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उपसहसंयोजन यौगिक – कक्षा 12 रसायन विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 रसायन विज्ञान, अध्याय 5। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
उपसहसंयोजन यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु उपसहसंयोजक आबंधों से लिगंडों से जुड़ा होता है। वर्नर सिद्धांत, IUPAC नामकरण और क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत इनकी संरचना और रंग समझाते हैं।
मूल बातें
- लिगंड इलेक्ट्रॉन युग्म देते हैं: एकदंती (NH₃, Cl⁻), द्विदंती (en, ऑक्सेलेट), बहुदंती (EDTA, षट्दंती)।
- उपसहसंयोजन संख्या = जुड़े दाता परमाणुओं की संख्या; आवेश संतुलन से ऑक्सीकरण अवस्था।
- वर्नर: प्राथमिक संयोजकता (आयननीय) और द्वितीयक संयोजकता (उपसहसंयोजन संख्या)।
आबंधन और समावयवता
- अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन: t₂g और e_g; प्रबल क्षेत्र लिगंड (CN⁻, CO) युग्मन कराते हैं (निम्न चक्रण)।
- स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी: I⁻ < Cl⁻ < F⁻ < H₂O < NH₃ < en < CN⁻ < CO।
- समावयवता: ज्यामितीय (समपक्ष/विपक्ष), प्रकाशिक, आयनन, बंधनी (NO₂⁻/ONO⁻), उपसहसंयोजन।
मुख्य शब्द
- लिगंड
- केंद्रीय धातु को एकाकी युग्म देने वाला आयन या अणु
- कीलेट
- दो या अधिक परमाणुओं से जुड़ने वाले बहुदंती लिगंड से बना संकुल
- उपसहसंयोजन संख्या
- केंद्रीय धातु आयन से सीधे बंधित लिगैंड दाता परमाणुओं की संख्या
सूत्र
- संकुल का आवेश = धातु की ऑक्सीकरण अवस्था + लिगंडों के आवेशों का योग
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
कीलेट क्या है? कीलेटी लिगैंड का एक उदाहरण दीजिए।2 अंक
वह संकुल जिसमें बहुदंतुर लिगैंड दो या अधिक दाता परमाणुओं से धातु से जुड़कर वलय बनाता है। एथिलीनडाइऐमीन (en) और EDTA⁴⁻ कीलेटी लिगैंड हैं।
समझाइए कि [Fe(CN)₆]³⁻ दुर्बल अनुचुंबकीय जबकि [FeF₆]³⁻ प्रबल अनुचुंबकीय क्यों है।3 अंक
Fe³⁺, d⁵ है। CN⁻ प्रबल-क्षेत्र लिगैंड: इलेक्ट्रॉन t₂g में युग्मित (t₂g⁵), 1 अयुग्मित (d²sp³, आंतर कक्षक)। F⁻ दुर्बल-क्षेत्र: t₂g³e_g², 5 अयुग्मित (sp³d², बाह्य कक्षक), अतः प्रबल अनुचुंबकीय।
अष्टफलकीय संकुल में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन समझाइए और बताइए कि [Ti(H₂O)₆]³⁺ रंगीन क्यों है। [Co(NH₃)₄Cl₂]⁺ में समावयवता के प्रकार भी लिखिए।5 अंक
अष्टफलकीय क्षेत्र में लिगैंड अक्षों के अनुदिश आते हैं, अतः dx²−y² और dz² (e_g) की ऊर्जा बढ़ती और dxy, dyz, dxz (t₂g) की घटती है; अंतर Δₒ है। Ti³⁺ (d¹) का इलेक्ट्रॉन t₂g में है; यह हरा-पीला प्रकाश (लगभग 498 nm) अवशोषित कर e_g में जाता है (d–d संक्रमण), अतः पूरक बैंगनी रंग दिखता है। [Co(NH₃)₄Cl₂]⁺ ज्यामितीय समावयवता दिखाता है: समपक्ष (दोनों Cl आसन्न) और विपक्ष (सम्मुख); कोई प्रकाशिक सक्रिय नहीं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- EDTA षट्दंती है।
- CN⁻ और CO प्रबल क्षेत्र लिगंड।
- कीलेट अधिक स्थायी।
परीक्षा सुझाव
- [Co(NH₃)₆]Cl₃ में उपसहसंयोजन संख्या 6 और Co +3 है।
- प्रबल-क्षेत्र लिगैंड (CN⁻, CO) युग्मन कर निम्न-चक्रण संकुल; दुर्बल-क्षेत्र लिगैंड (F⁻, H₂O) उच्च-चक्रण संकुल बनाते हैं।
अभ्यास MCQ
[Co(NH₃)₆]³⁺ में Co की उपसहसंयोजन संख्या है
- 6
- 3
- 4
- 9
उत्तर देखें
उत्तर: (a) 6. छह लिगंड।
EDTA है
- एकदंती लिगंड
- षट्दंती लिगंड
- द्विदंती लिगंड
- उदासीन लवण
उत्तर देखें
उत्तर: (b) षट्दंती लिगंड. छह दाता परमाणु।
K₄[Fe(CN)₆] में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था है
- +2
- +3
- +4
- +6
उत्तर देखें
उत्तर: (a) +2. 4 + x − 6 = 0।
कौन प्रबल क्षेत्र लिगंड है?
- I⁻
- CN⁻
- H₂O
- Cl⁻
उत्तर देखें
उत्तर: (b) CN⁻. श्रेणी में ऊपर।
[Co(NH₃)₆]Cl₃ का IUPAC नाम है
- हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट(III) क्लोराइड
- कोबाल्ट हेक्साऐम्मीन क्लोराइड
- हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट(II) क्लोराइड
- ट्राइऐम्मीनकोबाल्ट क्लोराइड
उत्तर देखें
उत्तर: (a) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट(III) क्लोराइड. Co +3।
[Co(NH₃)₅Br]SO₄ और [Co(NH₃)₅SO₄]Br दिखाते हैं
- बंधनी समावयवता
- आयनन समावयवता
- प्रकाशिक समावयवता
- ज्यामितीय समावयवता
उत्तर देखें
उत्तर: (b) आयनन समावयवता. विलयन में अलग आयन।
[Fe(CN)₆]³⁻ (Fe³⁺, d⁵, प्रबल क्षेत्र) में कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं?
- 1
- 3
- 5
- 0
उत्तर देखें
उत्तर: (a) 1. निम्न चक्रण t₂g⁵।
[Ni(CN)₄]²⁻ है
- चतुष्फलकीय और अनुचुंबकीय
- वर्ग समतली और प्रतिचुंबकीय
- अष्टफलकीय
- रैखिक
उत्तर देखें
उत्तर: (b) वर्ग समतली और प्रतिचुंबकीय. dsp², प्रबल क्षेत्र।
सभी अध्याय: कक्षा 12 रसायन विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।