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लेखांकन के सैद्धांतिक आधार – कक्षा 11 लेखाशास्त्र नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ
NCERT कक्षा 11 लेखाशास्त्र, अध्याय 2। नोट्स, मुख्य शब्द, उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न और MCQ।
अध्याय का सार
लेखांकन सामान्यतः स्वीकृत लेखांकन सिद्धांतों (GAAP) नामक नियमों का पालन करता है, जो मूल अवधारणाओं और परिपाटियों से बने हैं, ताकि वित्तीय विवरण समरूप, विश्वसनीय और तुलनीय हों। भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान द्वारा जारी लेखांकन मानक और अंतर्राष्ट्रीय मानकों से अभिसरित Ind AS मार्गदर्शन करते हैं कि लेन-देनों का व्यवहार कैसे हो।
मूल लेखांकन अवधारणाएँ
- व्यावसायिक इकाई: व्यवसाय अपने स्वामी से अलग है, इसलिए पूँजी व्यवसाय की स्वामी के प्रति देयता है।
- मुद्रा मापन: केवल मुद्रा में मापे जा सकने वाले लेन-देन दर्ज होते हैं।
- चालू व्यवसाय: माना जाता है कि व्यवसाय लंबे समय तक चलेगा, इसलिए परिसंपत्तियाँ लागत घटा ह्रास पर दिखाई जाती हैं।
- लेखांकन अवधि: परिणाम निश्चित अवधि, प्रायः एक वर्ष, के लिए मापे जाते हैं।
- लागत अवधारणा: परिसंपत्तियाँ क्रय मूल्य पर दर्ज होती हैं; द्विपक्षीय अवधारणा: हर लेन-देन के दो प्रभाव होते हैं, इसलिए परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी।
अन्य अवधारणाएँ और परिपाटियाँ
- आगम मान्यता: आगम अर्जित होने पर मान्य होता है, आवश्यक नहीं कि नकद प्राप्ति पर।
- मिलान: किसी अवधि के व्ययों का उसी अवधि के आगम से मिलान होता है।
- पूर्ण प्रकटीकरण, निरंतरता, रूढ़िवादिता (विवेकशीलता: लाभ की प्रत्याशा न करें पर सभी संभावित हानियों का प्रावधान करें), सारता और वस्तुनिष्ठता।
प्रणालियाँ, आधार और मानक
- प्रणालियाँ: दोहरा लेखा प्रणाली (दोनों पक्ष दर्ज) और एकल लेखा प्रणाली (अपूर्ण अभिलेख)।
- आधार: नकद आधार केवल नकद प्राप्तियाँ और भुगतान दर्ज करता है; उपार्जन आधार आगम और व्यय उत्पन्न होने पर दर्ज करता है।
- ICAI का लेखांकन मानक बोर्ड 1977 में बना; Ind AS IFRS से अभिसरित हैं। GST वस्तुओं और सेवाओं पर गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है।
मुख्य शब्द
- GAAP
- लेखे तैयार करने में अपनाए जाने वाले सामान्यतः स्वीकृत नियम और सिद्धांत
- व्यावसायिक इकाई अवधारणा
- यह सिद्धांत कि व्यवसाय और उसका स्वामी अलग इकाइयाँ हैं
- द्विपक्षीय अवधारणा
- यह सिद्धांत कि हर लेन-देन दो खातों को प्रभावित करता है, जिससे परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी
- मिलान अवधारणा
- व्ययों का उसी लेखांकन अवधि के आगम से मिलान होता है
- उपार्जन आधार
- आगम और व्यय अर्जित या उत्पन्न होने पर दर्ज करना, नकद लेन-देन पर नहीं
उत्तर सहित महत्वपूर्ण प्रश्न
व्यावसायिक इकाई अवधारणा समझाइए।2 अंक
व्यावसायिक इकाई अवधारणा के अनुसार व्यवसाय को उसके स्वामी से अलग और भिन्न माना जाता है। लेन-देन व्यवसाय के दृष्टिकोण से दर्ज होते हैं, इसलिए स्वामी द्वारा लाई गई पूँजी व्यवसाय की देयता है, और स्वामी के निजी व्यय आहरण माने जाते हैं, व्यावसायिक व्यय नहीं।
लेखांकन के नकद आधार और उपार्जन आधार में अंतर बताइए।3 अंक
नकद आधार में आगम और व्यय तभी दर्ज होते हैं जब नकद वास्तव में प्राप्त या भुगतान हो, इसलिए अदत्त व्यय और उपार्जित आय की उपेक्षा होती है। उपार्जन आधार में आगम अर्जित होने पर और व्यय उत्पन्न होने पर दर्ज होते हैं, चाहे नकद का लेन-देन हुआ हो या नहीं। उपार्जन आधार लाभ का अधिक सही चित्र देता है और कंपनियों हेतु अनिवार्य है।
उदाहरण सहित किन्हीं पाँच मूल लेखांकन अवधारणाओं को समझाइए।5 अंक
लेखांकन अवधारणाएँ वे मूल मान्यताएँ हैं जिन पर लेखे तैयार होते हैं। व्यावसायिक इकाई अवधारणा में व्यवसाय अपने स्वामी से अलग है; उदाहरण के लिए, स्वामी द्वारा लाई गई पूँजी देयता के रूप में दिखाई जाती है, और निजी उपयोग हेतु लिया गया माल आहरण है। मुद्रा मापन अवधारणा में केवल मुद्रा में मापे जा सकने वाले लेन-देन दर्ज होते हैं; कर्मचारियों की निष्ठा या हड़ताल का ख़तरा दर्ज नहीं होता। चालू व्यवसाय अवधारणा में माना जाता है कि व्यवसाय लंबे समय तक चलेगा, इसलिए स्थायी परिसंपत्तियाँ विक्रय मूल्य के बजाय लागत घटा ह्रास पर दिखाई जाती हैं। द्विपक्षीय अवधारणा में हर लेन-देन के समान राशि के दो प्रभाव होते हैं; उदाहरण के लिए, नकद फ़र्नीचर ख़रीदने से फ़र्नीचर बढ़ता और रोकड़ घटती है, जिससे परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी सत्य रहता है। मिलान अवधारणा में किसी अवधि के व्ययों का उसी अवधि के आगम से मिलान होता है; उदाहरण के लिए, मार्च का वेतन, भले अप्रैल में चुकाया जाए, उसी वर्ष के लाभ-हानि खाते में डाला जाता है। अन्य अवधारणाओं में लेखांकन अवधि, लागत, आगम मान्यता, पूर्ण प्रकटीकरण, निरंतरता, रूढ़िवादिता और सारता शामिल हैं। ये मिलकर लेखों को समरूप, विश्वसनीय और तुलनीय बनाती हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- इकाई, मुद्रा मापन, चालू व्यवसाय, लेखांकन अवधि।
- लागत, द्विपक्षीय, आगम मान्यता, मिलान।
- प्रकटीकरण, निरंतरता, रूढ़िवादिता, सारता, वस्तुनिष्ठता।
- दोहरा लेखा; नकद बनाम उपार्जन आधार; ASB 1977; Ind AS।
परीक्षा सुझाव
- हर अवधारणा का एक व्यावहारिक उदाहरण सीखें, जैसे पूँजी को देयता दिखाना (व्यावसायिक इकाई)।
- रूढ़िवादिता एक पंक्ति में याद रखें: लाभ की प्रत्याशा न करें, सभी हानियों का प्रावधान करें।
अभ्यास MCQ
व्यवसाय स्वामी से अलग है, यह अवधारणा है
- चालू व्यवसाय
- व्यावसायिक इकाई
- लागत
- मिलान
उत्तर देखें
उत्तर: (b) व्यावसायिक इकाई. पूँजी देयता के रूप में दिखाई जाती है।
केवल मुद्रा में मापे जा सकने वाले लेन-देन किस अवधारणा के अंतर्गत दर्ज होते हैं
- लागत अवधारणा
- मुद्रा मापन अवधारणा
- द्विपक्षीय अवधारणा
- उपार्जन अवधारणा
उत्तर देखें
उत्तर: (b) मुद्रा मापन अवधारणा. कर्मचारी का कौशल दर्ज नहीं होता।
यह मान्यता कि व्यवसाय लंबे समय तक चलेगा, है
- लेखांकन अवधि अवधारणा
- सारता अवधारणा
- चालू व्यवसाय अवधारणा
- निरंतरता अवधारणा
उत्तर देखें
उत्तर: (c) चालू व्यवसाय अवधारणा. परिसंपत्तियाँ लागत घटा ह्रास पर दिखाई जाती हैं।
लेखांकन समीकरण परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी किस पर आधारित है
- मुद्रा मापन अवधारणा
- द्विपक्षीय अवधारणा
- रूढ़िवादिता
- मिलान अवधारणा
उत्तर देखें
उत्तर: (b) द्विपक्षीय अवधारणा. हर लेन-देन के दो प्रभाव होते हैं।
अंतिम स्टॉक का मूल्यांकन लागत या बाज़ार मूल्य, जो कम हो, पर करना किसका पालन है
- निरंतरता
- पूर्ण प्रकटीकरण
- सारता
- रूढ़िवादिता
उत्तर देखें
उत्तर: (d) रूढ़िवादिता. यह लाभ को अधिक दिखाने से बचाता है।
ICAI का लेखांकन मानक बोर्ड कब गठित हुआ
- 1949
- 1977
- 1991
- 2017
उत्तर देखें
उत्तर: (b) 1977. यह लेखांकन मानक बनाता है।
इस वर्ष का वेतन, भले अगले वर्ष चुकाया जाए, इस वर्ष के आगम पर डालना किसका पालन है
- लागत अवधारणा
- मिलान अवधारणा
- इकाई अवधारणा
- मुद्रा मापन अवधारणा
उत्तर देखें
उत्तर: (b) मिलान अवधारणा. व्यय आगम की अवधि से मिलते हैं।
हर वर्ष ह्रास की एक ही विधि अपनाना दर्शाता है
- रूढ़िवादिता
- वस्तुनिष्ठता
- सारता
- निरंतरता
उत्तर देखें
उत्तर: (d) निरंतरता. इससे समय के साथ तुलना संभव होती है।
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यह सामग्री Kundali IQ ने पुनरावृत्ति में मदद हेतु मानक, स्थापित तथ्यों से लिखी है। यह NCERT का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है; अपनी पाठ्यपुस्तक भी अवश्य पढ़ें।