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वित्तीय बाज़ार – कक्षा 12 व्यवसाय अध्ययन नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 व्यवसाय अध्ययन, अध्याय 10। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
वित्तीय बाज़ार बचतकर्ताओं और उधारकर्ताओं को जोड़ता है और बचत को उत्पादक उपयोगों में आवंटित करने में मदद करता है। इसमें अल्पकालीन धन हेतु मुद्रा बाज़ार और दीर्घकालीन धन हेतु पूँजी बाज़ार शामिल हैं। पूँजी बाज़ार में नए निर्गमन हेतु प्राथमिक बाज़ार और विद्यमान प्रतिभूतियों के व्यापार हेतु द्वितीयक बाज़ार, यानी स्टॉक एक्सचेंज, है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रतिभूति बाज़ार का नियमन करता है।
मुद्रा बाज़ार
- मुद्रा बाज़ार एक वर्ष तक की परिपक्वता वाले अल्पकालीन धन से संबंधित है; प्रतिभागियों में RBI, व्यावसायिक बैंक, वित्तीय संस्थाएँ और बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं।
- प्रपत्र: ट्रेज़री बिल (सरकार की ओर से RBI द्वारा 91, 182 या 364 दिनों हेतु जारी), वाणिज्यिक पत्र (कंपनियों के अल्पकालीन अप्रतिभूत प्रतिज्ञा पत्र), माँग मुद्रा (बहुत अल्पकालीन अंतर-बैंक ऋण), जमा प्रमाणपत्र और वाणिज्यिक बिल।
पूँजी बाज़ार और स्टॉक एक्सचेंज
- प्राथमिक बाज़ार (नया निर्गमन बाज़ार) विवरणिका द्वारा प्रस्ताव, विक्रय हेतु प्रस्ताव, निजी नियोजन, अधिकार निर्गमन और ई-आईपीओ से नई पूँजी जुटाता है।
- द्वितीयक बाज़ार (स्टॉक एक्सचेंज) तरलता, मूल्य निर्धारण, लेन-देन की सुरक्षा देता और आर्थिक विकास में योगदान देता है।
- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (1875) एशिया का सबसे पुराना है; नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (1992 में निगमित) ने देशव्यापी स्क्रीन-आधारित व्यापार शुरू किया।
- व्यापार प्रक्रिया: दलाल के माध्यम से ट्रेडिंग और डीमैट खाता खोलना, आदेश देना, सौदा निष्पादित होना, और निपटान; भारत T+1 निपटान अपनाता है।
सेबी
- सेबी 1988 में स्थापित हुआ और सेबी अधिनियम, 1992 से इसे वैधानिक शक्तियाँ मिलीं।
- उद्देश्य: निवेशकों की रक्षा, स्टॉक एक्सचेंजों और मध्यस्थों का नियमन, और प्रतिभूति बाज़ार में निष्पक्ष व्यवहार व विकास को बढ़ावा।
- कार्य: नियामक (दलालों का पंजीकरण, नियम बनाना), विकासात्मक (निवेशक शिक्षा, मध्यस्थों का प्रशिक्षण) और सुरक्षात्मक (भेदिया व्यापार और कपटपूर्ण प्रथाओं पर रोक)।
मुख्य शब्द
- वित्तीय बाज़ार
- वित्तीय परिसंपत्तियों के सृजन और विनिमय का बाज़ार
- मुद्रा बाज़ार
- एक वर्ष तक की परिपक्वता वाले अल्पकालीन धन का बाज़ार
- पूँजी बाज़ार
- अंशों, ऋणपत्रों और ऋणों से दीर्घकालीन धन का बाज़ार
- ट्रेज़री बिल
- RBI द्वारा बट्टे पर जारी अल्पकालीन सरकारी प्रतिभूति
- डीमैट खाता
- प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने वाला खाता
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
मुद्रा बाज़ार और पूँजी बाज़ार में अंतर बताइए।2 अंक
मुद्रा बाज़ार ट्रेज़री बिल, वाणिज्यिक पत्र और माँग मुद्रा जैसे प्रपत्रों से एक वर्ष तक की परिपक्वता वाले अल्पकालीन धन से संबंधित है; इसमें जोखिम कम है और प्रतिभागी मुख्यतः बैंक और वित्तीय संस्थाएँ हैं। पूँजी बाज़ार अंशों, ऋणपत्रों और दीर्घकालीन ऋणों से दीर्घकालीन धन से संबंधित है; इसमें अधिक जोखिम और अपेक्षित प्रतिफल है, और व्यक्ति भाग ले सकते हैं।
स्टॉक एक्सचेंज के कार्य बताइए।3 अंक
स्टॉक एक्सचेंज विद्यमान प्रतिभूतियों को तरलता और विपणनीयता देता है; माँग और पूर्ति से मूल्य निर्धारण में मदद करता है; नियमन द्वारा लेन-देन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है; बचत को निवेश में लगाकर आर्थिक विकास में योगदान देता है; समता संस्कृति फैलाता है; और सीमाओं के भीतर सट्टे का अवसर देता है।
सेबी के उद्देश्य और कार्य समझाइए।5 अंक
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड 1988 में स्थापित हुआ और सेबी अधिनियम, 1992 के अंतर्गत उसे वैधानिक शक्तियाँ मिलीं। इसके उद्देश्य स्टॉक एक्सचेंजों और प्रतिभूति उद्योग का व्यवस्थित संचालन हेतु नियमन करना, निवेशकों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना, व्यापार में कदाचार रोकना और स्व-नियमन व वैधानिक नियमन में संतुलन लाना, और दलालों व मर्चेंट बैंकरों जैसे मध्यस्थों हेतु आचार संहिता का नियमन व विकास करना हैं। इसके कार्य तीन प्रकार के हैं। नियामक कार्यों में दलालों, उप-दलालों और अन्य मध्यस्थों का पंजीकरण, म्यूचुअल फ़ंडों का नियमन, कंपनियों के अधिग्रहण का नियमन, और स्टॉक एक्सचेंजों की जाँच व अंकेक्षण शामिल हैं। विकासात्मक कार्यों में मध्यस्थों का प्रशिक्षण, निष्पक्ष प्रथाओं और आचार संहिता को बढ़ावा, और बाज़ार प्रतिभागियों हेतु उपयोगी अनुसंधान व सूचना प्रकाशन शामिल हैं। सुरक्षात्मक कार्यों में मूल्य हेराफेरी जैसी कपटपूर्ण और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक, भेदिया व्यापार का नियंत्रण और दंड लगाना, और निवेशकों को शिक्षित करना शामिल हैं। इन कार्यों से सेबी निवेशकों का विश्वास बनाता और निष्पक्ष व कुशल प्रतिभूति बाज़ार विकसित करता है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- मुद्रा बाज़ार: एक वर्ष तक; ट्रेज़री बिल, वाणिज्यिक पत्र, माँग मुद्रा, जमा प्रमाणपत्र।
- पूँजी बाज़ार: प्राथमिक और द्वितीयक।
- स्टॉक एक्सचेंज के कार्य: तरलता, मूल्य निर्धारण, सुरक्षा।
- सेबी: निवेशकों की रक्षा, नियमन, विकास।
परीक्षा सुझाव
- मुद्रा बाज़ार और पूँजी बाज़ार की अवधि, प्रपत्र, प्रतिभागी और जोखिम पर तुलना तालिका बनाएँ।
- वर्ष याद रखें: BSE 1875, सेबी 1988 (वैधानिक 1992), NSE 1992।
अभ्यास MCQ
अल्पकालीन धन का बाज़ार है
- मुद्रा बाज़ार
- पूँजी बाज़ार
- प्राथमिक बाज़ार
- स्टॉक एक्सचेंज
उत्तर देखें
उत्तर: (a) मुद्रा बाज़ार. परिपक्वता एक वर्ष तक है।
सेबी को वैधानिक शक्तियाँ कब मिलीं
- 1875
- 1988
- 1992
- 2008
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 1992. सेबी अधिनियम, 1992 से।
जिस बाज़ार में नई प्रतिभूतियाँ जारी होती हैं, वह है
- द्वितीयक बाज़ार
- प्राथमिक बाज़ार
- मुद्रा बाज़ार
- वस्तु बाज़ार
उत्तर देखें
उत्तर: (b) प्राथमिक बाज़ार. इसे नया निर्गमन बाज़ार भी कहते हैं।
ट्रेज़री बिल RBI किसकी ओर से जारी करता है
- कंपनियाँ
- सेबी
- व्यावसायिक बैंक
- सरकार
उत्तर देखें
उत्तर: (d) सरकार. ये अल्पकालीन सरकारी प्रतिभूतियाँ हैं।
एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है
- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज
- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज
- कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज
- दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज
उत्तर देखें
उत्तर: (a) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज. यह 1875 में स्थापित हुआ।
इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी प्रतिभूतियाँ किसमें रखी जाती हैं
- बचत खाता
- चालू खाता
- डीमैट खाता
- सावधि जमा
उत्तर देखें
उत्तर: (c) डीमैट खाता. निक्षेपागार इन्हें रखते हैं।
बैंकों के बीच बहुत अल्पकालीन, प्रायः एक दिन का, उधार है
- माँग मुद्रा
- वाणिज्यिक पत्र
- ट्रेज़री बिल
- ऋणपत्र
उत्तर देखें
उत्तर: (a) माँग मुद्रा. यह बैंकों को आरक्षित आवश्यकताएँ पूरी करने में मदद करता है।
सेबी का सुरक्षात्मक कार्य कौन-सा है
- दलालों का पंजीकरण
- अनुसंधान करना
- मध्यस्थों का प्रशिक्षण
- भेदिया व्यापार और कपटपूर्ण प्रथाओं पर रोक
उत्तर देखें
उत्तर: (d) भेदिया व्यापार और कपटपूर्ण प्रथाओं पर रोक. यह निवेशकों की रक्षा करता है।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।