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हाइड्रोकार्बन – कक्षा 11 रसायन विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 रसायन विज्ञान, अध्याय 9। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
हाइड्रोकार्बनों में केवल कार्बन और हाइड्रोजन होते हैं। ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और ऐरोमैटिक यौगिक बंधन और अभिक्रियाओं में भिन्न हैं।
ऐलिफ़ैटिक हाइड्रोकार्बन
- ऐल्केन (CₙH₂ₙ₊₂) मुक्त मूलक प्रतिस्थापन और दहन करते हैं; वुर्ट्ज़ अभिक्रिया ऐल्किल हैलाइड जोड़ती है।
- ऐल्कीन (CₙH₂ₙ) इलेक्ट्रॉनस्नेही योगज करते हैं; मार्कोनीकॉफ़ नियम; परॉक्साइड प्रभाव (प्रति-मार्कोनीकॉफ़) केवल HBr के साथ।
- ऐल्काइन (CₙH₂ₙ₋₂); अंतस्थ ऐल्काइन दुर्बल अम्लीय; ओज़ोनी अपघटन द्विबंध की स्थिति बताता है।
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन
- बेंज़ीन: समतलीय, अनुनाद-स्थायी; ऐरोमैटिकता हेतु ह्यूकेल नियम (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन।
- इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन: नाइट्रीकरण, हैलोजनीकरण, सल्फ़ोनीकरण, फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स ऐल्किलीकरण व ऐसिलीकरण।
- निर्देशक प्रभाव: –OH, –CH₃ ऑर्थो/पैरा निर्देशक; –NO₂, –COOH मेटा निर्देशक।
मुख्य शब्द
- मार्कोनीकॉफ़ नियम
- HX योगज में H अधिक हाइड्रोजन वाले कार्बन पर जाता है
- ऐरोमैटिकता
- (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन वाले समतलीय चक्रीय संयुग्मी तंत्रों का अतिरिक्त स्थायित्व
- ओज़ोनी अपघटन
- ऐल्कीन की ओज़ोन से अभिक्रिया फिर Zn/H₂O, जो द्विबंध को तोड़कर दो कार्बोनिल यौगिक देती है और उसकी स्थिति बताती है
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
तीन द्विबंध होने पर भी बेंज़ीन अत्यधिक स्थायी क्यों है?2 अंक
इसके छह π इलेक्ट्रॉन वलय पर विस्थानित (अनुनाद) हैं, जिससे अतिरिक्त स्थायित्व (ऐरोमैटिकता) और समान C–C बंध लंबाइयाँ होती हैं; अतः यह योगज की अपेक्षा प्रतिस्थापन पसंद करता है।
अंतस्थ ऐल्काइन अम्लीय क्यों होते हैं? अभिक्रिया से दिखाइए।3 अंक
एथाइन का C–H हाइड्रोजन sp कार्बन से जुड़ा है, जिसमें 50% s-गुण है और जो अधिक विद्युत ऋणात्मक है, अतः H, H⁺ के रूप में निकल सकता है। HC≡CH + 2Na → NaC≡CNa + H₂ (या NaNH₂ से)।
परॉक्साइड की उपस्थिति और अनुपस्थिति में प्रोपीन पर HBr योगज की क्रियाविधि समझाइए, प्रत्येक का मुख्य उत्पाद सहित।5 अंक
बिना परॉक्साइड (आयनिक, मार्कोनीकॉफ़): H⁺, CH₂ सिरे पर जुड़कर अधिक स्थायी द्वितीयक कार्बधनायन CH₃–C⁺H–CH₃ बनाता है; Br⁻ आक्रमण कर 2-ब्रोमोप्रोपेन देता है। परॉक्साइड सहित (मुक्त मूलक, प्रति-मार्कोनीकॉफ़): परॉक्साइड Br• मूलक बनाता है; Br•, CH₂ पर जुड़कर अधिक स्थायी द्वितीयक मूलक CH₃–C•H–CH₂Br बनाता है, जो HBr से H लेकर 1-ब्रोमोप्रोपेन देता है। परॉक्साइड प्रभाव केवल HBr के साथ होता है, क्योंकि H–Cl बहुत प्रबल है और I• मूलक बहुत कम अभिक्रियाशील।
त्वरित पुनरावृत्ति
- परॉक्साइड प्रभाव केवल HBr के साथ।
- बेंज़ीन योगज की अपेक्षा प्रतिस्थापन पसंद करता है।
- –NO₂ मेटा निर्देशक।
परीक्षा सुझाव
- एथेन के संरूपण: सांतरित ग्रहणी से अधिक स्थायी।
- एथेन के संरूपण (सांतरित, ग्रहणी) स्वतंत्र रूप से बदलते हैं; ऐल्कीनों के ज्यामितीय (समपक्ष–विपक्ष) समावयवी नहीं, क्योंकि C=C घूम नहीं सकता।
अभ्यास MCQ
ऐल्कीन का सामान्य सूत्र है
- CₙH₂ₙ₊₂
- CₙH₂ₙ₋₂
- CₙH₂ₙ
- CₙHₙ
उत्तर देखें
उत्तर: (c) CₙH₂ₙ. एक द्विबंध।
बेंज़ीन मुख्यतः करता है
- योगज
- इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन
- विलोपन
- बहुलकन
उत्तर देखें
उत्तर: (b) इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन. ऐरोमैटिकता बनी रहती है।
प्रोपीन में HBr योगज (बिना परॉक्साइड) से मुख्य उत्पाद है
- 1-ब्रोमोप्रोपेन
- प्रोपेन
- 2-ब्रोमोप्रोपेन
- 1,2-डाइब्रोमोप्रोपेन
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 2-ब्रोमोप्रोपेन. मार्कोनीकॉफ़।
बेंज़ीन में π इलेक्ट्रॉन हैं
- 4
- 2
- 8
- 6
उत्तर देखें
उत्तर: (d) 6. तीन द्विबंध।
कौन ज्यामितीय (समपक्ष–विपक्ष) समावयवता दिखाता है
- प्रोपीन
- ब्यूट-1-ईन
- ब्यूट-2-ईन
- एथीन
उत्तर देखें
उत्तर: (c) ब्यूट-2-ईन. हर द्विबंध कार्बन पर दो भिन्न समूह।
मेटा निर्देशक समूह है
- –OH
- –NO₂
- –CH₃
- –NH₂
उत्तर देखें
उत्तर: (b) –NO₂. इलेक्ट्रॉन-आकर्षी।
प्रति-मार्कोनीकॉफ़ योगज (परॉक्साइड प्रभाव) दिखता है
- HBr के साथ
- HCl के साथ
- HI के साथ
- HF के साथ
उत्तर देखें
उत्तर: (a) HBr के साथ. केवल HBr।
एक ऐल्कीन के ओज़ोनी अपघटन से केवल प्रोपेनोन (ऐसीटोन) मिलता है। ऐल्कीन है
- ब्यूट-2-ईन
- 2,3-डाइमेथिलब्यूट-2-ईन
- प्रोपीन
- 2-मेथिलप्रोपीन
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 2,3-डाइमेथिलब्यूट-2-ईन. सममित, (CH₃)₂C=C(CH₃)₂।
सभी अध्याय: कक्षा 11 रसायन विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।