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विद्युत: चुंबकीय और ऊष्मीय प्रभाव – कक्षा 8 विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ

NCERT कक्षा 8 विज्ञान, अध्याय 4। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।

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अध्याय का सार

विद्युत धारा जिस तार से बहती है उसे गर्म करती है और उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र भी बनाती है। ये दोनों प्रभाव कई घरेलू उपकरणों में उपयोग होते हैं।

ऊष्मीय प्रभाव

  • प्रतिरोध से धारा ऊष्मा बनाती है (हीटर, इस्त्री, केतली, बल्ब का तंतु)।
  • फ़्यूज़ में पतला तार होता है जो अधिक धारा पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।
  • ISI चिह्न वाले तार और MCB वायरिंग सुरक्षित बनाते हैं।

चुंबकीय प्रभाव

  • ओर्स्टेड ने पाया कि धारावाही तार कंपास सुई को विक्षेपित करता है।
  • लोहे की कील पर लिपटी तार की कुंडली विद्युत चुंबक बनती है; धारा रुकते ही चुंबकत्व ख़त्म।
  • उपयोग: बिजली की घंटी, कबाड़ लोहा उठाने वाली क्रेन, लाउडस्पीकर, मोटर।

मुख्य शब्द

विद्युत चुंबक
नरम लोहे पर कुंडली में धारा से बना चुंबक
फ़्यूज़
अतिभार पर पिघलकर परिपथ तोड़ने वाली सुरक्षा युक्ति
तापन अवयव
हीटर की कुंडली जो धारा से गर्म होती है

सूत्र

  • अधिक धारा या अधिक फेरे → प्रबल विद्युत चुंबक

उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न

अधिक धारा बहने पर फ़्यूज़ तार क्यों पिघल जाता है?2 अंक

फ़्यूज़ तार का गलनांक कम होता है। अधिक धारा से बहुत ऊष्मा बनती है (तापीय प्रभाव), तार पिघलकर परिपथ तोड़ देता है और उपकरणों की रक्षा होती है।

विद्युत चुंबक स्थायी चुंबक से कैसे भिन्न है?3 अंक

विद्युत चुंबक केवल धारा बहने तक चुंबक रहता है, उसकी शक्ति बदली और ध्रुव उलटे जा सकते हैं। स्थायी चुंबक सदा चुंबकत्व बनाए रखता है।

विद्युत चुंबक बनाने की विधि लिखिए, और धारा के चुंबकीय तथा तापीय प्रभावों के चार उपयोग बताइए।5 अंक

लोहे की कील पर विद्युतरोधी ताँबे का तार कई बार लपेटें और सिरों को स्विच सहित सेल से जोड़ें; धारा बहने पर कील पिनों को आकर्षित करती है। चुंबकीय प्रभाव के उपयोग: विद्युत घंटी, लोहे का कबाड़ उठाने वाली क्रेन, मोटर और लाउडस्पीकर। तापीय प्रभाव के उपयोग: विद्युत इस्त्री, हीटर, केतली और फ़्यूज़ (तापदीप्त बल्ब का तंतु भी)।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • धारा ऊष्मा और चुंबकत्व बनाती है।
  • ओर्स्टेड ने चुंबकीय प्रभाव दिखाया।
  • फ़्यूज़ अतिभार से बचाता है।

परीक्षा सुझाव

  • विद्युत चुंबक चालू/बंद और प्रबलता बदली जा सकती है — स्थायी चुंबक नहीं।
  • गीले हाथों से स्विच कभी न छुएँ।

अभ्यास MCQ

  1. बिजली की इस्त्री काम करती है

    1. चुंबकीय प्रभाव पर
    2. केवल प्रकाश पर
    3. रासायनिक प्रभाव पर
    4. ऊष्मीय प्रभाव पर
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) ऊष्मीय प्रभाव पर. ऊष्मीय प्रभाव।

  2. किसने पहले दिखाया कि धारा कंपास सुई को प्रभावित करती है?

    1. ओर्स्टेड
    2. न्यूटन
    3. फ़ैराडे
    4. एडिसन
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) ओर्स्टेड. हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड।

  3. विद्युत चुंबक की प्रबलता बढ़ती है

    1. फेरे घटाने से
    2. लोहे का क्रोड हटाने से
    3. धारा या फेरे बढ़ाने से
    4. प्लास्टिक क्रोड से
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) धारा या फेरे बढ़ाने से. अधिक धारा या फेरे।

  4. फ़्यूज़ तार का होना चाहिए

    1. निम्न गलनांक
    2. उच्च गलनांक
    3. बहुत मोटा आकार
    4. लोहे की परत
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) निम्न गलनांक. उसे जल्दी पिघलना चाहिए।

  5. विद्युत हीटर किस पर कार्य करता है

    1. चुंबकीय प्रभाव
    2. केवल प्रकाश प्रभाव
    3. रासायनिक प्रभाव
    4. तापीय प्रभाव
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) तापीय प्रभाव. तत्व गर्म होता है।

  6. बिजली की घंटी बार-बार बजती है क्योंकि विद्युत चुंबक

    1. सदा चालू रहता है
    2. परिपथ द्वारा बार-बार चालू-बंद होता है
    3. स्थायी चुंबक प्रयोग करता है
    4. गर्म हो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) परिपथ द्वारा बार-बार चालू-बंद होता है. संपर्क टूटता और जुड़ता है।

  7. क्रेन कबाड़ लोहा उठाने में स्थायी चुंबक नहीं, विद्युत चुंबक क्यों प्रयोग करती है?

    1. सस्ते हैं
    2. कभी ख़राब नहीं होते
    3. हल्के हैं
    4. धारा बंद कर लोहा गिराया जा सकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) धारा बंद कर लोहा गिराया जा सकता है. चुंबकत्व बंद किया जा सकता है।

  8. विद्युत चुंबक की शक्ति बढ़ाई जा सकती है

    1. फेरों की संख्या बढ़ाकर
    2. प्लास्टिक का क्रोड लगाकर
    3. धारा घटाकर
    4. क्रोड हटाकर
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) फेरों की संख्या बढ़ाकर. अधिक फेरे, अधिक धारा, लोहे का क्रोड।

सभी अध्याय: कक्षा 8 विज्ञान

यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।