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विकास – कक्षा 12 जीव विज्ञान नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान, अध्याय 6। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
अरबों वर्षों में सरल रसायनों से जीवन विकसित हुआ। जीवाश्मों, शारीरिकी और अणुओं के प्रमाण प्राकृतिक वरण द्वारा विकास का समर्थन करते हैं, और मानव विकास होमिनिड जीवाश्मों से समझा जा सकता है।
उत्पत्ति और प्रमाण
- मिलर–यूरे प्रयोग में सरल गैसों और विद्युत स्फुलिंग से अमीनो अम्ल बने।
- समजात अंग (समान उत्पत्ति, भिन्न कार्य, जैसे अग्रपाद) अपसारी विकास; समरूप अंग (भिन्न उत्पत्ति, समान कार्य, जैसे पक्षी व कीट के पंख) अभिसारी विकास दर्शाते हैं।
- पेपर्ड शलभ में औद्योगिक मेलेनिनता प्राकृतिक वरण का उदाहरण है।
क्रियाविधि और मानव
- डार्विन: योग्यतम का प्राकृतिक वरण; ह्यूगो डी व्रीज़: उत्परिवर्तन (साल्टेशन)।
- हार्डी–वाइनबर्ग साम्य (p² + 2pq + q² = 1) जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन, उत्परिवर्तन, पुनर्योजन और वरण से भंग होता है।
- मानव क्रम: ड्रायोपिथेकस → रामापिथेकस → ऑस्ट्रेलोपिथेकस → होमो हैबिलिस → होमो इरेक्टस → निएंडरथल → होमो सेपियंस।
मुख्य शब्द
- अनुकूली विकिरण
- एक पूर्वज से विभिन्न आवासों में अनेक रूपों का विकास, जैसे डार्विन की फ़िंच
- आनुवंशिक विचलन
- संयोग से युग्मविकल्पी आवृत्ति में परिवर्तन, छोटी समष्टि में प्रबल
- अभिसारी विकास
- समान आवासों में रहने से असंबंधित जीवों में समान लक्षणों का विकास, जैसे पक्षियों और कीटों के पंख
सूत्र
- p² + 2pq + q² = 1
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
पेपर्ड शलभ में औद्योगिक मेलेनिनता से क्या प्रमाण मिलता है?2 अंक
औद्योगीकरण से पहले हल्के लाइकेन ढके पेड़ों पर हल्के रंग के शलभ अधिक थे। कालिख से तने काले होने पर गहरे शलभ पक्षियों से बेहतर छिपे और अधिक हो गए। इससे कम समय में प्राकृतिक वरण की क्रिया दिखी।
हार्डी–वाइनबर्ग साम्य को भंग करने वाले पाँच कारक लिखिए।3 अंक
जीन प्रवासन (जीन प्रवाह), आनुवंशिक विचलन, उत्परिवर्तन, युग्मकजनन में आनुवंशिक पुनर्योजन, और प्राकृतिक वरण।
डार्विन का प्राकृतिक वरण सिद्धांत समझाइए और डी व्रीज़ के उत्परिवर्तन सिद्धांत से तुलना कीजिए।5 अंक
डार्विन: जीव जीवित रह सकने से अधिक संतानें पैदा करते हैं, अतः अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है; जीवों में विविधताएँ होती हैं जिनमें कुछ वंशानुगत हैं; उपयोगी विविधता वाले अधिक जीवित रहते और जनन करते हैं (योग्यतम की उत्तरजीविता); अनेक पीढ़ियों में ये विविधताएँ संचित होकर धीरे-धीरे नई जातियाँ बनती हैं। डी व्रीज़ ने इवनिंग प्रिमरोज़ पर कार्य कर बताया कि बड़े अचानक परिवर्तन (उत्परिवर्तन, साल्टेशन) एक ही चरण में जाति निर्माण करते हैं। डार्विन की विविधताएँ छोटी और दिशात्मक हैं; डी व्रीज़ के उत्परिवर्तन बड़े, यादृच्छिक और अचानक।
त्वरित पुनरावृत्ति
- डार्विन की फ़िंच अनुकूली विकिरण दर्शाती हैं।
- हार्डी–वाइनबर्ग: p + q = 1।
- होमो हैबिलिस ने सबसे पहले औज़ार बनाए।
परीक्षा सुझाव
- समजात → अपसारी; समरूप → अभिसारी।
- स्पष्ट अंतर रखें: समजात अंग → अपसारी विकास; समरूप अंग → अभिसारी विकास।
अभ्यास MCQ
पक्षी और कीट के पंख हैं
- समजात
- समरूप
- अवशेषी
- समान
उत्तर देखें
उत्तर: (b) समरूप. समान कार्य, भिन्न उत्पत्ति।
प्राकृतिक वरण का प्रतिपादन किया
- लैमार्क ने
- डी व्रीज़ ने
- मेंडल ने
- डार्विन ने
उत्तर देखें
उत्तर: (d) डार्विन ने. डार्विन।
मिलर के प्रयोग में बने
- अमीनो अम्ल
- DNA
- कोशिकाएँ
- केवल प्रोटीन
उत्तर देखें
उत्तर: (a) अमीनो अम्ल. CH₄, NH₃, H₂, H₂O से।
डार्विन की फ़िंच उदाहरण हैं
- अभिसारी विकास का
- केवल आनुवंशिक विचलन का
- औद्योगिक मेलेनिनता का
- अनुकूली विकिरण का
उत्तर देखें
उत्तर: (d) अनुकूली विकिरण का. अनुकूली विकिरण।
अंगों के उपयोग और अनुपयोग का सिद्धांत दिया
- डार्विन ने
- लैमार्क ने
- डी व्रीज़ ने
- वॉलेस ने
उत्तर देखें
उत्तर: (b) लैमार्क ने. उपार्जित लक्षणों की वंशागति।
हार्डी–वाइनबर्ग समष्टि में q² = 0.16 हो तो विषमयुग्मजी (2pq) आवृत्ति है
- 0.48
- 0.24
- 0.36
- 0.16
उत्तर देखें
उत्तर: (a) 0.48. q = 0.4, p = 0.6, 2pq = 0.48।
पत्थर के औज़ार बनाने वाला पहला ज्ञात होमिनिड था
- ऑस्ट्रेलोपिथेकस
- होमो इरेक्टस
- होमो हैबिलिस
- निएंडरथल
उत्तर देखें
उत्तर: (c) होमो हैबिलिस. "हैंडी मैन"।
एक पूर्वज से ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी प्राणियों का अनेक रूपों में विकास उदाहरण है
- अभिसारी विकास का
- औद्योगिक मेलेनिनता का
- आनुवंशिक विचलन का
- अनुकूली विकिरण का
उत्तर देखें
उत्तर: (d) अनुकूली विकिरण का. अनेक आवासों में विकिरण।
सभी अध्याय: कक्षा 12 जीव विज्ञान
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।