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लेखांकन अनुपात – कक्षा 12 लेखाशास्त्र नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 लेखाशास्त्र, अध्याय 9। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
लेखांकन अनुपात वित्तीय विवरणों के दो संबंधित मदों के बीच गणितीय संबंध है, जो शुद्ध अनुपात, प्रतिशत या गुणा के रूप में व्यक्त होता है। अनुपात तरलता अनुपात, शोधन क्षमता अनुपात, क्रियाशीलता (आवर्त) अनुपात और लाभप्रदता अनुपात में वर्गीकृत होते हैं। ये फ़र्म की अल्पकालीन स्थिति, दीर्घकालीन स्थिरता, कुशलता और उपार्जन क्षमता आँकने में मदद करते हैं।
तरलता और शोधन क्षमता अनुपात
- चालू अनुपात = चालू परिसंपत्तियाँ ÷ चालू देयताएँ; लगभग 2:1 का अनुपात सुरक्षित माना जाता है।
- त्वरित (तरल) अनुपात = त्वरित परिसंपत्तियाँ ÷ चालू देयताएँ, जहाँ त्वरित परिसंपत्तियाँ = चालू परिसंपत्तियाँ − माल सूची − पूर्वदत्त व्यय; लगभग 1:1 सुरक्षित माना जाता है।
- ऋण-समता अनुपात = दीर्घकालीन ऋण ÷ अंशधारक निधि; स्वामित्व अनुपात = अंशधारक निधि ÷ कुल परिसंपत्तियाँ; कुल परिसंपत्तियाँ-ऋण अनुपात; ब्याज आवरण अनुपात = ब्याज और कर पूर्व शुद्ध लाभ ÷ दीर्घकालीन ऋण पर ब्याज।
क्रियाशीलता अनुपात
- माल सूची आवर्त अनुपात = प्रचालन से आगम की लागत ÷ औसत माल सूची।
- व्यापारिक प्राप्य आवर्त अनुपात = प्रचालन से शुद्ध उधार आगम ÷ औसत व्यापारिक प्राप्य; व्यापारिक देय आवर्त अनुपात = शुद्ध उधार क्रय ÷ औसत व्यापारिक देय।
- कार्यशील पूँजी आवर्त अनुपात = प्रचालन से आगम ÷ कार्यशील पूँजी।
लाभप्रदता अनुपात
- सकल लाभ अनुपात = सकल लाभ ÷ प्रचालन से शुद्ध आगम × 100; शुद्ध लाभ अनुपात = शुद्ध लाभ ÷ प्रचालन से आगम × 100।
- परिचालन अनुपात = (प्रचालन से आगम की लागत + परिचालन व्यय) ÷ प्रचालन से आगम × 100; परिचालन लाभ अनुपात = 100 − परिचालन अनुपात।
- निवेश पर प्रतिफल (प्रयुक्त पूँजी पर प्रतिफल) = ब्याज और कर पूर्व शुद्ध लाभ ÷ प्रयुक्त पूँजी × 100।
मुख्य शब्द
- लेखांकन अनुपात
- दो संबंधित लेखांकन अंकों के बीच गणितीय संबंध
- चालू अनुपात
- चालू परिसंपत्तियों को चालू देयताओं से भाग देना
- त्वरित अनुपात
- त्वरित परिसंपत्तियों को चालू देयताओं से भाग देना
- ऋण-समता अनुपात
- दीर्घकालीन ऋण को अंशधारक निधि से भाग देना
- माल सूची आवर्त अनुपात
- प्रचालन से आगम की लागत को औसत माल सूची से भाग देना
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
त्वरित अनुपात क्या है? इसे चालू अनुपात से तरलता की बेहतर कसौटी क्यों माना जाता है?2 अंक
त्वरित अनुपात त्वरित परिसंपत्तियों और चालू देयताओं का अनुपात है, जहाँ त्वरित परिसंपत्तियाँ चालू परिसंपत्तियाँ घटा माल सूची और पूर्वदत्त व्यय हैं। यह तरलता की कड़ी कसौटी है क्योंकि माल सूची बेचने में समय लग सकता है और पूर्वदत्त व्यय रोकड़ में नहीं बदल सकते, इसलिए यह चालू देयताएँ तुरंत चुकाने की फ़र्म की क्षमता दिखाता है।
लेखांकन अनुपातों का वर्गीकरण समझाइए।3 अंक
लेखांकन अनुपात तरलता अनुपातों, जैसे चालू अनुपात और त्वरित अनुपात, जो अल्पकालीन दायित्व चुकाने की क्षमता मापते हैं; शोधन क्षमता अनुपातों, जैसे ऋण-समता अनुपात, स्वामित्व अनुपात और ब्याज आवरण अनुपात, जो दीर्घकालीन वित्तीय स्थिरता मापते हैं; क्रियाशीलता या आवर्त अनुपातों, जैसे माल सूची, व्यापारिक प्राप्य और कार्यशील पूँजी आवर्त, जो संसाधनों के उपयोग में कुशलता मापते हैं; और लाभप्रदता अनुपातों, जैसे सकल लाभ, शुद्ध लाभ, परिचालन अनुपात और निवेश पर प्रतिफल, जो उपार्जन क्षमता मापते हैं, में वर्गीकृत होते हैं।
निम्न से चालू अनुपात, त्वरित अनुपात और ऋण-समता अनुपात निकालिए और टिप्पणी कीजिए: माल सूची ₹50,000 और पूर्वदत्त व्यय ₹10,000 सहित चालू परिसंपत्तियाँ ₹2,00,000; चालू देयताएँ ₹1,00,000; दीर्घकालीन ऋण ₹3,00,000; अंशधारक निधि ₹2,00,000।5 अंक
चालू अनुपात चालू परिसंपत्तियाँ ÷ चालू देयताएँ = ₹2,00,000 ÷ ₹1,00,000 = 2:1 है। यह सामान्यतः स्वीकृत 2:1 के मानक के अनुरूप है, जो दिखाता है कि फ़र्म के पास अल्पकालीन दायित्व पूरे करने हेतु पर्याप्त चालू परिसंपत्तियाँ हैं। त्वरित परिसंपत्तियाँ चालू परिसंपत्तियाँ घटा माल सूची और पूर्वदत्त व्यय = ₹2,00,000 − ₹50,000 − ₹10,000 = ₹1,40,000 हैं। त्वरित अनुपात त्वरित परिसंपत्तियाँ ÷ चालू देयताएँ = ₹1,40,000 ÷ ₹1,00,000 = 1.4:1 है। यह 1:1 के मानक से ऊपर है, जो माल सूची बेचे बिना भी अच्छी तात्कालिक तरलता दर्शाता है। ऋण-समता अनुपात दीर्घकालीन ऋण ÷ अंशधारक निधि = ₹3,00,000 ÷ ₹2,00,000 = 1.5:1 है। यह सामान्यतः स्वीकृत 2:1 की सीमा के भीतर है, जिसका अर्थ है कि फ़र्म स्वामी कोष से अधिक उधार कोष पर निर्भर है पर अत्यधिक जोखिमपूर्ण नहीं है। कुल मिलाकर फ़र्म की तरलता सुदृढ़ है और उसकी दीर्घकालीन वित्तीय संरचना उचित है, यद्यपि कम ऋण-समता अनुपात ऋणदाताओं को अधिक सुरक्षा देगा।
त्वरित पुनरावृत्ति
- तरलता: चालू 2:1, त्वरित 1:1।
- शोधन क्षमता: ऋण-समता, स्वामित्व, ब्याज आवरण।
- क्रियाशीलता: माल सूची, प्राप्य, देय, कार्यशील पूँजी आवर्त।
- लाभप्रदता: सकल लाभ, शुद्ध लाभ, परिचालन, निवेश पर प्रतिफल।
परीक्षा सुझाव
- हर सूत्र लिखें, मान रखें और परिणाम सही रूप (अनुपात, प्रतिशत या गुणा) में बताएँ।
- सुरक्षित मानक याद रखें: चालू अनुपात 2:1, त्वरित अनुपात 1:1, ऋण-समता 2:1।
अभ्यास MCQ
चालू परिसंपत्तियों को चालू देयताओं से भाग देना है
- चालू अनुपात
- त्वरित अनुपात
- ऋण-समता अनुपात
- शुद्ध लाभ अनुपात
उत्तर देखें
उत्तर: (a) चालू अनुपात. यह अल्पकालीन तरलता मापता है।
लगभग कितना चालू अनुपात सुरक्षित माना जाता है
- 1:2
- 1:5
- 5:1
- 2:1
उत्तर देखें
उत्तर: (d) 2:1. चालू परिसंपत्तियाँ चालू देयताओं की लगभग दोगुनी होनी चाहिए।
ऋण-समता अनुपात है
- तरलता अनुपात
- क्रियाशीलता अनुपात
- शोधन क्षमता अनुपात
- लाभप्रदता अनुपात
उत्तर देखें
उत्तर: (c) शोधन क्षमता अनुपात. यह दीर्घकालीन वित्तीय संरचना दिखाता है।
त्वरित परिसंपत्तियों में शामिल नहीं होते
- माल सूची और पूर्वदत्त व्यय
- व्यापारिक प्राप्य
- रोकड़
- विपणन योग्य प्रतिभूतियाँ
उत्तर देखें
उत्तर: (a) माल सूची और पूर्वदत्त व्यय. इन्हें जल्दी रोकड़ में नहीं बदला जा सकता।
माल सूची आवर्त अनुपात प्रचालन से आगम की लागत को किससे भाग देकर निकलता है
- केवल अंतिम माल सूची
- औसत माल सूची
- कुल परिसंपत्तियाँ
- शुद्ध लाभ
उत्तर देखें
उत्तर: (b) औसत माल सूची. यह दिखाता है कि स्टॉक कितनी तेज़ी से बिकता है।
निवेश पर प्रतिफल किससे निकाला जाता है
- कर पश्चात शुद्ध लाभ ÷ अंश पूँजी
- आगम ÷ परिसंपत्तियाँ
- सकल लाभ ÷ विक्रय
- ब्याज और कर पूर्व शुद्ध लाभ ÷ प्रयुक्त पूँजी
उत्तर देखें
उत्तर: (d) ब्याज और कर पूर्व शुद्ध लाभ ÷ प्रयुक्त पूँजी. यह समग्र कुशलता मापता है।
चालू परिसंपत्तियाँ ₹2,00,000 (माल सूची ₹50,000 और पूर्वदत्त व्यय ₹10,000 सहित); चालू देयताएँ ₹1,00,000। त्वरित अनुपात है
- 2:1
- 1.5:1
- 1:1
- 1.4:1
उत्तर देखें
उत्तर: (d) 1.4:1. त्वरित परिसंपत्तियाँ ₹1,40,000 ÷ ₹1,00,000।
प्रचालन से आगम की लागत ₹6,00,000; औसत माल सूची ₹1,00,000। माल सूची आवर्त अनुपात है
- 16 गुना
- 60 गुना
- 0.6 गुना
- 6 गुना
उत्तर देखें
उत्तर: (d) 6 गुना. 6,00,000 ÷ 1,00,000।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।