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संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़ – कक्षा 11 राजनीति विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 राजनीति विज्ञान, अध्याय 9। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज़ है क्योंकि इसने अपने मूल मूल्यों को सुरक्षित रखते हुए बदलती ज़रूरतों के अनुसार स्वयं को ढाला है। अनुच्छेद 368 के अंतर्गत अलग-अलग कठिनाई वाली प्रक्रियाओं से इसमें संशोधन हो सकता है, और न्यायालयों ने इसकी रचनात्मक व्याख्या की है। मूल संरचना सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि संशोधन इसकी आवश्यक विशेषताओं को नष्ट न कर सकें।
संशोधन की विधियाँ
- कुछ प्रावधान अनुच्छेद 368 के बाहर संसद के साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं, जैसे नए राज्य बनाना।
- अधिकांश प्रावधानों हेतु विशेष बहुमत चाहिए: हर सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई।
- संघीय ढाँचे को प्रभावित करने वाले प्रावधानों, जैसे राष्ट्रपति का चुनाव या राज्यों का प्रतिनिधित्व, हेतु विशेष बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्य विधानमंडलों का अनुसमर्थन चाहिए।
- कोई जनमत संग्रह और संशोधन हेतु कोई अलग निकाय नहीं है; राष्ट्रपति संशोधन विधेयक नहीं लौटा सकता।
इतने संशोधन क्यों
- संविधान में सौ से अधिक बार संशोधन हुआ है।
- अनेक संशोधन तकनीकी या प्रशासनिक हैं, जैसे न्यायाधीशों के वेतन या सीटों की संख्या में परिवर्तन।
- कुछ न्यायपालिका और संसद की अलग-अलग व्याख्याओं से उत्पन्न हुए, जबकि अन्य, जैसे 73वाँ और 74वाँ संशोधन, राजनीतिक सहमति से हुए।
- विवादास्पद संशोधनों में 42वाँ संशोधन (1976) शामिल है, जिसे प्रायः लघु संविधान कहा जाता है, और जिसके अनेक परिवर्तन 44वें संशोधन (1978) से पलटे गए।
मूल संरचना और न्यायिक व्याख्या
- केशवानंद भारती (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है पर उसकी मूल संरचना में नहीं।
- मूल संरचना का भाग माने गए तत्वों में संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, पंथनिरपेक्षता, संघवाद, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक पुनरावलोकन और मौलिक अधिकारों का सार शामिल हैं।
- कठोरता और लचीलेपन के इस संतुलन ने संविधान को स्थिर रहते हुए विकसित होने दिया है।
मुख्य शब्द
- संशोधन
- संविधान में किया गया औपचारिक परिवर्तन
- विशेष बहुमत
- हर सदन में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मत देने वालों का दो-तिहाई
- अनुसमर्थन
- राज्य विधानमंडलों द्वारा संशोधन की स्वीकृति
- मूल संरचना सिद्धांत
- यह सिद्धांत कि संसद संविधान की आवश्यक विशेषताओं में संशोधन नहीं कर सकती
- जीवंत दस्तावेज़
- नई परिस्थितियों के अनुसार विकसित और अनुकूलित होने वाला संविधान
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
विशेष बहुमत क्या है?2 अंक
विशेष बहुमत का अर्थ है कि संशोधन विधेयक संसद के हर सदन में उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित व मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई द्वारा पारित होना चाहिए।
भारतीय संविधान को जीवंत दस्तावेज़ क्यों कहा जाता है?3 अंक
भारतीय संविधान को जीवंत दस्तावेज़ इसलिए कहते हैं क्योंकि इसने अपने मूल मूल्यों को अक्षुण्ण रखते हुए सौ से अधिक संशोधनों और न्यायिक व्याख्या से बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाला है। इसकी संशोधन प्रक्रिया न बहुत कठोर है न बहुत लचीली, और मूल संरचना सिद्धांत ऐसे परिवर्तनों को रोकता है जो इसके सार को नष्ट करें।
भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया और मूल संरचना सिद्धांत का महत्व समझाइए।5 अंक
अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन का प्रावधान करता है, और इसकी तीन विधियाँ हैं। पहली, कुछ प्रावधान साधारण क़ानूनों की तरह संसद के साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं, जैसे नए राज्य बनाना या उनकी सीमाएँ बदलना; ये तकनीकी रूप से अनुच्छेद 368 के बाहर हैं। दूसरी, मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों सहित अधिकांश प्रावधान विशेष बहुमत से संशोधित हो सकते हैं, जिसमें हर सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई चाहिए। तीसरी, संघीय ढाँचे से संबंधित प्रावधान, जैसे राष्ट्रपति का चुनाव, संघ और राज्यों की शक्तियाँ, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व और स्वयं अनुच्छेद 368, हेतु विशेष बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्य विधानमंडलों का अनुसमर्थन चाहिए। संशोधन विधेयक केवल संसद में प्रस्तुत हो सकता है, हर सदन को इसे संयुक्त बैठक के बिना अलग से पारित करना होता है, और राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी होती है। मूल संरचना सिद्धांत केशवानंद भारती मामले (1973) में प्रतिपादित हुआ, जब सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि संसद के पास संविधान संशोधन की व्यापक शक्ति है पर वह इसकी मूल संरचना, जैसे संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, पंथनिरपेक्षता, संघवाद, शक्तियों का पृथक्करण और न्यायिक पुनरावलोकन, नहीं बदल सकती। यह सिद्धांत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संविधान को समय के साथ बदलने देता है और साथ ही इसके मूल मूल्यों को अस्थायी बहुमत द्वारा नष्ट होने से बचाता है, जिससे यह लचीला भी है और स्थिर भी।
त्वरित पुनरावृत्ति
- अनुच्छेद 368: साधारण, विशेष, विशेष + अनुसमर्थन।
- 100 से अधिक संशोधन।
- 42वाँ (1976) और 44वाँ (1978) संशोधन।
- मूल संरचना संशोधन को सीमित करती है।
परीक्षा सुझाव
- संशोधन की तीनों विधियों का, हर एक के एक उदाहरण सहित, चार्ट बनाएँ।
- संबंध याद रखें: केशवानंद भारती (1973) → मूल संरचना।
अभ्यास MCQ
संविधान संशोधन की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में है
- 32
- 356
- 368
- 370
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 368. यह विशेष बहुमत निर्धारित करता है।
प्रायः 'लघु संविधान' कहा जाने वाला संशोधन है
- 24वाँ
- 42वाँ
- 61वाँ
- 73वाँ
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 42वाँ. यह 1976 में पारित हुआ।
बदलती ज़रूरतों के अनुसार ढलने वाले संविधान को कहते हैं
- कठोर दस्तावेज़
- अस्थायी दस्तावेज़
- समाप्त दस्तावेज़
- जीवंत दस्तावेज़
उत्तर देखें
उत्तर: (d) जीवंत दस्तावेज़. यह समय के साथ विकसित होता है।
राष्ट्रपति के चुनाव को प्रभावित करने वाले संशोधन हेतु चाहिए
- विशेष बहुमत और आधे राज्यों का अनुसमर्थन
- केवल विशेष बहुमत
- साधारण बहुमत
- जनमत संग्रह
उत्तर देखें
उत्तर: (a) विशेष बहुमत और आधे राज्यों का अनुसमर्थन. यह संघीय ढाँचे को प्रभावित करता है।
विशेष बहुमत का अर्थ है
- कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मत देने वालों का दो-तिहाई
- उपस्थित सदस्यों का आधा
- सर्वसम्मत मत
- सदस्यों का एक-तिहाई
उत्तर देखें
उत्तर: (a) कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मत देने वालों का दो-तिहाई. यह हर सदन में लागू होता है।
42वें संशोधन के अनेक परिवर्तन किस संशोधन से पलटे गए
- 44वाँ संशोधन
- 52वाँ संशोधन
- 61वाँ संशोधन
- 86वाँ संशोधन
उत्तर देखें
उत्तर: (a) 44वाँ संशोधन. यह 1978 में पारित हुआ।
संशोधन प्रक्रिया के बारे में क्या सत्य नहीं है
- संशोधन केवल संसद में आरंभ हो सकते हैं
- हर संशोधन हेतु जनमत संग्रह होता है
- कुछ को राज्यों का अनुसमर्थन चाहिए
- प्रायः विशेष बहुमत आवश्यक है
उत्तर देखें
उत्तर: (b) हर संशोधन हेतु जनमत संग्रह होता है. भारत में जनमत संग्रह नहीं होता।
मूल संरचना सिद्धांत का अर्थ है कि
- संसद संविधान में बिलकुल संशोधन नहीं कर सकती
- संसद संशोधन कर सकती है पर आवश्यक विशेषताएँ नष्ट नहीं कर सकती
- केवल न्यायालय संशोधन कर सकते हैं
- राज्य सभी संशोधन रोक सकते हैं
उत्तर देखें
उत्तर: (b) संसद संशोधन कर सकती है पर आवश्यक विशेषताएँ नष्ट नहीं कर सकती. यह लचीलेपन और स्थिरता में संतुलन रखता है।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।