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पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन – कक्षा 12 राजनीति विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ

NCERT कक्षा 12 राजनीति विज्ञान, अध्याय 6। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।

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अध्याय का सार

1960 के दशक से पर्यावरण मुद्दे विश्व राजनीति का प्रमुख भाग बने, जब प्रदूषण, वन कटाई, ओज़ोन क्षरण और जलवायु परिवर्तन वैश्विक समस्याएँ माने गए। रियो का पृथ्वी सम्मेलन (1992) और क्योटो प्रोटोकॉल (1997) ऐतिहासिक कदम थे। विकसित और विकासशील देश उत्तरदायित्व पर भिन्न मत रखते हैं, जिससे साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियों का सिद्धांत बना। मूलनिवासी लोग और वैश्विक साझी संपदा भी केंद्रीय चिंताएँ हैं।

वैश्विक राजनीति में पर्यावरण

  • चिंताओं में घटती कृषि योग्य भूमि, जल की कमी, वनों और जैव विविधता की हानि, ओज़ोन परत क्षरण और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
  • 1992 में रियो डी जनेरियो में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (पृथ्वी सम्मेलन) ने जलवायु और जैव विविधता अभिसमय और सतत विकास पर एजेंडा 21 दिए।
  • वैश्विक साझी संपदा किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र हैं, जैसे वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र तल और बाह्य अंतरिक्ष, जिनके साझे प्रबंधन की आवश्यकता है।

साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियाँ

  • विकसित देशों ने अधिकांश ऐतिहासिक उत्सर्जन किया, इसलिए विकासशील देश तर्क देते हैं कि उन्हें अधिक उत्तरदायित्व उठाना चाहिए।
  • क्योटो प्रोटोकॉल (1997) ने विकसित देशों हेतु बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य तय किए; पेरिस समझौते (2015) ने सभी देशों से राष्ट्रीय योगदान तय करने को कहा।
  • भारत इस सिद्धांत का समर्थन करता, कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन पर बल देता और नवीकरणीय ऊर्जा व सतत विकास अपनाता है।

संसाधन भू-राजनीति और मूलनिवासी लोग

  • तेल, जल और खनिजों जैसे संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा ने संघर्ष कराए और विदेश नीति को आकार दिया है।
  • मूलनिवासी लोग अक्सर बाँधों, खनन और वन दोहन के कारण भूमि और आजीविका खोते हैं; वे अधिकार और मान्यता माँगते हैं।
  • भारत के चिपको आंदोलन जैसे पर्यावरण आंदोलन पर्यावरण क्षति के विरुद्ध स्थानीय प्रतिरोध दिखाते हैं।

मुख्य शब्द

वैश्विक साझी संपदा
किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र और संसाधन
पृथ्वी सम्मेलन
रियो डी जनेरियो में 1992 का पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन
क्योटो प्रोटोकॉल
विकसित देशों हेतु उत्सर्जन लक्ष्य तय करने वाला 1997 का समझौता
साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियाँ
यह सिद्धांत कि सभी राज्य पर्यावरण का उत्तरदायित्व साझा करते हैं पर भिन्न मात्रा में
सतत विकास
भावी पीढ़ियों को हानि पहुँचाए बिना वर्तमान आवश्यकताएँ पूरी करने वाला विकास

उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न

वैश्विक साझी संपदा क्या है? उदाहरण दीजिए।2 अंक

वैश्विक साझी संपदा वे क्षेत्र और संसाधन हैं जो किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और सबके साझे हैं, जैसे पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र तल और बाह्य अंतरिक्ष।

साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियों का सिद्धांत समझाइए।3 अंक

इस सिद्धांत का अर्थ है कि सभी देश पर्यावरण की रक्षा का उत्तरदायित्व साझा करते हैं, पर विकसित देशों को, जिन्होंने अधिकांश ऐतिहासिक उत्सर्जन किया और जिनके पास अधिक संसाधन हैं, अधिक उत्तरदायित्व उठाना और विकासशील देशों की वित्त और तकनीक से मदद करनी चाहिए। इसे 1992 में रियो में स्वीकार किया गया और इसने क्योटो प्रोटोकॉल का मार्गदर्शन किया।

पर्यावरण संबंधी चिंताएँ वैश्विक राजनीति का भाग क्यों बनी हैं? प्रमुख समझौतों और भारत के पक्ष के संदर्भ में समझाइए।5 अंक

पर्यावरण चिंताएँ वैश्विक राजनीति में इसलिए आईं क्योंकि प्रदूषण, वन कटाई, जैव विविधता की हानि, ओज़ोन क्षरण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ राष्ट्रीय सीमाएँ पार करती हैं और कोई एक देश उन्हें हल नहीं कर सकता। 1960 के दशक से अध्ययनों और आंदोलनों ने इन ख़तरों की ओर ध्यान खींचा। 1992 में रियो डी जनेरियो में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, जिसे पृथ्वी सम्मेलन कहते हैं, ने जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर अभिसमय और सतत विकास हेतु एजेंडा 21 दिए। 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल ने विकसित देशों हेतु ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने के बाध्यकारी लक्ष्य तय किए, और 2015 के पेरिस समझौते ने सभी देशों से राष्ट्रीय रूप से निर्धारित योगदान तय करने को कहा। मुख्य बहस विकसित और विकासशील देशों के बीच है: विकासशील देश तर्क देते हैं कि विकसित देशों ने अधिकांश ऐतिहासिक उत्सर्जन किया और उन्हें अधिक उत्तरदायित्व उठाना चाहिए, जबकि विकसित देश चाहते हैं कि सभी प्रमुख उत्सर्जक कार्रवाई करें। इससे साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियों का सिद्धांत बना। भारत इस सिद्धांत का समर्थन करता है, अपने कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन की ओर संकेत करता है, और तर्क देता है कि ग़रीबों की विकास आवश्यकताओं की रक्षा होनी चाहिए, साथ ही वह नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता का विस्तार कर रहा है। वायुमंडल और अंटार्कटिका जैसी वैश्विक साझी संपदा, संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा, और मूलनिवासी लोगों के अधिकार भी पर्यावरण को राजनीतिक मुद्दा बनाते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • 1960 के दशक से वैश्विक पर्यावरण चिंताएँ।
  • पृथ्वी सम्मेलन रियो 1992; एजेंडा 21।
  • साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियाँ; क्योटो, पेरिस।
  • संसाधन संघर्ष; मूलनिवासी लोग; आंदोलन।

परीक्षा सुझाव

  • याद रखें: रियो 1992, क्योटो 1997, पेरिस 2015।
  • वैश्विक साझी संपदा के दो उदाहरण दें।

अभ्यास MCQ

  1. 1992 में पृथ्वी सम्मेलन कहाँ हुआ

    1. क्योटो
    2. रियो डी जनेरियो
    3. पेरिस
    4. नई दिल्ली
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) रियो डी जनेरियो. यह पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन था।

  2. अंटार्कटिका और बाह्य अंतरिक्ष किसके उदाहरण हैं

    1. वैश्विक साझी संपदा
    2. राष्ट्रीय संसाधन
    3. निजी संपत्ति
    4. उपनिवेश
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) वैश्विक साझी संपदा. वे किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

  3. क्योटो प्रोटोकॉल कब अपनाया गया

    1. 1987
    2. 1992
    3. 1997
    4. 2015
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) 1997. इसने विकसित देशों हेतु लक्ष्य तय किए।

  4. विकसित देशों को उत्सर्जन का अधिक उत्तरदायित्व उठाना चाहिए, यह सिद्धांत है

    1. केवल प्रदूषक भुगतान
    2. कोई उत्तरदायित्व नहीं
    3. सबके बराबर हिस्से
    4. साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियाँ
    उत्तर देखें

    उत्तर: (d) साझी पर विभेदित ज़िम्मेदारियाँ. यह जलवायु वार्ताओं में स्वीकृत है।

  5. पेरिस समझौता कब अपनाया गया

    1. 1997
    2. 2005
    3. 2015
    4. 2020
    उत्तर देखें

    उत्तर: (c) 2015. सभी देशों ने राष्ट्रीय योगदान तय किए।

  6. चिपको आंदोलन किसकी रक्षा से संबंधित था

    1. नदियाँ
    2. वन
    3. केवल वन्यजीव अभयारण्य
    4. शहरी उद्यान
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) वन. ग्रामीणों ने पेड़ों से चिपककर उन्हें बचाया।

  7. विकासशील देश ऐतिहासिक उत्सर्जन पर बल क्यों देते हैं

    1. उन्होंने सबसे अधिक उत्सर्जन किया
    2. विकसित देशों ने अधिकांश पिछला उत्सर्जन किया और उन्हें अधिक करना चाहिए
    3. उत्सर्जन हानिकारक नहीं
    4. वे विकास रोकना चाहते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: (b) विकसित देशों ने अधिकांश पिछला उत्सर्जन किया और उन्हें अधिक करना चाहिए. उत्तरदायित्व योगदान के अनुसार होता है।

  8. वैश्विक साझी संपदा के बारे में कौन-सा कथन सही है

    1. उन्हें सहयोगात्मक अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन चाहिए
    2. वे एक देश की हैं
    3. उन्हें किसी नियम की आवश्यकता नहीं
    4. वे सदा अप्रदूषित रहती हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: (a) उन्हें सहयोगात्मक अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन चाहिए. साझे संसाधनों हेतु साझे नियम चाहिए।

सभी अध्याय: कक्षा 12 राजनीति विज्ञान

यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।