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साझेदारी लेखांकन: आधारभूत अवधारणाएँ – कक्षा 12 लेखाशास्त्र नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 12 लेखाशास्त्र, अध्याय 1। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच का संबंध है जो सब या उनमें से कोई सबकी ओर से चलाए जाने वाले व्यवसाय के लाभ बाँटने पर सहमत हों, जैसा भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 में परिभाषित है। साझेदार प्रायः साझेदारी संलेख पर हस्ताक्षर करते हैं। साझेदारों के पूँजी खाते स्थायी या परिवर्तनशील हो सकते हैं, और पूँजी पर ब्याज, वेतन और अन्य विनियोजनों के बाद लाभ-हानि विनियोजन खाते से लाभ बाँटा जाता है। ख्याति फ़र्म की प्रतिष्ठा का मूल्य है।
साझेदारी और संलेख
- विशेषताएँ: दो या अधिक व्यक्ति, समझौता, वैध व्यवसाय, लाभ का बँटवारा और पारस्परिक एजेंसी।
- साझेदारी संलेख में पूँजी, लाभ विभाजन अनुपात, पूँजी और आहरण पर ब्याज, वेतन, और प्रवेश, सेवानिवृत्ति व विघटन के नियम होते हैं।
- संलेख के अभाव में: लाभ समान रूप से बँटता है, पूँजी पर ब्याज नहीं, आहरण पर ब्याज नहीं, साझेदारों को वेतन नहीं, और साझेदार के ऋण पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज।
पूँजी खाते और विनियोजन
- स्थायी पूँजी विधि: पूँजी खाते अपरिवर्तित रहते हैं; ब्याज, वेतन, आहरण और लाभ का हिस्सा अलग चालू खातों में जाते हैं।
- परिवर्तनशील पूँजी विधि: सभी समायोजन पूँजी खातों में होते हैं, इसलिए शेष बदलते हैं।
- लाभ-हानि विनियोजन खाता शुद्ध लाभ बाँटता है: पूँजी पर ब्याज, साझेदारों का वेतन और कमीशन नाम होते हैं, आहरण पर ब्याज जमा होता है, और शेष लाभ विभाजन अनुपात में बँटता है।
- वर्ष भर समान रूप से किए गए आहरण पर ब्याज छह महीने की औसत अवधि हेतु लगाया जाता है।
गारंटी, पिछले समायोजन और ख्याति
- किसी साझेदार को न्यूनतम लाभ की गारंटी दी जा सकती है, जिसकी कमी गारंटी देने वाले साझेदार उठाते हैं।
- पिछले समायोजन साझेदारों के बीच समायोजन प्रविष्टि से पिछले वर्षों की त्रुटियाँ या चूक सुधारते हैं।
- ख्याति अतिरिक्त लाभ लाने वाली प्रतिष्ठा का मूल्य है; यह स्थान, गुणवत्ता, प्रबंधन, बाज़ार स्थिति और ग्राहक आधार पर निर्भर है।
- ख्याति मूल्यांकन की विधियाँ: औसत लाभ, अधिलाभ (सामान्य लाभ से ऊपर लाभ) और पूँजीकरण।
मुख्य शब्द
- साझेदारी संलेख
- साझेदारी की शर्तें बताने वाला साझेदारों के बीच लिखित समझौता
- लाभ-हानि विनियोजन खाता
- साझेदारों में शुद्ध लाभ के बँटवारे को दिखाने वाला खाता
- स्थायी पूँजी विधि
- ऐसी विधि जिसमें साझेदारों के पूँजी खाते अपरिवर्तित रहते हैं और समायोजन चालू खातों में जाते हैं
- ख्याति
- फ़र्म की प्रतिष्ठा का मूल्य जो उसे सामान्य से अधिक लाभ कमाने देता है
- अधिलाभ
- सामान्य लाभ पर वास्तविक औसत लाभ का आधिक्य
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
साझेदारी संलेख के अभाव में भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के क्या प्रावधान हैं?2 अंक
संलेख के अभाव में: लाभ और हानि समान रूप से बँटते हैं; पूँजी पर ब्याज नहीं मिलता; आहरण पर ब्याज नहीं लगता; किसी साझेदार को वेतन या कमीशन नहीं मिलता; और फ़र्म को दिए साझेदार के ऋण पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है।
स्थायी और परिवर्तनशील पूँजी विधियों में अंतर बताइए।3 अंक
स्थायी पूँजी विधि में अतिरिक्त पूँजी या पूँजी निकासी के अतिरिक्त साझेदारों के पूँजी खाते अपरिवर्तित रहते हैं, और पूँजी पर ब्याज, वेतन, आहरण और लाभ का हिस्सा जैसे मद अलग चालू खातों में दर्ज होते हैं; हर साझेदार के दो खाते रखे जाते हैं। परिवर्तनशील पूँजी विधि में केवल पूँजी खाते रखे जाते हैं और ये सभी मद उन्हीं में दर्ज होते हैं, इसलिए शेष हर वर्ष बदलता है।
ख्याति क्या है? इसे प्रभावित करने वाले कारक और इसके मूल्यांकन की विधियाँ समझाइए।5 अंक
ख्याति फ़र्म की प्रतिष्ठा का वह मूल्य है जो उसे समान पूँजी वाले सामान्य व्यवसाय से अधिक लाभ कमाने देता है। यह अमूर्त परिसंपत्ति है। ख्याति को प्रभावित करने वाले कारकों में व्यवसाय की प्रकृति, सुविधाजनक स्थान, कुशल प्रबंधन, उत्पादों की गुणवत्ता, एकाधिकार जैसी बाज़ार स्थिति, निष्ठावान ग्राहक आधार, अनुज्ञप्ति या पेटेंट जैसे विशेष लाभ, और व्यवसाय चलने की अवधि शामिल हैं। ख्याति का मूल्यांकन तीन मुख्य विधियों से होता है। औसत लाभ विधि में ख्याति औसत लाभ गुणा सहमत क्रय वर्षों की संख्या है; लाभ में प्रवृत्ति हो तो भारित औसत प्रयुक्त हो सकता है। अधिलाभ विधि में ख्याति अधिलाभ, यानी औसत लाभ घटा सामान्य लाभ (प्रयुक्त पूँजी × सामान्य प्रतिफल दर), गुणा क्रय वर्षों की संख्या है। पूँजीकरण विधि में या तो औसत लाभ का सामान्य प्रतिफल दर पर पूँजीकरण कर प्रयुक्त पूँजी घटाई जाती है, या अधिलाभ का सीधे सामान्य दर पर पूँजीकरण होता है। उदाहरण के लिए, यदि औसत लाभ ₹60,000 और सामान्य लाभ ₹40,000 है, तो अधिलाभ ₹20,000 है और तीन वर्ष के क्रय पर ख्याति ₹60,000 है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- साझेदारी अधिनियम 1932, धारा 4।
- संलेख नहीं: समान लाभ, पूँजी पर ब्याज नहीं, साझेदार के ऋण पर 6 प्रतिशत।
- स्थायी बनाम परिवर्तनशील पूँजी; लाभ-हानि विनियोजन खाता।
- ख्याति: औसत लाभ, अधिलाभ, पूँजीकरण।
परीक्षा सुझाव
- साझेदारी संलेख न होने पर लागू पाँच प्रावधान सीखें।
- अधिलाभ से ख्याति हेतु लिखें: अधिलाभ = औसत लाभ − सामान्य लाभ; ख्याति = अधिलाभ × क्रय वर्षों की संख्या।
अभ्यास MCQ
भारत में साझेदारी किससे नियंत्रित है
- कंपनी अधिनियम, 2013
- भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932
- केवल अनुबंध अधिनियम
- आयकर अधिनियम
उत्तर देखें
उत्तर: (b) भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932. धारा 4 साझेदारी को परिभाषित करती है।
साझेदारी संलेख के अभाव में लाभ बँटता है
- पूँजी अनुपात में
- समान रूप से
- अनुभव के अनुपात में
- वरिष्ठ साझेदार के निर्णय से
उत्तर देखें
उत्तर: (b) समान रूप से. यह क़ानूनी प्रावधान है।
फ़र्म की प्रतिष्ठा का मूल्य कहलाता है
- पूँजी
- लाभ
- संचय
- ख्याति
उत्तर देखें
उत्तर: (d) ख्याति. यह अतिरिक्त लाभ लाती है।
संलेख के अभाव में साझेदार के ऋण पर ब्याज मिलता है
- 5 प्रतिशत
- 6 प्रतिशत
- 8 प्रतिशत
- 12 प्रतिशत वार्षिक
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 6 प्रतिशत. यह लाभ पर प्रभार है।
स्थायी पूँजी विधि में साझेदार का वेतन किसमें जमा होता है
- पूँजी खाते
- लाभ-हानि खाता
- चालू खाते
- रोकड़ खाता
उत्तर देखें
उत्तर: (c) चालू खाते. पूँजी स्थायी रहती है।
वर्ष भर समान रूप से किए गए आहरण पर ब्याज औसतन कितनी अवधि हेतु लगता है
- 3 महीने
- 6 महीने
- 9 महीने
- 12 महीने
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 6 महीने. आहरण वर्ष भर फैले होते हैं।
औसत लाभ ₹60,000; सामान्य लाभ ₹40,000; अधिलाभ के 3 वर्ष के क्रय पर ख्याति है
- ₹1,80,000
- ₹20,000
- ₹1,20,000
- ₹60,000
उत्तर देखें
उत्तर: (d) ₹60,000. 20,000 × 3।
लाभ-हानि विनियोजन खाते में कौन-सा मद जमा होता है
- आहरण पर ब्याज
- पूँजी पर ब्याज
- साझेदार का वेतन
- साझेदार को कमीशन
उत्तर देखें
उत्तर: (a) आहरण पर ब्याज. यह फ़र्म की आय है।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।