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पर्याय, विलोम, अनेकार्थी और तत्सम-तद्भव
Hindi — Subject Knowledge (130 marks) · पर्याय, विलोम, अनेकार्थी और तत्सम-तद्भव
Useful for: OSSC RHT — Regular High School Teacher
Overview
शब्द-भंडार में पर्याय (समान अर्थ), विलोम (विपरीत अर्थ), अनेकार्थी (अनेक अर्थ) और तत्सम-तद्भव शब्दों की पहचान आती है।
Key points
- पर्याय: जल — नीर, वारि, अंबु; सूर्य — दिनकर, भास्कर, रवि।
- विलोम: आदि — अंत; उन्नति — अवनति; आस्तिक — नास्तिक।
- अनेकार्थी: कर — हाथ, किरण, टैक्स; अंबर — आकाश, वस्त्र।
- तत्सम-तद्भव: क्षेत्र — खेत, अग्नि — आग, दुग्ध — दूध, कर्म — काम।
- पर्याय पूरी तरह समान नहीं होते; प्रयोग का संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।
- शब्द-भंडार पढ़ने और प्रयोग से बढ़ता है।
Explanation
- उपसर्ग से विलोम बनते हैं (मान — अपमान)।
- अनेकार्थी शब्द का अर्थ वाक्य से तय होता है।
- तत्सम शब्द संस्कृत से अपरिवर्तित आते हैं।
- शब्द-कोश का प्रयोग सिखाएँ।
- शब्द-खेल शब्दावली बढ़ाते हैं।
Step by step
- प्रश्न में पूछे गए नियम, भेद या रचना को पहचानें।
- उदाहरण का विश्लेषण करें।
- विकल्पों को नियम से मिलाकर सही उत्तर चुनें।
Examples
- "कर" — "उसने कर जोड़े" में अर्थ हाथ।
- "आग" का तत्सम रूप → अग्नि।
- "उन्नति" का विलोम → अवनति।
Traps and advanced points
- Trap: तत्सम और तद्भव उलटना।
- Trap: अनेकार्थी में संदर्भ की अनदेखी।
- Trap: पर्याय को हर जगह समान मानना।
Quick revision
- पर्याय, विलोम, अनेकार्थी।
- तत्सम → तद्भव उदाहरण।
- संदर्भ से अर्थ।
Practice MCQs
‘चौराहा’ में कौन-सा समास है?
- द्वंद्व समास
- तत्पुरुष समास
- द्विगु समास
- कर्मधारय समास
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Answer: (c) द्विगु समास. ‘चौराहा’ का विग्रह ‘चार राहों का समूह’ है, इसलिए यह द्विगु समास है।
‘विजय’ का विलोम शब्द क्या है?
- पराजय
- हानि
- दोष
- निर्जीव
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Answer: (a) पराजय. ‘विजय’ का विलोम ‘पराजय’ है।
‘मनोहर’ (मनः + हर) में कौन-सी संधि है?
- विसर्ग संधि
- वृद्धि संधि
- अयादि संधि
- व्यंजन संधि
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Answer: (a) विसर्ग संधि. ‘मनोहर’ = मनः + हर; यहाँ विसर्ग संधि है।
"वह", "तुम", "मैं" किस शब्द-भेद के उदाहरण हैं?
- संज्ञा
- सर्वनाम
- विशेषण
- अव्यय
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Answer: (b) सर्वनाम. ये शब्द संज्ञा के स्थान पर आते हैं, इसलिए सर्वनाम हैं।
‘पठन्ति’ (पठ् धातुः, लट्लकारः) इति पदे कः पुरुषः किं वचनं च?
- उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
- प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
- उत्तमपुरुषः, द्विवचनम्
- प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
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Answer: (b) प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्. ‘पठन्ति’ — प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्।
‘अवदत्’ (वद् धातुः) इति पदे कः लकारः?
- लृट्लकारः (भविष्यत्कालः)
- लट्लकारः (वर्तमानकालः)
- लङ्लकारः (भूतकालः)
- विधिलिङ्लकारः (विध्यर्थः)
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Answer: (c) लङ्लकारः (भूतकालः). ‘अवदत्’ इति वद् धातोः लङ्लकारः (भूतकालः) प्रथमपुरुष-एकवचनरूपम्।
‘सूर्य’ का पर्यायवाची शब्द कौन-सा है?
- कनक
- नारी
- दिनकर
- गृह
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Answer: (c) दिनकर. ‘दिनकर’, ‘सूर्य’ का पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द है।
ध्वनिनियमेन समीपस्थयोः वर्णयोः अथवा शब्दयोः संयोगः कः व्याकरणिकः व्यापारः कथ्यते?
- सन्धि
- समास
- कारक
- लकार
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Answer: (a) सन्धि. सन्धिः वर्णयोः अथवा शब्दसीमायां ध्वनिनियमेन भवति यः संयोगः, तं बोधयति।
‘जगन्नाथ’ (जगत् + नाथ) में कौन-सी संधि है?
- विसर्ग संधि
- व्यंजन संधि
- गुण संधि
- यण संधि
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Answer: (b) व्यंजन संधि. ‘जगन्नाथ’ = जगत् + नाथ; यहाँ व्यंजन संधि है।
‘गच्छथः’ (गम् धातुः, लट्लकारः) इति पदे कः पुरुषः किं वचनं च?
- मध्यमपुरुषः, द्विवचनम्
- प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
- उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
- उत्तमपुरुषः, एकवचनम्
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Answer: (a) मध्यमपुरुषः, द्विवचनम्. ‘गच्छथः’ — मध्यमपुरुषः, द्विवचनम्।
‘गच्छामि’ (गम् धातुः, लट्लकारः) इति पदे कः पुरुषः किं वचनं च?
- मध्यमपुरुषः, एकवचनम्
- उत्तमपुरुषः, एकवचनम्
- उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
- प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
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Answer: (b) उत्तमपुरुषः, एकवचनम्. ‘गच्छामि’ — उत्तमपुरुषः, एकवचनम्।
अलम् (निषेधार्थे) योगे का विभक्तिः भवति?
- पञ्चमी विभक्तिः
- द्वितीया विभक्तिः
- चतुर्थी विभक्तिः
- तृतीया विभक्तिः
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Answer: (d) तृतीया विभक्तिः. अलम् (निषेधार्थे) योगे तृतीया विभक्तिः भवति। उदाहरणम् — अलं विवादेन।
संस्कृते क्रियापदानां काल-भावादि व्यक्तुं कः व्याकरणवर्गः प्रयुज्यते?
- सन्धि
- लकार
- समास
- विभक्ति
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Answer: (b) लकार. लकाराः क्रियापदानां कालं भावं च व्यक्तुं प्रयुज्यन्ते।
द्वयोः अथवा अधिकानां सम्बन्धितपदानां संक्षिप्तरूपेण यः योगः भवति, सः कः?
- सन्धि
- विभक्ति
- लकार
- समास
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Answer: (d) समास. समासः सम्बन्धितपदानां अर्थसम्बन्धं संक्षिप्य एकं समस्तपदं निर्माति।
‘पठेत्’ (पठ् धातुः) इति पदे कः लकारः?
- लोट्लकारः (आज्ञार्थः)
- लृट्लकारः (भविष्यत्कालः)
- लङ्लकारः (भूतकालः)
- विधिलिङ्लकारः (विध्यर्थः)
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Answer: (d) विधिलिङ्लकारः (विध्यर्थः). ‘पठेत्’ इति पठ् धातोः विधिलिङ्लकारः (विध्यर्थः) प्रथमपुरुष-एकवचनरूपम्।
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