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भारत में राष्ट्रवाद – कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान, अध्याय 2। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
आधुनिक भारतीय राष्ट्रवाद औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष से बढ़ा। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों ने किसानों, मज़दूरों, आदिवासियों, मध्यम वर्ग और व्यापारी वर्ग को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा, हालाँकि हर समूह ने स्वराज को अपने ढंग से समझा।
प्रथम विश्व युद्ध, ख़िलाफ़त और असहयोग
- युद्ध से कर और क़ीमतें बढ़ीं और जबरन भर्ती हुई, जिससे पूरे भारत में असंतोष फैला।
- गांधीजी के आरंभिक सत्याग्रह चंपारण (1917), खेड़ा (1917) और अहमदाबाद मिल मज़दूरों (1918) के बीच हुए।
- रॉलट एक्ट (1919) ने बिना मुक़दमे के बंदी बनाने की छूट दी; इसके बाद अमृतसर में जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) हुआ।
- ख़िलाफ़त आंदोलन के समर्थन वाला असहयोग आंदोलन नागपुर कांग्रेस (दिसंबर 1920) में स्वीकृत हुआ और चौरी-चौरा की हिंसा (फ़रवरी 1922) के बाद वापस लिया गया।
आंदोलन की अलग-अलग धाराएँ
- शहरों में छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़े, वकीलों ने वकालत छोड़ी और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार हुआ।
- अवध में बाबा रामचंद्र ने तालुकदारों के विरुद्ध किसानों का नेतृत्व किया; आंध्र की गूडेम पहाड़ियों में अल्लूरी सीताराम राजू ने आदिवासी विद्रोह चलाया।
- असम के बागान मज़दूरों के लिए स्वराज का अर्थ स्वतंत्र आवाजाही और अपने गाँव लौटने का अधिकार था।
सविनय अवज्ञा आंदोलन
- साइमन कमीशन (1928) में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसका 'साइमन वापस जाओ' नारे से विरोध हुआ।
- जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर कांग्रेस (दिसंबर 1929) में पूर्ण स्वराज लक्ष्य बना; 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
- गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती से दांडी तक नमक यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक क़ानून तोड़ा।
- गांधी–इरविन समझौते (मार्च 1931) से आंदोलन रुका; पूना पैक्ट (1932) ने दलित वर्गों को सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में आरक्षित सीटें दीं।
सामूहिक अपनेपन का भाव
- अबनींद्रनाथ टैगोर की भारत माता की छवि, लोककथाएँ, वंदे मातरम् जैसे गीत और तिरंगे झंडे ने साझा पहचान बनाई।
- भारत के गौरवशाली अतीत को दिखाने वाली इतिहास की पुनर्व्याख्या ने लोगों में अपनी विरासत पर गर्व जगाया, हालाँकि कभी-कभी इसमें अन्य समुदाय छूट जाते थे।
मुख्य शब्द
- सत्याग्रह
- सत्य और अहिंसा पर आधारित गांधीजी की जन-आंदोलन की पद्धति
- ख़िलाफ़त आंदोलन
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑटोमन ख़लीफ़ा की रक्षा हेतु अली बंधुओं का आंदोलन
- पूर्ण स्वराज
- पूर्ण स्वतंत्रता, जिसे 1929 की लाहौर कांग्रेस में लक्ष्य घोषित किया गया
- बेगार
- बिना पारिश्रमिक के जबरन श्रम
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने हेतु नमक को क्यों चुना?2 अंक
नमक अमीर-ग़रीब सभी उपयोग करते थे और यह भोजन की सबसे आवश्यक वस्तुओं में था। नमक पर कर और उसके उत्पादन पर सरकारी एकाधिकार सबको प्रभावित करता था, इसलिए नमक क़ानून तोड़ना समाज के सभी वर्गों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक कर सकता था।
भारत में साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?3 अंक
साइमन कमीशन (1928) संवैधानिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली देखकर बदलाव सुझाने हेतु बना था। इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए भारतीयों को लगा कि अपना भविष्य तय करने का उनका अधिकार अनदेखा हुआ। हर जगह काले झंडों और 'साइमन वापस जाओ' नारे से इसका स्वागत हुआ और कांग्रेस व मुस्लिम लीग सहित सभी दल विरोध में शामिल हुए।
असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी समझाइए।5 अंक
शहरों में मध्यम वर्ग शामिल हुआ: हज़ारों छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़े, शिक्षकों ने त्यागपत्र दिए, वकीलों ने वकालत छोड़ी और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार हुआ, जिससे भारतीय वस्त्र उत्पादन बढ़ा। अवध के ग्रामीण क्षेत्र में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसानों ने ऊँचे लगान और बेगार माँगने वाले तालुकदारों व ज़मींदारों का विरोध किया। आंध्र प्रदेश की गूडेम पहाड़ियों में अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में आदिवासियों ने गुरिल्ला संघर्ष शुरू किया, क्योंकि वन क़ानूनों ने उन्हें पशु चराने और ईंधन लकड़ी इकट्ठा करने से रोक दिया था। असम के बागान मज़दूरों ने स्वराज को बागानों में आने-जाने की स्वतंत्रता समझा और अपने गाँव लौटने का प्रयास किया। हर समूह ने स्वराज को अपने ढंग से समझा, पर मिलकर उन्होंने इसे जन आंदोलन बना दिया।
त्वरित पुनरावृत्ति
- रॉलट एक्ट 1919 → जलियाँवाला बाग 13 अप्रैल 1919।
- असहयोग 1920–22, चौरी-चौरा के बाद वापस।
- लाहौर 1929 में पूर्ण स्वराज; दांडी यात्रा 1930।
- पूना पैक्ट 1932, गांधी और अंबेडकर के बीच।
परीक्षा सुझाव
- तिथि-रेखा तैयार करें: 1917 चंपारण, 1919 रॉलट व जलियाँवाला, 1920 असहयोग, 1922 चौरी-चौरा, 1928 साइमन, 1929 लाहौर, 1930 दांडी, 1931 गांधी–इरविन, 1932 पूना पैक्ट।
- 'विभिन्न वर्गों की भागीदारी' वाले प्रश्न में किसान, आदिवासी, मज़दूर, व्यापारी और महिलाओं पर एक-एक बिंदु लिखें।
अभ्यास MCQ
जलियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ
- 1917 में
- 1919 में
- 1922 में
- 1930 में
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 1919 में. यह 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ।
नमक यात्रा कहाँ समाप्त हुई
- साबरमती
- चौरी-चौरा
- चंपारण
- दांडी
उत्तर देखें
उत्तर: (d) दांडी. गांधीजी ने 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक क़ानून तोड़ा।
भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह कहाँ हुआ
- खेड़ा
- चंपारण
- अहमदाबाद
- बारडोली
उत्तर देखें
उत्तर: (b) चंपारण. 1917 में वे नील किसानों के समर्थन में चंपारण गए।
असहयोग आंदोलन किस कारण वापस लिया गया
- चौरी-चौरा घटना
- साइमन कमीशन
- पूना पैक्ट
- रॉलट एक्ट
उत्तर देखें
उत्तर: (a) चौरी-चौरा घटना. 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक झड़प के बाद गांधीजी ने इसे रोका।
पूर्ण स्वराज को लक्ष्य किस कांग्रेस अधिवेशन में घोषित किया गया
- नागपुर 1920
- कलकत्ता 1928
- लाहौर 1929
- कराची 1931
उत्तर देखें
उत्तर: (c) लाहौर 1929. दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की।
आंध्र प्रदेश की गूडेम पहाड़ियों में आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया
- बाबा रामचंद्र
- सरदार पटेल
- बिरसा मुंडा
- अल्लूरी सीताराम राजू
उत्तर देखें
उत्तर: (d) अल्लूरी सीताराम राजू. उन्होंने 1920 के दशक की शुरुआत में गुरिल्ला आंदोलन चलाया।
1932 का पूना पैक्ट
- दलितों को पृथक निर्वाचक मंडल देता था
- सविनय अवज्ञा आंदोलन समाप्त करता था
- दलित वर्गों को सामान्य निर्वाचक मंडल में आरक्षित सीटें देता था
- स्वराज पार्टी बनाता था
उत्तर देखें
उत्तर: (c) दलित वर्गों को सामान्य निर्वाचक मंडल में आरक्षित सीटें देता था. अंबेडकर ने पृथक निर्वाचक मंडल की जगह आरक्षित सीटें स्वीकार कीं।
रॉलट एक्ट का विरोध मुख्यतः इसलिए हुआ क्योंकि इसने
- भू-राजस्व बढ़ाया
- बंगाल का विभाजन किया
- नमक बनाने पर रोक लगाई
- राजनीतिक क़ैदियों को बिना मुक़दमे बंदी रखने की अनुमति दी
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उत्तर: (d) राजनीतिक क़ैदियों को बिना मुक़दमे बंदी रखने की अनुमति दी. इसने सरकार को राजनीतिक गतिविधियाँ दबाने की असीम शक्ति दी।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।