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मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार – कक्षा 10 विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 10 विज्ञान, अध्याय 10। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
आँख समायोज्य लेंस वाले कैमरे जैसी है। सामान्य दृष्टि दोष लेंसों से ठीक होते हैं, और प्रकाश के अपवर्तन व प्रकीर्णन से इंद्रधनुष, तारों का टिमटिमाना और नीला आकाश समझ आता है।
आँख
- कॉर्निया और लेंस प्रकाश को दृष्टिपटल पर फ़ोकस करते हैं; परितारिका पुतली का आकार नियंत्रित करती है।
- समंजन क्षमता: पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की फ़ोकस दूरी बदलती हैं।
- सामान्य आँख का निकट बिंदु 25 cm; दूर बिंदु अनंत।
दोष
- निकट-दृष्टि दोष (मायोपिया): प्रतिबिंब दृष्टिपटल के आगे; अवतल लेंस से सुधार।
- दूर-दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया): प्रतिबिंब पीछे; उत्तल लेंस से सुधार।
- जरा-दूरदृष्टिता (बुढ़ापा): द्विफ़ोकसी लेंस; मोतियाबिंद: धुँधला लेंस, शल्य से उपचार।
वायुमंडलीय प्रभाव
- विक्षेपण: प्रिज़्म श्वेत प्रकाश को VIBGYOR में बाँटता है; बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम मुड़ता है।
- इंद्रधनुष: वर्षा की बूँदों में विक्षेपण + अपवर्तन + आंतरिक परावर्तन।
- तारों का टिमटिमाना और अग्रिम सूर्योदय वायुमंडलीय अपवर्तन से; नीला आकाश और लाल सूर्यास्त प्रकीर्णन से (टिंडल प्रभाव)।
मुख्य शब्द
- समंजन
- निकट और दूर की वस्तुओं के लिए आँख की फ़ोकस दूरी बदलने की क्षमता
- विक्षेपण
- श्वेत प्रकाश का रंगों में बँटना
- प्रकीर्णन
- पथ में छोटे कणों द्वारा प्रकाश का फैलना
सूत्र
- स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी = 25 cm
- मुड़ने का क्रम: बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?2 अंक
वायु के अणु छोटी तरंगदैर्ध्य (नीले) को लंबी (लाल) की तुलना में बहुत अधिक प्रकीर्णित करते हैं। यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश सभी दिशाओं से आँख तक पहुँचता है, इसलिए आकाश नीला दिखता है।
निकट-दृष्टि दोष क्या है? दो कारण और उसका सुधार बताइए।3 अंक
इसमें व्यक्ति पास की वस्तुएँ स्पष्ट देखता है पर दूर की नहीं; प्रतिबिंब दृष्टिपटल के आगे बनता है। कारण: नेत्रगोलक का लंबा होना या नेत्र लेंस की अधिक वक्रता। उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस से सुधार होता है।
इंद्रधनुष बनना समझाइए और बताइए कि तारे क्यों टिमटिमाते हैं पर ग्रह नहीं।5 अंक
सूर्य का प्रकाश वर्षा की बूँदों में प्रवेश कर अपवर्तित, आंतरिक परावर्तित और फिर अपवर्तित होता है; विक्षेपण श्वेत प्रकाश को सात रंगों में बाँटता है, जो सूर्य की विपरीत दिशा में दिखते हैं। तारों का प्रकाश बदलते अपवर्तनांक वाली वायु परतों से गुज़रता है; तारा बिंदु स्रोत होने से आँख तक पहुँचने वाला प्रकाश घटता-बढ़ता है। ग्रह बहुत निकट हैं और विस्तृत स्रोत (अनेक बिंदु) जैसे हैं, इसलिए परिवर्तन औसत हो जाते हैं और वे नहीं टिमटिमाते।
त्वरित पुनरावृत्ति
- निकट-दृष्टि → अवतल लेंस; दूर-दृष्टि → उत्तल लेंस।
- छोटी तरंगदैर्घ्य के प्रकीर्णन से आकाश नीला।
- इंद्रधनुष सूर्य की विपरीत दिशा में दिखता है।
परीक्षा सुझाव
- ख़तरे के संकेत लाल होते हैं क्योंकि लाल का प्रकीर्णन सबसे कम है और वह कोहरे में सबसे दूर जाता है।
- ग्रह विस्तृत स्रोत हैं, इसलिए टिमटिमाते नहीं।
अभ्यास MCQ
आँख का वह भाग जिस पर प्रतिबिंब बनता है
- दृष्टिपटल
- परितारिका
- कॉर्निया
- पुतली
उत्तर देखें
उत्तर: (a) दृष्टिपटल. दृष्टिपटल (रेटिना)।
निकट-दृष्टि दोष ठीक होता है
- अवतल लेंस से
- उत्तल लेंस से
- केवल द्विफ़ोकसी से
- बेलनाकार लेंस से
उत्तर देखें
उत्तर: (a) अवतल लेंस से. अवतल लेंस किरणें फैलाता है।
प्रिज़्म में सबसे कम मुड़ने वाला रंग है
- लाल
- नीला
- हरा
- बैंगनी
उत्तर देखें
उत्तर: (a) लाल. लाल।
सामान्य आँख का निकट बिंदु है
- 25 m
- 2.5 cm
- 25 cm
- अनंत
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 25 cm. 25 cm।
आकाश नीला दिखता है
- परावर्तन से
- अपवर्तन से
- केवल विक्षेपण से
- प्रकीर्णन से
उत्तर देखें
उत्तर: (d) प्रकीर्णन से. नीला प्रकाश अधिक प्रकीर्णित होता है।
तारे टिमटिमाते हैं
- परावर्तन से
- प्रकीर्णन से
- वायुमंडलीय अपवर्तन से
- विक्षेपण से
उत्तर देखें
उत्तर: (c) वायुमंडलीय अपवर्तन से. तारों के प्रकाश का बदलता अपवर्तन।
ख़तरे के संकेत लाल क्यों होते हैं?
- लाल सबसे चमकीला है
- लाल सबसे अधिक मुड़ता है
- कोहरे व धुएँ में लाल का प्रकीर्णन सबसे कम है
- लाल सबसे सस्ता है
उत्तर देखें
उत्तर: (c) कोहरे व धुएँ में लाल का प्रकीर्णन सबसे कम है. सबसे लंबी दृश्य तरंगदैर्घ्य कम प्रकीर्णित होती है।
सूर्योदय लगभग 2 मिनट पहले दिखता है
- प्रकीर्णन से
- विक्षेपण से
- वायुमंडलीय अपवर्तन से
- टिंडल प्रभाव से
उत्तर देखें
उत्तर: (c) वायुमंडलीय अपवर्तन से. सूर्य के क्षितिज से ऊपर आने से पहले ही प्रकाश मुड़कर पहुँचता है।
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।