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लेखन कला और शहरी जीवन – कक्षा 11 इतिहास नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 इतिहास, अध्याय 1। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
वर्तमान इराक़ में दजला और फ़रात नदियों के बीच की भूमि मेसोपोटामिया में लगभग 3000 ई.पू. से विश्व के कुछ प्राचीनतम नगर बने। वहाँ अभिलेख रखने हेतु लेखन विकसित हुआ, जिसमें मिट्टी की पट्टिकाओं पर कीलाक्षर लिपि का प्रयोग हुआ। उरुक, उर और मारी जैसे नगर कृषि, व्यापार, मंदिरों और राजत्व से विकसित हुए। मेसोपोटामियाई सभ्यता ने लेखन, गणित, पंचांग और गिलगमेश महाकाव्य जैसा साहित्य दिया।
भूमि और प्रारंभिक नगर
- दक्षिणी मेसोपोटामिया की मिट्टी उपजाऊ थी पर वर्षा कम थी, इसलिए नदियों से सिंचाई आवश्यक थी; उत्तर में चरागाह और वर्षा-आधारित खेती थी।
- उरुक प्राचीनतम नगरों में से एक था; मंदिर आर्थिक और धार्मिक जीवन के केंद्र थे।
- नगर श्रम विभाजन, धातुओं, पत्थर और लकड़ी के संगठित व्यापार, और नदियों व नहरों से कुशल परिवहन पर निर्भर थे।
लेखन
- लेखन लगभग 3200 ई.पू. में मंदिरों द्वारा प्राप्त वस्तुओं जैसे लेन-देन दर्ज करने हेतु शुरू हुआ।
- कीलाक्षर लिपि में सरकंडे की लेखनी से गीली मिट्टी की पट्टिकाओं पर दबाए गए कील के आकार के चिह्न थे।
- केवल कुछ लोग, मुख्यतः लिपिक, पढ़-लिख सकते थे; लेखन का प्रयोग अभिलेखों, क़ानूनों, पत्रों, साहित्य और शब्दकोशों हेतु हुआ।
नगरीय जीवन और विरासत
- राजा युद्ध से सत्ता में आए और महल, मंदिर और नगर-दीवारें बनाईं; मारी फ़रात पर स्थित राजधानी थी जो पशुचारक समूहों से जुड़ी थी।
- समाज में अभिजात वर्ग और सामान्य लोगों का बड़ा समूह था; एकल परिवार सामान्य था।
- मेसोपोटामिया की विरासत में साठ-आधारित संख्या पद्धति, 60 मिनट का घंटा और 360 अंश का वृत्त, खगोलशास्त्र और गिलगमेश महाकाव्य शामिल हैं।
मुख्य शब्द
- मेसोपोटामिया
- दजला और फ़रात नदियों के बीच की भूमि
- कीलाक्षर
- मिट्टी की पट्टिकाओं पर लिखी जाने वाली मेसोपोटामिया की कील के आकार की लिपि
- लिपिक
- पढ़ने-लिखने और अभिलेख रखने हेतु प्रशिक्षित व्यक्ति
- ज़िगुरात
- मेसोपोटामियाई नगरों में सीढ़ीदार मंदिर मीनार
- गिलगमेश महाकाव्य
- उरुक के राजा गिलगमेश पर प्रसिद्ध मेसोपोटामियाई काव्य
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
कीलाक्षर क्या है?2 अंक
कीलाक्षर मेसोपोटामिया की लिपि थी, जिसमें नुकीले सरकंडे से गीली मिट्टी की पट्टिकाओं पर कील के आकार के चिह्न दबाए जाते थे। इसका प्रयोग अभिलेखों, पत्रों, क़ानूनों और साहित्य हेतु होता था।
मेसोपोटामिया में लेखन का विकास क्यों हुआ?3 अंक
लेखन इसलिए विकसित हुआ क्योंकि नगरों और मंदिरों को प्राप्त और वितरित वस्तुओं, ऋणों, मज़दूरी और व्यापार के अभिलेख रखने थे। आर्थिक लेन-देन जटिल होने पर स्मृति पर्याप्त नहीं थी, इसलिए मात्राओं और नामों को दर्ज करने हेतु चिह्नों का प्रयोग हुआ। बाद में लेखन क़ानूनों, पत्रों और साहित्य हेतु प्रयुक्त हुआ।
मेसोपोटामिया में नगरीकरण की विशेषताओं और उसकी विरासत का वर्णन कीजिए।5 अंक
मेसोपोटामिया में नगरीकरण लगभग 3000 ई.पू. में दक्षिण में शुरू हुआ, जहाँ नहरों से दजला और फ़रात का जल पाने वाली उपजाऊ मिट्टी ने अधिशेष फ़सलें दीं। उरुक, उर और मारी जैसे नगर मंदिरों, महलों, शिल्प और व्यापार के केंद्र बने। मंदिर प्राचीनतम प्रमुख संस्थाएँ थे, जो उपज एकत्र करते और श्रम संगठित करते थे; बाद में युद्ध में नेतृत्व करने वाले राजा शक्तिशाली बने और महल, मंदिर और नगर-दीवारें बनवाईं। नगरीय जीवन किसानों, शिल्पकारों, पुजारियों, व्यापारियों और लिपिकों के बीच श्रम विभाजन और व्यापार पर निर्भर था, क्योंकि मेसोपोटामिया में धातुओं, पत्थर और अच्छी लकड़ी का अभाव था, जो तुर्की, ईरान और खाड़ी पार से लाई जाती थीं। नदियाँ और नहरें सस्ता परिवहन देती थीं। मिट्टी की पट्टिकाओं पर कीलाक्षर लेखन लगभग 3200 ई.पू. में अभिलेख रखने हेतु विकसित हुआ और क़ानून, प्रशासन और साहित्य तक फैला। मेसोपोटामिया की विरासत में प्राचीनतम लेखन पद्धति, 60 पर आधारित संख्या पद्धति जो 60 मिनट का घंटा और 360 अंश का वृत्त देती है, खगोलशास्त्र और पंचांग में प्रगति, विधि संहिताएँ, और मित्रता व अमरता की खोज पर चिंतन करने वाला गिलगमेश महाकाव्य जैसा साहित्य शामिल हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- मेसोपोटामिया: दजला और फ़रात, वर्तमान इराक़।
- लगभग 3000 ई.पू. प्राचीनतम नगर; उरुक, उर, मारी।
- लगभग 3200 ई.पू. से मिट्टी की पट्टिकाओं पर कीलाक्षर।
- विरासत: साठ-आधारित गणना, पंचांग, गिलगमेश।
परीक्षा सुझाव
- मानचित्र पर दजला, फ़रात, उरुक, उर और मारी अंकित करें।
- विश्व को मेसोपोटामिया के तीन योगदान सूचीबद्ध करें।
अभ्यास MCQ
मेसोपोटामिया किन नदियों के बीच स्थित है
- नील और कांगो
- दजला और फ़रात
- सिंधु और गंगा
- ह्वांग हो और यांग्त्ज़ी
उत्तर देखें
उत्तर: (b) दजला और फ़रात. यह वर्तमान इराक़ में है।
मेसोपोटामिया की लिपि कहलाती है
- कीलाक्षर
- चित्रलिपि
- ब्राह्मी
- खरोष्ठी
उत्तर देखें
उत्तर: (a) कीलाक्षर. इसमें कील के आकार के चिह्न थे।
मेसोपोटामिया में लेखन किस पर होता था
- काग़ज़
- ताड़पत्र
- मिट्टी की पट्टिकाएँ
- रेशम
उत्तर देखें
उत्तर: (c) मिट्टी की पट्टिकाएँ. सरकंडे की लेखनी प्रयुक्त होती थी।
मेसोपोटामिया के प्राचीनतम नगरों में से एक था
- रोम
- उरुक
- एथेंस
- हड़प्पा
उत्तर देखें
उत्तर: (b) उरुक. उरुक लगभग 3000 ई.पू. से विकसित हुआ।
60 पर आधारित संख्या पद्धति कहाँ से आई
- मिस्र
- चीन
- मेसोपोटामिया
- यूनान
उत्तर देखें
उत्तर: (c) मेसोपोटामिया. इसी से घंटे में 60 मिनट होते हैं।
मेसोपोटामिया में प्रारंभिक लेखन का मुख्य उद्देश्य था
- लेन-देन के अभिलेख रखना
- उपन्यास लिखना
- पुस्तकें छापना
- ईमेल भेजना
उत्तर देखें
उत्तर: (a) लेन-देन के अभिलेख रखना. मंदिर वस्तुएँ दर्ज करते थे।
दक्षिणी मेसोपोटामिया में सिंचाई आवश्यक क्यों थी
- भारी वर्षा होती थी
- मिट्टी उपजाऊ थी पर खेती हेतु वर्षा बहुत कम थी
- कोई नदी नहीं थी
- खेती प्रतिबंधित थी
उत्तर देखें
उत्तर: (b) मिट्टी उपजाऊ थी पर खेती हेतु वर्षा बहुत कम थी. नहरें नदी का जल खेतों तक ले जाती थीं।
मेसोपोटामियाई नगरों के विकास को कौन-सी विशेषता सबसे अच्छी तरह समझाती है
- व्यापार से अलगाव
- मंदिरों का अभाव
- श्रम विभाजन, व्यापार और संगठित उत्पादन
- केवल घुमंतू जीवन
उत्तर देखें
उत्तर: (c) श्रम विभाजन, व्यापार और संगठित उत्पादन. नगरों को विशेषज्ञता और विनिमय चाहिए।
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।