्तर देखें
उत्तर: (c) प्राथमिक. इसमें प्राकृतिक संसाधनों का सीधा उपयोग होता है।
गन्ने से चीनी बनाना किस क्षेत्रक की गतिविधि है
- प्राथमिक
- द्वितीयक
- तृतीयक
- सार्वजनिक
उत्तर देखें
उत्तर: (b) द्वितीयक. प्राकृतिक उत्पादों को नए रूप में बदला जाता है।
बैंकिंग है
- तृतीयक गतिविधि
- द्वितीयक गतिविधि
- प्राथमिक गतिविधि
- हमेशा असंगठित गतिविधि
उत्तर देखें
उत्तर: (a) तृतीयक गतिविधि. यह एक सेवा है।
GDP में किसका मूल्य शामिल होता है
- केवल मध्यवर्ती वस्तुएँ
- केवल निर्यात
- केवल अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ
- आयात
उत्तर देखें
उत्तर: (c) केवल अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ. मध्यवर्ती वस्तुएँ गिनने से दोहरी गणना होगी।
आज भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक है
- तृतीयक
- द्वितीयक
- प्राथमिक
- असंगठित
उत्तर देखें
उत्तर: (a) तृतीयक. सेवाओं का GDP में सबसे बड़ा हिस्सा है।
मनरेगा ग्रामीण परिवारों को कितने दिन काम की गारंटी देता है
- 50 दिन
- 100 दिन
- 150 दिन
- 365 दिन
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 100 दिन. यह 2005 में पारित हुआ।
एक परिवार के पाँच सदस्य ऐसे खेत पर काम करते हैं जिसे केवल तीन की ज़रूरत है। यह उदाहरण है
- मौसमी बेरोज़गारी
- प्रच्छन्न बेरोज़गारी
- शिक्षित बेरोज़गारी
- घर्षणात्मक बेरोज़गारी
उत्तर देखें
उत्तर: (b) प्रच्छन्न बेरोज़गारी. दो सदस्यों को हटाने पर भी उत्पादन नहीं घटेगा।
कौन-सी विशेषता असंगठित क्षेत्रक की है
- सवेतन अवकाश और भविष्य निधि
- कम वेतन और रोज़गार सुरक्षा का अभाव
- रोज़गार सुरक्षा और तय घंटे
- सरकारी नियमों के तहत पंजीकरण
उत्तर देखें
उत्तर: (b) कम वेतन और रोज़गार सुरक्षा का अभाव. छोटी, बिखरी इकाइयों के श्रमिकों को संरक्षण नहीं मिलता।
सभी अध्याय: कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।