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खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – कक्षा 12 भूगोल नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 भूगोल, अध्याय 13। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
खनिज निश्चित रासायनिक और भौतिक गुणों वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह और अलौह), अधात्विक और ऊर्जा खनिजों में वर्गीकृत हैं। भारत में लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट, अभ्रक और कोयले के समृद्ध निक्षेप हैं, जो मुख्यतः उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश (झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़), दक्षिण-पश्चिमी पठार और उत्तर-पश्चिम में केंद्रित हैं। ऊर्जा संसाधनों में परंपरागत स्रोत (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल और परमाणु) और गैर-परंपरागत स्रोत (सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव ऊर्जा) शामिल हैं।
खनिज और उनका वितरण
- खनिज पेटियाँ: उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश (छोटानागपुर, ओडिशा पठार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़) सबसे समृद्ध है, जिसमें लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज़, बॉक्साइट और अभ्रक हैं; दक्षिण-पश्चिमी पठार (कर्नाटक, गोवा) में लौह अयस्क और बॉक्साइट; उत्तर-पश्चिमी प्रदेश (राजस्थान, गुजरात) में ताँबा, जस्ता और पेट्रोलियम हैं।
- लौह अयस्क (हेमेटाइट और मैग्नेटाइट) ओडिशा (क्योंझर, सुंदरगढ़, मयूरभंज), झारखंड, छत्तीसगढ़ (बैलाडीला), कर्नाटक और गोवा में; मैंगनीज़ ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में; बॉक्साइट ओडिशा (कोरापुट में पंचपटमाली), झारखंड और गुजरात में मिलता है।
- अभ्रक झारखंड, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में; ताँबा राजस्थान (खेतड़ी) और झारखंड (सिंहभूम) में मिलता है।
ऊर्जा संसाधन
- तापीय विद्युत का मुख्य स्रोत कोयला मुख्यतः झारखंड (झरिया), ओडिशा (तालचेर), छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल (रानीगंज) की गोंडवाना द्रोणियों में मिलता है; लिग्नाइट तमिलनाडु के नेवेली में मिलता है।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस असम (डिगबोई), गुजरात (अंकलेश्वर), मुंबई हाई अपतटीय क्षेत्र और कृष्णा–गोदावरी द्रोणी में मिलते हैं।
- परमाणु ऊर्जा यूरेनियम (झारखंड में जादूगोड़ा) और थोरियम (केरल की मोनाज़ाइट बालू) का प्रयोग करती है; गैर-परंपरागत स्रोतों में सौर (राजस्थान, गुजरात), पवन (तमिलनाडु, गुजरात), ज्वारीय, भूतापीय और जैव ऊर्जा शामिल हैं, जो नवीकरणीय और स्वच्छ हैं।
मुख्य शब्द
- लौह खनिज
- लोहा युक्त धात्विक खनिज
- अलौह खनिज
- बिना लोहे के धात्विक खनिज, जैसे ताँबा और बॉक्साइट
- गोंडवाना कोयला
- प्रायद्वीपीय नदी घाटियों में मिलने वाले पुराने कोयला निक्षेप
- परंपरागत ऊर्जा
- कोयला, तेल और गैस जैसे पारंपरिक स्रोत
- गैर-परंपरागत ऊर्जा
- सौर, पवन और ज्वारीय ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों में अंतर कीजिए।2 अंक
कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और जलावन लकड़ी जैसे परंपरागत स्रोत लंबे समय से प्रयुक्त हैं और अधिकांशतः समाप्य व प्रदूषणकारी हैं। सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव ऊर्जा जैसे गैर-परंपरागत स्रोत नवीकरणीय, स्वच्छ और बढ़ते महत्व के हैं।
खनिजों हेतु ओडिशा क्यों महत्वपूर्ण है?3 अंक
ओडिशा में लौह अयस्क (क्योंझर, सुंदरगढ़, मयूरभंज), बॉक्साइट (कोरापुट में पंचपटमाली), कोयला (तालचेर, इब घाटी), मैंगनीज़ और क्रोमाइट (सुकिंदा) के बड़े निक्षेप हैं। ये राज्य में इस्पात, एल्युमिनियम और तापीय विद्युत उद्योगों को सहारा देते हैं।
भारत में कोयले और पेट्रोलियम के वितरण का वर्णन कीजिए।5 अंक
भारत में तापीय विद्युत हेतु कोयला सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। भारत का लगभग 80% कोयला बिटुमिनस है, जो लगभग 20 करोड़ वर्ष पुरानी गोंडवाना संरचनाओं में मिलता है, मुख्यतः दामोदर (झारखंड और पश्चिम बंगाल में झरिया, रानीगंज, बोकारो, गिरिडीह), महानदी (ओडिशा में तालचेर और इब घाटी), सोन, गोदावरी (तेलंगाना में सिंगरेनी) और वर्धा की नदी घाटियों में। छत्तीसगढ़ (कोरबा) और मध्य प्रदेश (सिंगरौली) में भी बड़े भंडार हैं। नवीन तृतीयक कोयला असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में मिलता है। निम्न श्रेणी का कोयला लिग्नाइट तमिलनाडु के नेवेली और राजस्थान व गुजरात में खनन होता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तृतीयक युग की अवसादी चट्टानों में मिलते हैं। असम में डिगबोई, नाहरकटिया और मोरान सहित सबसे पुराने तेल क्षेत्र हैं; गुजरात में अंकलेश्वर, कलोल और मेहसाणा हैं; मुंबई से लगभग 160 किमी दूर अपतटीय क्षेत्र मुंबई हाई प्रमुख उत्पादक है; और पूर्वी तट पर कृष्णा–गोदावरी और कावेरी द्रोणियों में तेल और गैस हैं। प्राकृतिक गैस तेल के साथ भी मिलती है और HVJ जैसी पाइपलाइनों से ले जाई जाती है। भारत अपनी आवश्यकता का केवल एक भाग उत्पन्न करता है और बहुत अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत महत्वपूर्ण हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- खनिजों का वर्गीकरण।
- खनिज पेटियाँ; ओडिशा और झारखंड सबसे समृद्ध।
- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु।
- गैर-परंपरागत ऊर्जा; संरक्षण।
परीक्षा सुझाव
- लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और पेट्रोलियम की प्रमुख खानें मानचित्र पर अंकित करें।
- ओडिशा के खनिज नोट करें: लौह अयस्क, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज़, क्रोमाइट।
अभ्यास MCQ
बॉक्साइट किसका अयस्क है
- लोहा
- एल्युमिनियम
- ताँबा
- जस्ता
उत्तर देखें
उत्तर: (b) एल्युमिनियम. ओडिशा में इसके बड़े निक्षेप हैं।
डिगबोई तेल क्षेत्र कहाँ है
- गुजरात
- राजस्थान
- असम
- महाराष्ट्र
उत्तर देखें
उत्तर: (c) असम. यह भारत के सबसे पुराने क्षेत्रों में से एक है।
सौर और पवन ऊर्जा हैं
- गैर-परंपरागत स्रोत
- परंपरागत स्रोत
- जीवाश्म ईंधन
- समाप्य खनिज
उत्तर देखें
उत्तर: (a) गैर-परंपरागत स्रोत. ये नवीकरणीय हैं।
पंचपटमाली बॉक्साइट निक्षेप कहाँ हैं
- ओडिशा
- झारखंड
- गुजरात
- केरल
उत्तर देखें
उत्तर: (a) ओडिशा. ये कोरापुट ज़िले में हैं।
तमिलनाडु का नेवेली किसके लिए प्रसिद्ध है
- लौह अयस्क
- लिग्नाइट
- सोना
- यूरेनियम
उत्तर देखें
उत्तर: (b) लिग्नाइट. यह तापीय विद्युत को सहारा देता है।
थोरियम किसकी मोनाज़ाइट बालू से प्राप्त होता है
- पंजाब
- केरल
- बिहार
- हरियाणा
उत्तर देखें
उत्तर: (b) केरल. यह परमाणु ऊर्जा हेतु महत्वपूर्ण है।
भारत की सबसे समृद्ध खनिज पेटी है
- उत्तर-पश्चिमी प्रदेश
- सिंधु-गंगा मैदान
- उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश (छोटानागपुर और ओडिशा)
- थार मरुस्थल
उत्तर देखें
उत्तर: (c) उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश (छोटानागपुर और ओडिशा). इसमें कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज़ और बॉक्साइट हैं।
भारत हेतु गैर-परंपरागत ऊर्जा को बढ़ावा देना क्यों महत्वपूर्ण है
- जीवाश्म ईंधन असीमित हैं
- यह आयातित तेल पर निर्भरता घटाती और प्रदूषण कम करती है
- यह कार्बन उत्सर्जन बढ़ाती है
- यह कभी नवीकरणीय नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: (b) यह आयातित तेल पर निर्भरता घटाती और प्रदूषण कम करती है. यह सतत विकास को सहारा देती है।
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।