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ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन – कक्षा 12 समाजशास्त्र नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 समाजशास्त्र, अध्याय 10। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
भारत की ग्रामीण जनसंख्या के बड़े भाग हेतु कृषि आजीविका का मुख्य स्रोत है, और कृषक संरचना, यानी भूमि का वितरण, ग्रामीण सामाजिक संबंधों को आकार देती है। स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधारों ने असमानता घटाने का प्रयास किया, और हरित क्रांति ने उत्पादन बढ़ाया पर असमानताएँ भी बढ़ाईं। उदारीकरण और वैश्वीकरण ने संविदा खेती, ग्रामीण प्रवास और कृषि संकट सहित नए परिवर्तन लाए हैं।
कृषक संरचना और भूमि सुधार
- भू-स्वामित्व असमान है और जाति से निकटता से जुड़ा है: प्रबल भूस्वामी जातियाँ भूमि नियंत्रित करती हैं, जबकि अनेक दलित और आदिवासी भूमिहीन श्रमिक हैं।
- भूमि सुधारों में ज़मींदारी उन्मूलन, काश्तकारी सुधार और भूमि हदबंदी क़ानून शामिल थे; ज़मींदारी उन्मूलन सबसे सफल रहा, जबकि बेनामी हस्तांतरण जैसी खामियों के कारण हदबंदी क़ानून कमज़ोर रूप से लागू हुए।
- हरित क्रांति (1960 के दशक के मध्य से) ने उच्च उपज वाले बीजों, उर्वरकों, कीटनाशकों और सिंचाई का प्रयोग किया, मुख्यतः पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जिससे उत्पादन बढ़ा।
परिणाम और नए परिवर्तन
- हरित क्रांति से बड़े और मध्यम किसानों को अधिक लाभ हुआ, मशीनीकरण बढ़ा, कुछ काश्तकार और श्रमिक विस्थापित हुए, और क्षेत्रीय असमानता व पर्यावरणीय समस्याएँ बनीं।
- ग्रामीण श्रम अधिक प्रवासी हो गया है; 'घुमंतू श्रम' (यान ब्रेमन का शब्द) मौसमी रूप से नगरों, ईंट भट्ठों और अन्य खेतों की ओर जाता है, और पुरुषों के प्रवास से कृषि श्रम का स्त्रीकरण हुआ है।
- उदारीकरण संविदा खेती, निर्यातोन्मुख फ़सलें और बाज़ारों पर अधिक निर्भरता लाया; ऋणग्रस्तता और फ़सल विफलता ने कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं में योगदान दिया है।
मुख्य शब्द
- कृषक संरचना
- कृषि में भू-स्वामित्व और संबंधों का प्रतिरूप
- भूमि हदबंदी
- किसी परिवार द्वारा रखी जा सकने वाली भूमि की ऊपरी सीमा
- हरित क्रांति
- उच्च उपज वाले बीजों, उर्वरकों और सिंचाई से फ़सल उपज में वृद्धि
- संविदा खेती
- कोई कंपनी निश्चित शर्तों पर अपने लिए फ़सल उगाने हेतु किसानों से अनुबंध करती है
- कृषि श्रम का स्त्रीकरण
- कृषि कार्य में महिलाओं का बढ़ता हिस्सा
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
संविदा खेती क्या है?2 अंक
संविदा खेती वह व्यवस्था है जिसमें कोई कंपनी किसानों से विशिष्ट फ़सलें, प्रायः निर्यात या प्रसंस्करण हेतु, उगाने का अनुबंध करती है और निश्चित क़ीमत पर उपज ख़रीदने पर सहमत होती है। यह सुनिश्चित बाज़ार देती है पर किसानों को कंपनियों पर निर्भर बनाती है और खाद्य फ़सलों की खेती घटा सकती है।
भूमि सुधार केवल आंशिक रूप से सफल क्यों रहे?3 अंक
ज़मींदारी उन्मूलन ने बिचौलियों को हटाया, पर काश्तकारी सुधारों से प्रायः काश्तकारों की बेदख़ली हुई, और भूमि हदबंदी क़ानून खामियों, रिश्तेदारों के नाम बेनामी हस्तांतरण, छूटों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव से कमज़ोर हुए, इसलिए बहुत कम अधिशेष भूमि का पुनर्वितरण हुआ।
हरित क्रांति के सामाजिक परिणामों की चर्चा कीजिए।5 अंक
1960 के दशक के मध्य में शुरू हुई हरित क्रांति ने गेहूँ और चावल की उच्च उपज वाली किस्मों के साथ रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई और मशीनीकरण शुरू किए, पहले पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में। इसने खाद्य उत्पादन बहुत बढ़ाया और भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने में मदद की। पर इसके सामाजिक परिणाम मिश्रित रहे। चूँकि इसमें महँगे आगत चाहिए थे, उन्हें वहन कर सकने वाले बड़े और मध्यम किसानों को सबसे अधिक लाभ हुआ, जबकि छोटे और सीमांत किसान पीछे रह गए, जिससे गाँवों के भीतर असमानता बढ़ी। मशीनीकरण ने कुछ श्रम की माँग घटाई, और लाभदायक खेती हेतु भूस्वामियों द्वारा भूमि वापस लेने से अनेक काश्तकार बेदख़ल हुए। भूस्वामियों और श्रमिकों के संबंध पारंपरिक संरक्षक-आश्रित संबंधों से नक़द मज़दूरी संबंधों में बदले। क्षेत्रीय असमानता बढ़ी, क्योंकि सिंचित क्षेत्रों को लाभ हुआ जबकि शुष्क और वर्षा-आधारित क्षेत्रों को नहीं। वाणिज्यीकरण ने किसानों को बाज़ारों और ऋण पर अधिक निर्भर बनाया। मृदा अवनयन, गिरते भूजल स्तर और कीटनाशक प्रदूषण सहित पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हुईं। कुछ प्रबल जातियों ने आर्थिक और राजनीतिक शक्ति प्राप्त की। कुछ क्षेत्रों में बढ़ी समृद्धि से अमीर किसानों के कृषक आंदोलन भी हुए। इस प्रकार हरित क्रांति वृद्धि के साथ असमानता और संकट के नए रूप भी लाई।
त्वरित पुनरावृत्ति
- कृषक संरचना और जाति।
- भूमि सुधार और उनकी सीमाएँ।
- हरित क्रांति और उसके परिणाम।
- प्रवास, संविदा खेती और कृषि संकट।
परीक्षा सुझाव
- भूमि सुधारों के तीन प्रकार याद रखें: ज़मींदारी उन्मूलन, काश्तकारी सुधार, भूमि हदबंदी।
- हरित क्रांति के दो सकारात्मक और दो नकारात्मक प्रभाव सूचीबद्ध करें।
अभ्यास MCQ
कृषि में भू-स्वामित्व का प्रतिरूप कहलाता है
- कृषक संरचना
- औद्योगिक संरचना
- नगरीय संरचना
- बाज़ार संरचना
उत्तर देखें
उत्तर: (a) कृषक संरचना. यह ग्रामीण संबंधों को आकार देती है।
भारत में हरित क्रांति कब शुरू हुई
- 1940 के दशक में
- 2000 के दशक में
- 1990 के दशक में
- 1960 के दशक के मध्य में
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उत्तर: (d) 1960 के दशक के मध्य में. उच्च उपज वाले बीज शुरू हुए।
किसी परिवार द्वारा रखी जा सकने वाली भूमि की ऊपरी सीमा है
- भूमि कर
- भूमि अभिलेख
- भूमि हदबंदी
- काश्तकारी
उत्तर देखें
उत्तर: (c) भूमि हदबंदी. इसका उद्देश्य भूमि का पुनर्वितरण था।
हरित क्रांति सबसे सफल कहाँ रही
- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश
- केरल और असम
- केवल ओडिशा और बिहार
- केवल राजस्थान
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उत्तर: (a) पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश. वहाँ सिंचाई थी।
काम हेतु मौसमी रूप से स्थान बदलने वाले श्रमिकों को 'घुमंतू श्रम' किसने कहा
- यान ब्रेमन
- श्रीनिवास
- घुर्ये
- देसाई
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उत्तर: (a) यान ब्रेमन. उन्होंने प्रवासी श्रमिकों का अध्ययन किया।
भूमि हदबंदी क़ानून मुख्यतः क्यों कमज़ोर रूप से लागू हुए
- बहुत अधिक भूमि
- किसानों का अभाव
- बेनामी हस्तांतरण जैसी खामियाँ
- अत्यधिक वर्षा
उत्तर देखें
उत्तर: (c) बेनामी हस्तांतरण जैसी खामियाँ. भूस्वामियों ने इनसे बचाव किया।
कृषि कार्य में महिलाओं के बढ़ते हिस्से को कृषि श्रम का स्त्रीकरण क्यों कहा जाता है
- पुरुष अन्य कार्य हेतु प्रवास करते हैं, जिससे महिलाएँ अधिक कृषि श्रम करती हैं
- अधिकांश भूमि महिलाओं की है
- मशीनों ने महिलाओं का स्थान लिया
- महिलाओं ने खेती छोड़ दी
उत्तर देखें
उत्तर: (a) पुरुष अन्य कार्य हेतु प्रवास करते हैं, जिससे महिलाएँ अधिक कृषि श्रम करती हैं. महिलाओं का कार्यभार बढ़ा।
हरित क्रांति का एक प्रमुख सामाजिक परिणाम था
- अमीर किसानों के अधिक लाभ से बढ़ी असमानता
- सभी को समान लाभ
- सारे ग्रामीण प्रवास का अंत
- जाति का उन्मूलन
उत्तर देखें
उत्तर: (a) अमीर किसानों के अधिक लाभ से बढ़ी असमानता. छोटे किसान आगत ख़रीद नहीं सके।
सभी अध्याय: कक्षा 12 समाजशास्त्र
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।