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तीन वर्ग – कक्षा 11 इतिहास नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 इतिहास, अध्याय 4। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
नौवीं से सोलहवीं शताब्दी तक के मध्यकालीन यूरोपीय समाज को अक्सर तीन वर्गों वाला बताया जाता है: पादरी, जो प्रार्थना करते थे; अभिजात वर्ग, जो युद्ध करता था; और किसान, जो काम करते थे। यह सामाजिक व्यवस्था सामंतवाद से जुड़ी थी, जिसमें सैन्य सेवा और श्रम के बदले भूमि दी जाती थी। चर्च अत्यंत शक्तिशाली था। ग्यारहवीं शताब्दी से कृषि सुधार, नगरों और व्यापार का विकास, और बाद में ब्लैक डेथ जैसे संकटों ने सामंती व्यवस्था को कमज़ोर किया।
सामंतवाद और तीन वर्ग
- सामंतवाद ऐसी व्यवस्था थी जिसमें स्वामी निष्ठा और सैन्य सेवा के बदले जागीरदार को भूमि (जागीर) देता था।
- राजा शीर्ष पर था; स्वामी और नाइट भूमि रखते थे, और किसान मेनर पर काम करते थे।
- पहले वर्ग, पादरी, में पुजारी, बिशप और भिक्षु थे; दूसरे वर्ग, अभिजात, में स्वामी और नाइट थे; तीसरा वर्ग स्वतंत्र किसानों और कृषिदासों से बना था।
मेनर में जीवन और चर्च
- मेनर में स्वामी का आवास, खेत, चरागाह, वन, चर्च और गाँव होते थे; इसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता था।
- कृषिदास स्वामी की भूमि पर बिना मज़दूरी काम करते, कर चुकाते और बिना अनुमति नहीं जा सकते थे।
- चर्च के पास बड़ी भूमि थी, वह टाइद (उपज का दसवाँ भाग) वसूलता था, और बेनेडिक्टाइन जैसे मठ शिक्षा के केंद्र थे; फ़्रांसिस्कन जैसे फ़्रायर लोगों के बीच प्रचार करते थे।
परिवर्तन और सामंतवाद का पतन
- ग्यारहवीं शताब्दी से भारी लोहे के हल, घोड़े के पट्टे और तीन-खेत पद्धति जैसी नई तकनीकों ने उत्पादन बढ़ाया।
- नगर व्यापार और शिल्प के केंद्र बने; श्रेणियाँ (गिल्ड) शिल्पों का नियमन करती थीं, और कैथेड्रल नगर विकसित हुए।
- चौदहवीं शताब्दी में अकाल, ब्लैक डेथ (1347–50) और किसान विद्रोहों से श्रम की कमी हुई और कृषिदासता कमज़ोर हुई; फ़्रांस और इंग्लैंड में शक्तिशाली राजतंत्र उभरे।
मुख्य शब्द
- सामंतवाद
- वह व्यवस्था जिसमें सेवा के बदले स्वामी से भूमि ली जाती थी
- जागीर (फ़ीफ़)
- स्वामी द्वारा जागीरदार को दी गई भूमि
- कृषिदास
- स्वामी की भूमि से बँधा किसान
- मेनर
- खेतों और गाँवों सहित स्वामी की जागीर
- टाइद
- चर्च को दिया जाने वाला उपज का दसवाँ भाग
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
मेनर क्या था?2 अंक
मेनर स्वामी की जागीर थी, जिसमें उसका आवास, खेत, चरागाह, वन, चर्च और किसानों के गाँव शामिल थे। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर आत्मनिर्भर होना था, जिसमें कृषिदास स्वामी की भूमि पर काम करते थे।
मध्यकालीन यूरोप में कृषिदासों की स्थिति का वर्णन कीजिए।3 अंक
कृषिदास स्वामी की भूमि के साथ अपने लिए भी भूखंड जोतते थे। उन्हें श्रम सेवाएँ देनी पड़ती थीं, वस्तु या धन में कर चुकाने पड़ते थे, शुल्क देकर स्वामी की चक्की और भट्ठी का प्रयोग करना पड़ता था और विवाह या मेनर छोड़ने हेतु अनुमति लेनी पड़ती थी। उन्हें सुरक्षा मिलती थी पर स्वतंत्रता बहुत कम थी।
मध्यकालीन यूरोपीय समाज के तीन वर्गों और सामंतवाद के पतन के कारकों को समझाइए।5 अंक
मध्यकालीन यूरोपीय समाज को तीन वर्गों वाला बताया जाता था। पहला वर्ग पादरियों का था, जिसमें पुजारी, बिशप, मठाधीश और भिक्षु थे, जो प्रार्थना से समाज की सेवा का दावा करते थे; चर्च के पास बड़ी भूमि थी, वह टाइद वसूलता था और मठों से शिक्षा नियंत्रित करता था। दूसरा वर्ग अभिजातों का था, जिसमें स्वामी और नाइट थे, जो सैन्य सेवा और निष्ठा के बदले राजा या उच्च स्वामियों से जागीर के रूप में भूमि रखते थे और मेनरों को नियंत्रित करते थे। तीसरा वर्ग स्वतंत्र किसानों और कृषिदासों का था, जो भूमि जोतते, श्रम देते और स्वामियों व चर्च को कर चुकाते थे। सामंतवाद कहलाने वाली यह व्यवस्था ग्यारहवीं शताब्दी से बदलने लगी। भारी लोहे के हल, घोड़े के पट्टे और तीन-खेत पद्धति जैसी नई तकनीक ने कृषि उत्पादन और जनसंख्या बढ़ाई। अधिशेष से व्यापार, नगरों और श्रेणियों का विकास हुआ, और नगर वहाँ भागकर आए कृषिदासों को स्वतंत्रता देते थे। चौदहवीं शताब्दी में संकटों की शृंखला आई: अकाल, 1347–50 की ब्लैक डेथ, जिसने यूरोप की जनसंख्या का बड़ा भाग मार डाला, और युद्ध। श्रम की कमी से मज़दूरी बढ़ी, और स्वामियों द्वारा पुराने दायित्व बहाल करने के प्रयासों से 1381 में इंग्लैंड जैसे किसान विद्रोह हुए। श्रम सेवाओं का स्थान धन भुगतान ने लिया, और कृषिदासता घटी। साथ ही फ़्रांस और इंग्लैंड में शक्तिशाली राजतंत्रों ने सामंती स्वामियों की शक्ति घटाई।
त्वरित पुनरावृत्ति
- तीन वर्ग: पादरी, अभिजात, किसान।
- सामंतवाद: जागीर, जागीरदार, मेनर, कृषिदास।
- चर्च: टाइद, मठ, फ़्रायर।
- नई तकनीक, नगर; ब्लैक डेथ 1347–50; सामंतवाद का पतन।
परीक्षा सुझाव
- राजा को शीर्ष पर रखकर तीन वर्गों का पिरामिड बनाएँ।
- समझाएँ कि ब्लैक डेथ ने कृषिदासता को कमज़ोर करने में कैसे मदद की।
अभ्यास MCQ
मध्यकालीन यूरोप में पहला वर्ग था
- अभिजात
- पादरी
- किसान
- व्यापारी
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उत्तर: (b) पादरी. उनका संबंध प्रार्थना से था।
स्वामी द्वारा जागीरदार को दी गई भूमि कहलाती थी
- टाइद
- जागीर (फ़ीफ़)
- गिल्ड
- मेनर भवन
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उत्तर: (b) जागीर (फ़ीफ़). यह सेवा के बदले दी जाती थी।
चर्च को दिया जाने वाला उपज का दसवाँ भाग कहलाता था
- टाइद
- टाइल
- जज़िया
- लगान
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उत्तर: (a) टाइद. इससे पादरियों का भरण-पोषण होता था।
स्वामी की भूमि से बँधा किसान कहलाता था
- कृषिदास
- नाइट
- फ़्रायर
- बिशप
उत्तर देखें
उत्तर: (a) कृषिदास. कृषिदास स्वतंत्र रूप से नहीं जा सकते थे।
ब्लैक डेथ ने यूरोप को कब प्रभावित किया
- 1066–70
- 1347–50
- 1453–60
- 1517–20
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 1347–50. इसने जनसंख्या के बड़े भाग को मार डाला।
उत्पादन बढ़ाने हेतु भूमि को तीन खेतों में बाँटने वाली कृषि पद्धति थी
- झूम खेती
- तीन-खेत पद्धति
- सीढ़ीदार खेती
- बाग़ान पद्धति
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उत्तर: (b) तीन-खेत पद्धति. इसने ग्यारहवीं शताब्दी से उत्पादन बढ़ाया।
ब्लैक डेथ ने सामंतवाद को कैसे कमज़ोर किया
- श्रम की कमी से मज़दूरी बढ़ी और किसानों ने स्वतंत्रता माँगी
- इसने कृषिदासों की संख्या बढ़ाई
- इसने स्वामियों का नियंत्रण सशक्त किया
- इसने व्यापार समाप्त किया
उत्तर देखें
उत्तर: (a) श्रम की कमी से मज़दूरी बढ़ी और किसानों ने स्वतंत्रता माँगी. स्वामी पुराने कर आसानी से नहीं थोप सके।
मध्यकालीन नगरों के विकास में किस विकास ने सबसे अधिक मदद की
- व्यापार का पतन
- अधिशेष और बाज़ार बनाने वाला कृषि और व्यापार का विस्तार
- शिल्पों की समाप्ति
- मेनरों का अलगाव
उत्तर देखें
उत्तर: (b) अधिशेष और बाज़ार बनाने वाला कृषि और व्यापार का विस्तार. अधिशेष और विनिमय नगरों को सहारा देते हैं।
यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।